नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने करीब सात महीने के इंतजार के बाद आखिरकार राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में पार्टी ने अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे खास बात यह है कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पार्टी के लंबे समय से आईटी सेल की कमान संभाल रहे अमित मालवीय को इस बार संगठन की नई टीम में जगह नहीं मिली है।
नितिन नबीन की टीम में 8 राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हैं, जबकि संगठन महासचिव के पद पर बीएल संतोष पहले की तरह बने रहेंगे। सौदान सिंह और शिवप्रकाश को सह संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने मीडिया से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर भी निरंतरता बरकरार रखी है और अनिल बलूनी पहले की तरह मीडिया इंचार्ज बने रहेंगे।
वसुंधरा राजे समेत 13 नेताओं को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर कुल 13 नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सबसे प्रमुख नाम राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का है। उनके साथ राम माधव, तीरथ सिंह रावत, बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा, डी. पुरंदेश्वरी, भारती पवार, मनप्रीत बादल, वी. नरेंद्र भाई दोषी, लाल सिंह आर्या, एम. नागराज, तारिक मंसूर और मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।
वसुंधरा राजे को संगठन में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना राजस्थान की राजनीति के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजे लंबे समय से बीजेपी की प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल रही हैं और राजस्थान की राजनीति में उनका व्यापक प्रभाव रहा है।
8 महासचिवों में सुनील बंसल से स्मृति ईरानी तक
नितिन नबीन की नई टीम में पार्टी ने आठ राष्ट्रीय महासचिव बनाए हैं। इनमें सुनील बंसल, विनोद तावड़े, बिप्लब देव, स्मृति ईरानी, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया शामिल हैं।
इन नियुक्तियों के जरिए बीजेपी ने संगठन में अलग-अलग राज्यों और सामाजिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की कोशिश की है। नई टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महासचिव की जिम्मेदारी दिया जाना भी महत्वपूर्ण बदलाव है।
बीएल संतोष का संगठन महासचिव पद बरकरार
बीजेपी संगठन में सबसे प्रभावशाली पदों में से एक राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी बीएल संतोष के पास पहले की तरह बनी रहेगी। संगठन महासचिव के तौर पर संतोष लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
उनके साथ सौदान सिंह और शिवप्रकाश को सह संगठन महासचिव बनाया गया है। इससे साफ है कि पार्टी ने संगठन के केंद्रीय ढांचे में निरंतरता बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।
अमित मालवीय की छुट्टी, दीपक महस्के को सोशल मीडिया की कमान
नई टीम में सबसे चर्चित बदलावों में से एक बीजेपी आईटी सेल से जुड़ा है। लंबे समय से पार्टी की आईटी और सोशल मीडिया रणनीति से जुड़े अमित मालवीय को नई टीम में जगह नहीं मिली है।
मालवीय की जगह दीपक महस्के को सोशल मीडिया का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चुनावी रणनीति का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
बीजेपी की डिजिटल रणनीति में आईटी सेल की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में सोशल मीडिया की जिम्मेदारी में बदलाव को संगठन के डिजिटल ढांचे में अहम फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है।
पीयूष गोयल बने कोषाध्यक्ष, राजेश मंगल को सहकोषाध्यक्ष
नई टीम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने राजेश अग्रवाल की जगह ली है।
वहीं राजेश मंगल को राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन के वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी अब गोयल के नेतृत्व में होगी। पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष बनाए जाने से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी ने सरकार और संगठन के अनुभवी नेताओं के बीच बेहतर तालमेल को महत्व दिया है।
इसके अलावा तरुण चुग को मुख्यालय प्रभारी नियुक्त किया गया है। संगठन के केंद्रीय मुख्यालय से जुड़े कामकाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
बीडी शर्मा को सभी इकाइयों का कॉर्डिनेटर बनाया गया
मध्य प्रदेश बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा को सभी इकाइयों का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। संगठन में यह जिम्मेदारी कई स्तरों पर समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बीजेपी ने नई टीम में संगठन के विभिन्न मोर्चों और इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया है। इसी क्रम में अलग-अलग मोर्चों के अध्यक्षों की भी घोषणा की गई है।
राष्ट्रीय सचिवों की लंबी सूची में नए चेहरों को जगह
नई टीम में कुल 16 राष्ट्रीय सचिवों को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, भोला सिंह, प्रदीप वर्मा, जगदीश पटेल, संदीप पाठक, फेंगनोन कोनयाक, संगीता यादव, अनिल एंटनी, एम. वेंकटेशन, मनोज टिग्गा, सिद्धार्थ शंभु, स्वदेश सिंह, मृगांका देब वर्मन, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश शामिल हैं।
राष्ट्रीय सचिवों की सूची में अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। बीजेपी ने संगठन में नए चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाने पर भी जोर दिया है।
सात मोर्चों की कमान भी तय
पार्टी ने युवा, महिला, ओबीसी, एससी, किसान, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के अध्यक्षों की भी घोषणा कर दी है।
हेमांग जोशी को युवा मोर्चा, रूप चौधरी को महिला मोर्चा, अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा, शिवेश राम को एससी मोर्चा, बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा, मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है।
इस तरह बीजेपी ने पार्टी के प्रमुख मोर्चों में भी नई जिम्मेदारियों का ऐलान कर संगठनात्मक ढांचे को पूरा कर दिया है।
नड्डा की टीम के कई पुराने चेहरे बाहर
नितिन नबीन की नई टीम में जेपी नड्डा के कार्यकाल वाली टीम के कई नेताओं को जगह नहीं मिली है। महासचिव पद पर काम कर रहे अरुण सिंह, दुष्यंत गौतम, तरुण चुग और राधामोहनदास अग्रवाल अब नई टीम का हिस्सा नहीं हैं।
इसी तरह राष्ट्रीय सचिव के पद पर कार्यरत अरविंद मेनन, पंकजा मुंडे, नरेंद्र सिंह, अलका गुर्जर, ओमप्रकाश धुर्वे, रितुराज सिन्हा, कामाख्या प्रसाद ताशा और सुरेंद्र नागर को भी नई टीम में शामिल नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर नड्डा की टीम में जिम्मेदारी संभाल रहे सरोज पांडेय, डीके अरुणा, एम. चुबा राव और अब्दुल्ला कुट्टी भी नई टीम में नजर नहीं आए।
10 महिलाओं को मिली जगह, संगठन में सामाजिक संतुलन पर जोर
नितिन नबीन की नई टीम में करीब 10 महिलाओं को शामिल किया गया है। उपाध्यक्ष, महासचिव और राष्ट्रीय सचिव समेत अलग-अलग स्तरों पर महिला नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
बीजेपी की नई टीम को देखें तो पार्टी ने केवल पुराने चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय कई नए और अपेक्षाकृत युवा नेताओं को भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी हैं। साथ ही अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखकर संगठन में निरंतरता का संदेश दिया गया है।
सात महीने के इंतजार के बाद संगठन का नया चेहरा
राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब पार्टी संगठन को अगले राजनीतिक चरण के लिए तैयार करने की होगी। करीब सात महीने बाद घोषित हुई यह टीम ऐसे समय में सामने आई है जब बीजेपी के लिए राज्यों में संगठन को मजबूत करना, चुनावी तैयारियों को गति देना और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
नई टीम में एक तरफ बीएल संतोष और अनिल बलूनी जैसे अनुभवी नेताओं को उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर बरकरार रखा गया है, तो दूसरी तरफ वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल और राम माधव जैसे बड़े नेताओं को नई भूमिकाएं दी गई हैं।
वहीं अमित मालवीय जैसे लंबे समय से संगठन से जुड़े चेहरे का बाहर होना बताता है कि पार्टी ने डिजिटल और सोशल मीडिया विभाग में भी नए नेतृत्व को मौका देने का फैसला किया है।
कुल मिलाकर नितिन नबीन की नई टीम में निरंतरता और बदलाव का संतुलन दिखाई देता है। पुराने और अनुभवी चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखने के साथ-साथ नए नेताओं को आगे लाने की कोशिश की गई है। अब इस नई टीम की असली परीक्षा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, विभिन्न राज्यों में पार्टी के विस्तार और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में होगी।














