“छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती में देरी बने प्रमुख मुद्दे”
प्रयागराज: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान युवाओं से सीधे संवाद करते हुए शिक्षा, रोजगार, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और देश के भविष्य जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने उन्हें एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है, जहां उनकी प्रतिभा और ऊर्जा का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नफरत और हिंसा के रास्ते पर न चलें, बल्कि प्रेम, संवाद और लोकतांत्रिक संघर्ष के जरिए बदलाव की लड़ाई लड़ें। राहुल गांधी के संबोधन में रोजगार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा की शक्ति और युवाओं की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए।
“1000 में से सिर्फ 12 युवाओं को मिलती है स्थायी नौकरी”
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने रोजगार की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि देश में 1000 युवाओं में से केवल 12 युवाओं को ही स्थायी नौकरी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि देश के सामने रोजगार का संकट कितना गंभीर है।
राहुल गांधी ने कहा कि लाखों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन या तो भर्तियां समय पर नहीं निकलतीं, या फिर परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का युवा केवल नौकरी नहीं मांग रहा, बल्कि अवसर मांग रहा है। यदि युवाओं को उचित अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया मिले तो वे देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
AI और डेटा पर राहुल गांधी का बड़ा बयान
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया AI की बात कर रही है, लेकिन AI की असली ताकत डेटा में छिपी है।
उन्होंने कहा, “डेटा के बिना AI का कोई मतलब नहीं है। डेटा से AI बनाया जा सकता है, लेकिन AI से डेटा नहीं बनाया जा सकता। डेटा आपका है, आपकी मेहनत का है, लेकिन उसका लाभ किसी और को मिल रहा है।”
राहुल गांधी ने दावा किया कि बड़ी-बड़ी कंपनियां लोगों के डेटा का उपयोग करके आर्थिक लाभ अर्जित कर रही हैं, जबकि आम नागरिक और युवा उस व्यवस्था में केवल उपभोक्ता बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था डेटा और युवाओं की क्षमता पर आधारित होगी, इसलिए युवाओं को इस शक्ति को समझने की जरूरत है।
“डेटा आपका, दर्द आपका और दौलत इनकी”
राहुल गांधी ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में कहा कि देश के युवाओं का डेटा सबसे मूल्यवान संसाधन बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं से जुड़ी सूचनाओं और डिजिटल गतिविधियों का लाभ बड़ी कंपनियों को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि युवाओं का डेटा, उनकी मेहनत और उनकी भागीदारी से डिजिटल प्लेटफॉर्म आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा संस्थाओं और कंपनियों तक सीमित रह जाता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में डेटा तेल और सोने से भी अधिक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है। जिस देश के पास अधिक डेटा और उसे उपयोग करने की क्षमता होगी, वही भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व करेगा।
‘रील संस्कृति’ पर राहुल गांधी का तंज
युवाओं के बीच सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर भी राहुल गांधी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवाओं को जितनी चाहें रील देखने और बनाने की आजादी है, लेकिन यह समझना होगा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग एक तरह का नशा बन सकता है।
उन्होंने कहा, “आपको कहा जाता है कि जितनी रील देखनी है, देखो और जितनी बनानी है, बनाओ। लेकिन यह 21वीं सदी का नशा है।”
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता को केवल डिजिटल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें शिक्षा, शोध, नवाचार, उद्यमिता और समाज निर्माण की दिशा में अपनी शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उपयोगी माध्यम है, लेकिन जब यह व्यक्ति की सोच और समय पर नियंत्रण करने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
“भारत की ताकत उसके 40 करोड़ युवा”
राहुल गांधी ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 40 करोड़ ऊर्जावान युवा हैं और यही भारत की वास्तविक पूंजी हैं।
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर चीन, अमेरिका और रूस की ताकत की चर्चा करते हैं, लेकिन 21वीं सदी में भारत के युवाओं की क्षमता उन सभी देशों के लिए चुनौती बन सकती है।
राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति दो प्रमुख आधारों पर निर्भर करती है—उसके युवाओं की क्षमता और उसके पास उपलब्ध डेटा। भारत के पास दोनों मौजूद हैं, इसलिए यदि सही नीतियां बनाई जाएं तो देश दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
युवाओं को ‘चक्रव्यूह’ में फंसाने का आरोप
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि देश का युवा एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा हुआ है, जहां उसके सामने शिक्षा, रोजगार और अवसरों से जुड़ी कई बाधाएं खड़ी कर दी गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें ऐसी परिस्थितियों में उलझाया जा रहा है, जहां उनकी ऊर्जा और क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और यदि उनकी आवाज को दबाया गया या उनकी समस्याओं को अनदेखा किया गया तो इसका असर देश के विकास पर भी पड़ेगा।
“नफरत नहीं, मोहब्बत से बदलेगा देश”
राहुल गांधी के भाषण का सबसे भावनात्मक हिस्सा वह रहा, जब उन्होंने युवाओं से प्रेम और सद्भाव की राजनीति को अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सत्य, अहिंसा और भाईचारे की संस्कृति है। नफरत और हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “एक भी छात्र के दिल में नफरत नहीं होनी चाहिए। हमें नफरत नहीं करनी है, सिस्टम बदलना है। यह लड़ाई प्यार और मोहब्बत की है।”
उन्होंने कहा कि युवाओं ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी आवाज बुलंद की है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है। यही ऊर्जा भविष्य में देश को नई दिशा दे सकती है।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर कांग्रेस का फोकस
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया गया, जब कांग्रेस लगातार बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती में देरी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर सवाल उठा रही है।
कार्यक्रम में मौजूद छात्रों ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी अपनी चिंताओं को साझा किया। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना जरूरी है ताकि नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
कांग्रेस का दावा—युवाओं की आवाज पूरे देश में गूंजेगी
कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट जारी कर कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और अधिकारों की लड़ाई का मंच है।
पार्टी ने कहा कि प्रयागराज से उठी यह आवाज पूरे देश में सुनाई देगी और कांग्रेस छात्रों तथा युवाओं के हितों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
राजनीतिक संदेश से आगे बढ़कर युवाओं के भविष्य पर केंद्रित रहा कार्यक्रम
प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक सभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, रोजगार, तकनीक, डेटा और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित संवाद के रूप में सामने आया। राहुल गांधी ने जहां बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया की चुनौतियों को उठाया, वहीं युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्हें सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनने का संदेश भी दिया।
रोजगार, शिक्षा और अवसरों की मांग कर रहे युवाओं के बीच राहुल गांधी का यह संदेश स्पष्ट था कि भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथ में है, और यदि उनकी क्षमता को सही दिशा मिले तो देश वैश्विक नेतृत्व की नई कहानी लिख सकता है।














