नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में बुधवार को राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रभावना से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया, जिसके तहत अब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करना एक आपराधिक अपराध माना जाएगा। सदन में इस विधेयक को लेकर तीखी बहस हुई और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विरोध दर्ज कराते हुए वॉकआउट किया, लेकिन सरकार ने इसे राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
विधेयक के पारित होने के साथ ही केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कानून देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करेगा।
विपक्ष के विरोध के बीच ध्वनि मत से पारित हुआ बिल
राज्यसभा में जैसे ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई, विपक्षी दलों ने इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। कांग्रेस के नेतृत्व में कई विपक्षी सांसदों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि सरकार ने विपक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि राष्ट्रसम्मान का है।
बहस के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से भी मंजूरी प्राप्त कर चुका था।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किया जोरदार बचाव
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से जुड़े इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम् कोई साधारण गीत नहीं है। यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। इसका अपमान केवल एक गीत का अपमान नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान है।”
राय ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कांग्रेस जैसे दल इस विधेयक का विरोध क्यों कर रहे हैं, जबकि यह राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए लाया गया है।
स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा रहा ‘वंदे मातरम्’
सरकार ने बहस के दौरान राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। नित्यानंद राय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी और यह गीत आजादी के आंदोलन में लाखों देशभक्तों की प्रेरणा बना।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान अनेक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने अंतिम क्षणों में ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष किया था। यह केवल एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का युद्धघोष था, जिसने देशवासियों में आजादी की अलख जगाई।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने कल्पना की थी कि एक दिन यह गीत हर भारतीय की जुबान पर मंत्र की तरह होगा और आज वह भावना पूरे देश में दिखाई देती है।
नेहरू के फैसले का भी किया उल्लेख
बहस के दौरान नित्यानंद राय ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1937 में तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने ‘वंदे मातरम्’ को केवल दो छंदों तक सीमित करने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत की मूल भावना और उसके महत्व को समझना आवश्यक है।
हालांकि विपक्षी सदस्यों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति भी जताई, लेकिन सरकार ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान किसी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर है।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के लिए जरूरी है राष्ट्रगीत का सम्मान
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर नई चेतना के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने में ‘वंदे मातरम्’ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए इसके अपमान को दंडनीय बनाना समय की मांग थी।
राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीति से ऊपर रखने की अपील
सदन में अपने संबोधन के दौरान नित्यानंद राय ने सभी दलों से राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत जैसे प्रतीक किसी एक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि पूरे देश की साझा धरोहर हैं।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को स्थापित करने का जो सपना महान संतों और राष्ट्रनिर्माताओं ने देखा था, उसे साकार करने की दिशा में यह कानून एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या होगा नया कानूनी प्रावधान?
विधेयक के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का जानबूझकर अपमान, अवमानना या उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय सम्मान के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी और ऐसे मामलों पर स्पष्ट कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
हालांकि विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि कानून के दुरुपयोग की संभावना को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए, ताकि किसी नागरिक के मौलिक अधिकार प्रभावित न हों।
राजनीतिक बहस के केंद्र में राष्ट्रगीत
राज्यसभा में विधेयक पारित होने के बाद ‘वंदे मातरम्’ एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे व्यापक बहस का विषय मान रहा है।
फिलहाल संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को लेकर देश में नया कानूनी प्रावधान लागू हो जाएगा।
राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े इस महत्वपूर्ण फैसले ने संसद के भीतर और बाहर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, लेकिन इतना तय है कि ‘वंदे मातरम्’ अब केवल राष्ट्रगीत ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और राजनीतिक विमर्श का एक प्रमुख विषय भी बन गया है।














