“लोकसभा में नहीं बोलने देने का आरोप, छात्रों पर बर्बरता का दावा; बीजेपी ने कहा—राहुल सदन और देश को गुमराह कर रहे हैं”
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच छात्र आंदोलन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बर्बर व्यवहार किया गया, उन पर पैलेट गन से गोलियां चलाई गईं, महिलाओं को पीटा गया और कील लगे डंडों का इस्तेमाल किया गया। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें संसद में इस मुद्दे पर बोलने नहीं दिया गया।
राहुल गांधी के आरोपों के कुछ ही घंटों बाद भारतीय जनता पार्टी ने मोर्चा संभालते हुए उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर संसद को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सदन में बोलने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन वे अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख पाए और अब प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
राहुल गांधी बोले—‘दिल्ली की सड़कों पर छात्रों के साथ बेरहमी हुई’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्रों की आवाज को दबाने के लिए सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सिर्फ लाठीचार्ज ही नहीं किया गया बल्कि पैलेट गन और शॉक बैटन का भी इस्तेमाल हुआ।
राहुल गांधी ने कहा, “मैं ऐसे एक छात्र से मिला हूं जिसकी आंख में छर्रे लगे हैं और संभव है कि वह कभी ठीक से देख न सके। छात्रों को कील लगे डंडों से पीटा गया। महिलाओं तक को नहीं छोड़ा गया। यह लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें डराने-धमकाने के लिए विभिन्न संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है ताकि भविष्य में वे विरोध प्रदर्शन करने का साहस न कर सकें।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है और दोषियों की जवाबदेही तय कराई जाएगी।
‘मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया’
राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा की कार्यवाही का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें सदन में अपनी बात रखने से रोका।
उन्होंने कहा, “आज आपने देखा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया। सरकार के अन्य सदस्यों को मौका मिला लेकिन मुझे नहीं। मुझे यह भी कहा गया कि यदि मैं माफी मांग लूं तो मुझे बोलने दिया जाएगा। मैं बीजेपी, आरएसएस या उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति से कभी माफी नहीं मांगूंगा।”
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का काम जनता के मुद्दों को उठाना है और छात्रों पर हुए कथित अत्याचार का मुद्दा देश के सामने लाना उनका अधिकार और कर्तव्य दोनों है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र और अधिकार-संपन्न समिति गठित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुए कथित हमले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन अधिकारियों या कर्मियों ने पैलेट गन चलाने या हिंसा करने के आदेश दिए, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन छात्रों की पिटाई हुई है उन्हें न्याय मिले। जिन्होंने छात्रों पर पैलेट गन चलाई, उन्हें सजा मिले। जवाबदेही तय होगी।”
गृह मंत्रालय पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) दोनों गृह मंत्रालय के अधीन आती हैं। ऐसे में इस कार्रवाई की जिम्मेदारी से केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय बच नहीं सकते।
उन्होंने संसद में भी गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले पर गृह मंत्री को सदन में उपस्थित होकर जवाब देना चाहिए था।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सरकार चुप्पी साधे हुए है, जबकि देश जवाब चाहता है।
बीजेपी का जवाब—‘राहुल गांधी तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं’
राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का यह कहना कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया गया, पूरी तरह गलत है। सदन के नियमों के तहत उन्हें अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की।
संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी लगातार ऐसे मुद्दों पर राजनीति करते हैं जहां तथ्यों की जगह भावनात्मक आरोपों को आगे रखा जाता है। संसद में उन्होंने जो बातें कहीं, वे वास्तविकता से परे हैं। उन्हें अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”
बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों की चिंता से अधिक राजनीतिक अंक बटोरने में रुचि रखते हैं।
‘क्रेडिट लेने की राजनीति कर रहे हैं राहुल’
संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी हर मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखते हैं और जहां भी अवसर दिखाई देता है, वहां सरकार पर आरोप लगाने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं। एसडीएम और जिला प्रशासन स्थिति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाते हैं। ऐसे मामलों को सीधे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना आरोप लगा रहे हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।
‘मोदी सरकार जवाबदेही और कानून में विश्वास करती है’
बीजेपी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार हमेशा कानून और व्यवस्था के दायरे में काम करती है।
संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल कर मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाई है और सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का मानना है कि शासन का आधार कानून और पारदर्शिता होना चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप।
संसद से सड़क तक बढ़ा राजनीतिक तापमान
राहुल गांधी के आरोपों और बीजेपी के जवाब के बाद यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक चर्चा का केंद्र बन गया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और कई जगह विरोध प्रदर्शन की घोषणाएं की गई हैं। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गरमाया रह सकता है।
अब सबकी निगाहें जांच और सरकार के अगले कदम पर
छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर उठे सवालों ने केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। राहुल गांधी जहां निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रही है।
संसद के मानसून सत्र के बीच यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, विपक्ष की भूमिका और सरकार की जवाबदेही पर एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में जांच, संसद की कार्यवाही और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।














