Tuesday, July 28, 2026
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CJP का तीखा ऐतराज: ‘छात्रों पर कार्रवाई नहीं रुकी तो फिर होगा देशव्यापी आंदोलन’

“CJP ने कहा— सरकार ने भरोसा तोड़ा, FIR वापस लेने के वादे से पीछे हटने की कोशिश”

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दिए गए अंतरिम आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। पार्टी ने अदालत के आदेश के चौथे बिंदु पर गंभीर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों से किया गया अपना वादा तोड़ दिया है। CJP का कहना है कि यदि पुलिस और राज्य सरकारों की ओर से छात्रों को परेशान करने का सिलसिला जारी रहा तो पार्टी के पास दोबारा देशव्यापी और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

पार्टी के प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश देशभर के युवाओं के लिए चिंता का विषय है। विशेष रूप से आदेश का वह हिस्सा, जिसमें दिल्ली-एनसीटी और अन्य राज्यों में दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है, प्रदर्शनकारियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।


’25 जुलाई के समझौते की भावना के खिलाफ है आदेश’

CJP का दावा है कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने पार्टी और छात्र संगठनों को स्पष्ट आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी और किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा।

पार्टी का कहना है कि इसी भरोसे और सरकार की सार्वजनिक गारंटी के आधार पर उसने अपना राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन समाप्त किया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार उस वादे से पीछे हटती नजर आ रही है।

CJP ने कहा कि यदि सरकार अपने आश्वासन पर कायम रहती तो अदालत के समक्ष भी यही स्थिति स्पष्ट की जाती, जिससे ऐसा आदेश पारित नहीं होता। पार्टी के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम युवाओं के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला है।


‘FIR की जांच का हथियार बना सकती हैं सरकारें’

पार्टी ने आशंका जताई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य राजनीतिक हथियार के रूप में कर सकते हैं। CJP का कहना है कि जांच जारी रहने की अनुमति मिलने के बाद प्रशासन व्यक्तिगत स्तर पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजकर या पूछताछ के नाम पर उन्हें लगातार परेशान कर सकता है।

पार्टी के नेताओं का कहना है कि शुरू से ही उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को आपराधिक मामलों में बदलकर युवाओं को डराने का प्रयास किया जा सकता है। अब अदालत के आदेश के बाद उस आशंका को और बल मिला है।


सरकार के वकीलों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

CJP ने केंद्र सरकार के वकीलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जब सरकार और CJP के बीच लगातार बातचीत चल रही थी तथा समझौता हो चुका था, तब अदालत को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी क्यों नहीं दी गई।

पार्टी ने आरोप लगाया कि यदि सुप्रीम कोर्ट को सरकार के आश्वासन की पूरी जानकारी होती तो संभव है कि अंतरिम आदेश का स्वरूप अलग होता। CJP का कहना है कि अदालत के समक्ष पूरी स्थिति न रखना सरकार की गंभीर चूक है।


‘अदालत ने FIR वापस लेने से नहीं रोका’

CJP ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि सरकारों को हर हाल में एफआईआर की जांच जारी रखनी ही होगी। पार्टी का तर्क है कि एफआईआर वापस लेने या जांच आगे न बढ़ाने का अधिकार कार्यपालिका के पास ही रहता है।

पार्टी ने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार और असम जैसे राज्यों ने कुछ मामलों में राहत देने का फैसला किया है। ऐसे में अन्य राज्य सरकारें भी चाहें तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस ले सकती हैं।

CJP का कहना है कि यदि सरकार अदालत के आदेश का हवाला देकर अपने वादे से पीछे हटती है तो यह आदेश की गलत व्याख्या होगी और जनता के साथ विश्वासघात माना जाएगा।


सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग

पार्टी ने मांग की है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 25 जुलाई को हुए समझौते और दिए गए सार्वजनिक आश्वासन का पूरा विवरण रखे। इससे अदालत को भी वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिल सकेगी और भविष्य में किसी भी आदेश के दौरान इस पहलू को ध्यान में रखा जा सकेगा।

CJP ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार द्वारा दिए गए सार्वजनिक आश्वासन केवल राजनीतिक बयान नहीं होते बल्कि जनता के विश्वास का आधार होते हैं। यदि सरकार अपने ही वादों से मुकरती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।


‘संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए’

पार्टी ने अपने बयान में यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। CJP का आरोप है कि यदि अदालत के आदेश का उपयोग केवल प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी रखने के लिए किया जाता है तो इससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होंगे।

पार्टी ने कहा कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार और न्याय व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है। शांतिपूर्ण विरोध को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।


समय सीमा खत्म, सरकार से अंतिम अपील

CJP ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की समय-सीमा अब समाप्त हो रही है। पार्टी ने अंतिम बार सरकार से अपील की है कि वह सभी संबंधित एफआईआर वापस ले, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी दे और 25 जुलाई को किए गए समझौते का पूरी ईमानदारी से पालन करे।

पार्टी का कहना है कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि उसने छात्रों और युवाओं से किया गया वादा तोड़ दिया है।


दोबारा आंदोलन की चेतावनी

CJP के प्रतिनिधि अभिजीत दीपके ने कहा कि पार्टी टकराव नहीं चाहती, लेकिन यदि छात्रों को पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा तो वह चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी जल्द ही बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन शुरू कर सकती है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों को निशाना बनाना बंद करे और न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़े। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि युवाओं के अधिकारों की रक्षा करना है।


अब सबकी नजर सरकार और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद पैदा हुए इस नए विवाद ने छात्र आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दे रही है, वहीं CJP इसे युवाओं से किए गए वादे से पीछे हटने की कोशिश बता रही है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष क्या रुख अपनाती है और क्या वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है। वहीं CJP ने भी संकेत दे दिया है कि यदि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है तो देश एक बार फिर बड़े छात्र आंदोलन का गवाह बन सकता है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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