“NEET-UG पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन; सरकार ने सुरक्षा पर जताई गंभीर चिंता, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी समेत कई नेता हिरासत में”
- नई दिल्ली: देश की राजनीति मंगलवार को उस समय गरमा गई जब NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कई सांसदों और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास की ओर बढ़े। हालांकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को बीच रास्ते में रोक दिया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद से लेकर सड़क तक सियासी बहस छेड़ दी है। जहां कांग्रेस इसे छात्रों की आवाज़ उठाने का लोकतांत्रिक अधिकार बता रही है, वहीं केंद्र सरकार ने इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए इसे “बेहद गलत और खतरनाक परंपरा” करार दिया है।
NEET-UG विवाद पर कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन
कांग्रेस का कहना है कि NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। पार्टी लंबे समय से इस मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। इसके अलावा हाल ही में NEET अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को भी कांग्रेस ने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।
इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च का आह्वान किया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और विपक्षी नेता शामिल हुए।
PM आवास की ओर बढ़े राहुल-प्रियंका, पुलिस ने रोका
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई वरिष्ठ नेता राजाजी मार्ग से प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया था। जैसे ही प्रदर्शनकारी निर्धारित सुरक्षा घेरे के करीब पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें वहां से हटाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, हालांकि किसी बड़े हिंसक टकराव की सूचना नहीं मिली।
सरकार का तीखा हमला—‘लोकतंत्र में नहीं होती ऐसी राजनीति’
प्रदर्शन के बाद सरकारी सूत्रों ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करना केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने जैसा कदम है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि किसी भी परिपक्व लोकतंत्र में राजनीतिक दल इस प्रकार शीर्ष संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के आवास को प्रदर्शन का केंद्र नहीं बनाते। ऐसा करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती पैदा करता है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की परंपरा शुरू होती है तो भविष्य में किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के आवास की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
‘खतरनाक मिसाल’ बताकर जताई सुरक्षा चिंता
सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री का आवास देश की सबसे संवेदनशील सुरक्षा श्रेणी में आता है। ऐसे में वहां विरोध प्रदर्शन करना केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मामला है।
सरकार का मानना है कि यदि राजनीतिक दलों द्वारा शीर्ष नेताओं के निजी या सरकारी आवासों को प्रदर्शन का स्थल बनाया जाने लगे तो इससे भविष्य में गंभीर सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया के कई देशों में नेताओं के आवासों को निशाना बनाकर किए गए प्रदर्शनों ने अप्रिय परिस्थितियां पैदा की हैं, इसलिए भारत में ऐसी परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस का पलटवार—‘हम छात्रों की आवाज़ उठा रहे हैं’
कांग्रेस ने सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण था।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर सरकार लगातार जवाब देने से बच रही है। ऐसे में विपक्ष का कर्तव्य है कि वह छात्रों के पक्ष में मजबूती से आवाज़ उठाए।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की हर आवाज़ को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।
प्रियंका गांधी का सरकार पर तीखा हमला
हिरासत में लिए जाने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज़ से घबराई हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं और विपक्ष उनका समर्थन कर रहा है तो इसे दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। उनका कहना था कि डर सरकार को है, विपक्ष को नहीं।
प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
विपक्षी दल भी आए कांग्रेस के साथ
इस विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विपक्ष के कई नेता कांग्रेस के साथ दिखाई दिए। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि NEET-UG का मुद्दा केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष इसे राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विफल रही है और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय नहीं कर रही।
NEET-UG बना राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रही है। कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन, पारदर्शिता और जांच को लेकर उठ रहे सवाल अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन चुके हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को युवाओं और छात्रों से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संसद से सड़क तक टकराव की राजनीति
संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष लगातार NEET-UG मुद्दे को उठा रहा है। सदन के भीतर हंगामे के साथ-साथ अब सड़क पर भी आंदोलन तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित न रहकर व्यापक राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है।
क्या आगे बढ़ेगा सियासी टकराव?
प्रधानमंत्री आवास की ओर कांग्रेस का मार्च और उस पर सरकार की तीखी प्रतिक्रिया ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे छात्रों के भविष्य की लड़ाई और लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार बता रही है, तो दूसरी ओर सरकार इसे सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ कदम मान रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि NEET-UG विवाद, संसद में विपक्ष के तेवर, और सरकार की रणनीति आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है। इतना तय है कि शिक्षा, सुरक्षा और राजनीति—तीनों के संगम पर खड़ा यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस का प्रमुख विषय बना रहेगा।














