गाजीपुर। भदौरा ब्लॉक में रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सवाल खड़े कर गया। सरकार की मंशा ग्रामीणों को एक ही स्थान पर जांच, उपचार और दवाएं उपलब्ध कराने की है, लेकिन गहमर, बारा, देवल और दिलदारनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को जांच सुविधा नहीं मिल सकी। अधिकांश स्थानों पर बिना किसी जांच के दवाएं देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई।
बारा पीएचसी पर होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. सत्यदेव अजीत सिंह ने 21 मरीजों का उपचार कर दवाएं वितरित कीं। उनका कहना था कि बारिश के कारण मरीज कम पहुंचे। वहीं गहमर में डॉ. अंकित और दिलदारनगर में डॉ. शिव कुमार मधुर ने मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराईं, लेकिन जांच की व्यवस्था यहां भी नहीं थी।
सबसे खराब स्थिति देवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की रही, जहां मेले के दौरान कोई चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। फार्मासिस्ट ने ही मरीजों को दवाएं वितरित कीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति और जांच सुविधा के अभाव में मेले का उद्देश्य अधूरा रह गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना जांच के गंभीर बीमारियों की पहचान संभव नहीं है और स्वास्थ्य मेले की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले की लगातार निगरानी की जा रही है। ड्यूटी से अनुपस्थित या समय से पहले जाने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों की जांच कराई जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।














