Friday, July 10, 2026
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बारिश आई… ‘स्मार्ट सिटी’ की स्मार्टनेस बहा ले गई! गड्ढों, जनसुनवाई में फूटा लोगों का गुस्सा; सीईओ के सामने विकास के दावों की खुली पोल

नोएडा: स्मार्ट सिटी बनने की राह पर अग्रसर नोएडा में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। मानसून की पहली तेज बारिश ने शहर की सड़कों, जल निकासी व्यवस्था और सीवर सिस्टम की खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जगह-जगह टूटी सड़कें, गहरे गड्ढे, जलभराव और जाम की समस्या से परेशान नागरिकों का गुस्सा बृहस्पतिवार को नोएडा प्राधिकरण की जनसुनवाई में खुलकर सामने आया।

सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान विभिन्न सेक्टरों से पहुंचे नागरिकों ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्ण करुणेश के समक्ष सड़क, जल निकासी, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की लंबी सूची रखी। लोगों ने कहा कि कई इलाकों में वर्षों से सड़कें जर्जर हैं, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता रहा है। बारिश के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि आम लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।


एनएसईजेड से लेकर सेक्टर-100 तक बदहाल सड़कें बनीं मुसीबत

जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें सड़कों की खराब स्थिति को लेकर सामने आईं। नागरिकों ने बताया कि एनएसईजेड, सेक्टर-100, सेक्टर-34, सेक्टर-41, सेक्टर-45 सहित कई प्रमुख इलाकों की सड़कें लंबे समय से टूट-फूट का शिकार हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई। कहीं केवल गड्ढों में मिट्टी भर दी गई तो कहीं अस्थायी पैचवर्क कर औपचारिकता पूरी कर दी गई। पहली बारिश होते ही सड़कें फिर से उखड़ गईं और गड्ढे पहले से अधिक गहरे हो गए।

नागरिकों ने कहा कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में इन सड़कों पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक परेशान हैं, जबकि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी रोजाना जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।


हल्की बारिश में ही डूब जाती हैं सड़कें, जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

जनसुनवाई के दौरान जल निकासी व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दा रही। लोगों ने बताया कि कई सेक्टरों में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहा है। हल्की बारिश होते ही मुख्य सड़कें और आंतरिक मार्ग पानी से भर जाते हैं।

निवासियों ने कहा कि कई स्थानों पर घंटों तक पानी जमा रहता है, जिससे सड़कें दिखाई तक नहीं देतीं। पानी में गड्ढे छिप जाने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई बार वाहन बीच सड़क में बंद हो जाते हैं और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।

व्यापारियों ने भी शिकायत की कि दुकानों के सामने जलभराव होने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है। कई दुकानों में बारिश का पानी घुस जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।


सीवर और नालों की सफाई नहीं होने से बढ़ रही परेशानी

जनसुनवाई में कई नागरिकों ने सीवर व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। उनका कहना था कि समय पर नालों और सीवर लाइनों की सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी तेजी से नहीं निकल पाता। नतीजतन सड़कें लंबे समय तक जलमग्न रहती हैं।

लोगों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर नाले कूड़े और गाद से भरे हुए हैं। सफाई अभियान केवल कागजों तक सीमित नजर आता है। यदि मानसून शुरू होने से पहले नियमित रूप से नालों की सफाई कराई जाती, तो जलभराव की समस्या काफी हद तक कम हो सकती थी।

नागरिकों ने मांग की कि ड्रेनेज नेटवर्क का तकनीकी सर्वे कराकर जहां जरूरत हो वहां नई जल निकासी लाइनें बनाई जाएं और पुराने नालों का चौड़ीकरण किया जाए।


जनसुनवाई में नागरिकों ने रखीं कई अन्य समस्याएं भी

सड़क और जल निकासी के अलावा लोगों ने स्ट्रीट लाइट, पार्कों के रखरखाव, सफाई व्यवस्था, कूड़ा उठाने, सीवर ओवरफ्लो और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें भी अधिकारियों के सामने रखीं।

कुछ सेक्टरों के निवासियों ने कहा कि रात के समय कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं। वहीं पार्कों में नियमित रखरखाव न होने और सफाई व्यवस्था कमजोर होने की शिकायतें भी सामने आईं।

कई आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों की नियमित फील्ड विजिट सुनिश्चित की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन कर समय रहते कार्रवाई की जा सके।


सीईओ कृष्ण करुणेश ने दिए सख्त निर्देश

जनसुनवाई के दौरान सीईओ कृष्ण करुणेश ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क मरम्मत, जल निकासी, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों का निस्तारण करें और प्रत्येक मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

सीईओ ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सड़कें अत्यधिक क्षतिग्रस्त हैं, वहां तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए। जिन स्थानों पर जलभराव की समस्या लगातार बनी रहती है, वहां तकनीकी टीम भेजकर स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार की जाए।


बारिश से पहले तैयारियों पर भी उठे सवाल

जनसुनवाई के दौरान कई नागरिकों ने यह सवाल भी उठाया कि हर वर्ष मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत और नालों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है।

लोगों का कहना था कि यदि समय रहते सड़कों की गुणवत्ता की जांच और ड्रेनेज सिस्टम का रखरखाव किया जाए, तो हर साल एक जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। नागरिकों ने मांग की कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय टिकाऊ निर्माण कार्य कराए जाएं ताकि बार-बार सार्वजनिक धन खर्च करने की आवश्यकता न पड़े।


जनसुनवाई से जगी उम्मीद, अब कार्रवाई का इंतजार

नोएडा प्राधिकरण की नियमित जनसुनवाई शहरवासियों के लिए अपनी समस्याएं सीधे शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोग सड़क, सीवर, जल निकासी, सफाई, पार्क, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं।

हालांकि नागरिकों का कहना है कि शिकायत दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक संतोष तभी मिलेगा, जब तय समय के भीतर धरातल पर सुधार दिखाई देगा। उनका मानना है कि यदि अधिकारियों के निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

फिलहाल शहरवासियों की निगाहें प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि टूटी सड़कों, जलभराव और सीवर जैसी मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में मजबूत आधारभूत ढांचा ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन की सबसे बड़ी जरूरत है।

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VIKAS TRIPATHI
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