“दिल्ली-NCR जलमग्न, महाराष्ट्र में बाढ़ का तांडव, हिमाचल-उत्तराखंड में भूस्खलन, कई राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त; राहत एजेंसियां अलर्ट पर”
नई दिल्ली:मानसून की तेज बारिश ने पूरे देश में तबाही की ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने विकास, बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक बारिश आफत बनकर बरस रही है। कहीं सड़कें नदियों में बदल गई हैं तो कहीं घरों में पानी घुस गया है। पहाड़ों पर भूस्खलन से सड़कें बंद हो रही हैं और मैदानी इलाकों में जलभराव ने लोगों की जिंदगी थाम दी है।
कुछ ही घंटों की बारिश ने महानगरों की रफ्तार रोक दी। वाहन पानी में डूब गए, बाजार बंद हो गए, अस्पतालों और मंदिरों तक में पानी भर गया। कई जगहों पर जान-माल का नुकसान हुआ, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
दिल्ली बनी ‘जलनगरी’, सड़कें बनीं दरिया
देश की राजधानी दिल्ली में मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम और सरकारी तैयारियों की पोल खोल दी। कई प्रमुख सड़कें घंटों तक पानी में डूबी रहीं। संगम विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी, लक्ष्मी नगर, द्वारका और कई अन्य इलाकों में जलभराव से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया।
जहांगीरपुरी में बसों के भीतर तक पानी भर गया, जबकि कई कॉलोनियों में घरों और दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। जगह-जगह वाहन बंद पड़ गए और लंबा जाम लग गया।
सबसे दर्दनाक हादसा रोहिणी सेक्टर-16 में हुआ, जहां भारी बारिश के बीच चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया। राहत एवं बचाव दल ने घंटों तक अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए।

दिल्ली-NCR में जलभराव ने बढ़ाई मुसीबत
गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में सड़क धंसने से एक कार अचानक गहरे गड्ढे में समा गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने इलाके की घेराबंदी कर दी।
इंदिरापुरम और एनएच-24 पर कई फीट पानी जमा हो गया। पैदल चलने वाले लोगों को कमर तक पानी में होकर गुजरना पड़ा, जबकि सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में भी जलभराव के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही।
उत्तर प्रदेश के कई शहर भी पानी-पानी
बारिश का असर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी दिखाई दिया। मेरठ में एक अस्पताल के भीतर पानी घुस गया, जहां कर्मचारी घंटों तक पानी निकालते रहे।
मथुरा-वृंदावन में प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के मुख्य मार्ग पर पानी भर जाने से श्रद्धालुओं को गंदे पानी से होकर दर्शन के लिए जाना पड़ा। आसपास की दुकानों में भी पानी घुस गया।
सहारनपुर में उफनाती नदी में बहते दो बाइक सवारों को स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बचाया।
अलीगढ़ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सड़कों पर घंटों तक जलभराव बना रहा।
मुंबई और महाराष्ट्र में बाढ़ जैसे हालात
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। हर साल हजारों करोड़ रुपये ड्रेनेज व्यवस्था पर खर्च होने के बावजूद शहर की सड़कें पानी में डूब गईं।
इस बीच रायगढ़ जिले की पनवेल तहसील स्थित एचपीसीएल के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में पातालगंगा नदी का पानी घुसने से करीब तीन हजार गैस सिलेंडर बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
नदी में बहते सिलेंडरों को देखकर बड़ी संख्या में लोग उन्हें निकालने पहुंच गए। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि किसी भी सिलेंडर को हाथ न लगाएं, क्योंकि उनमें गैस भरी हो सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है।
सूरत में दो दिन की बारिश ने मचाई तबाही
गुजरात के सूरत में लगातार दो दिनों में करीब 400 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे पूरा शहर पानी में डूब गया।
मुख्य सड़कें, बाजार, पेट्रोल पंप, बस स्टैंड और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए। करीब 100 टेक्सटाइल मार्केट में पानी भरने से करोड़ों रुपये का कपड़ा और ड्रेस मटेरियल खराब हो गया।
एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार नावों के जरिए राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। अब तक 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
पहाड़ों पर बरपा प्रकृति का कहर
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं।
हिमाचल के पांगी क्षेत्र में अचानक पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था।
उत्तराखंड के टिहरी में भारी भूस्खलन के कारण मलबे की चपेट में आकर एक पुरानी खाली इमारत ढह गई। प्रशासन ने पहले ही आसपास की दुकानों को खाली करा दिया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
वैष्णो देवी मार्ग पर भी भूस्खलन के बाद बैटरी चालित वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। हालांकि पैदल यात्रा जारी है।

इमारतों और सड़कों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
बारिश ने केवल जलभराव ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुरुग्राम में एक हाईराइज इमारत की पूरी बालकनी भरभराकर गिर गई। हालांकि उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
गाजियाबाद में सड़क धंसने और कार के जमीन में समा जाने की घटना ने भी शहरी विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित शहरीकरण, जल निकासी व्यवस्था की कमी और निर्माण कार्यों में लापरवाही ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य भारत के कई हिस्सों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न जाने तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
राहत कार्य जारी, लेकिन चुनौती बड़ी
देशभर में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में भी बाधा बन रही है।
बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हर वर्ष मानसून के साथ देश के कई शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों की कमजोर तैयारियां उजागर हो जाती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल आपदा के समय राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल निकासी, शहरी नियोजन, पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण और आपदा प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
बारिश फिलहाल थमने के संकेत नहीं दे रही है और ऐसे में करोड़ों लोगों की नजरें अब मौसम की अगली चेतावनी और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हैं।















