प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की दीर्घकालिक सामरिक रणनीति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजधानी विक्टोरिया में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी द्वारा उनका स्वागत इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंध अब केवल मित्रता तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
इस वर्ष भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे समय में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
हिंद महासागर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
आज वैश्विक राजनीति का केंद्र तेजी से हिंद महासागर की ओर स्थानांतरित हो रहा है। दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार और वैश्विक कंटेनर व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, नौवहन मार्गों की सुरक्षा और सामरिक नियंत्रण के लिहाज से यह क्षेत्र विश्व की महाशक्तियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।
यही कारण है कि भारत, अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और चीन जैसे देश इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रहे हैं।
ऐसे में सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय राष्ट्र का महत्व उसकी भौगोलिक स्थिति के कारण कई गुना बढ़ जाता है।
चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत की रणनीतिक पहल
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने प्रभाव का तेजी से विस्तार किया है। बंदरगाहों के निर्माण, समुद्री अवसंरचना, निवेश और नौसैनिक गतिविधियों के माध्यम से वह अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
भारत की “सागर” (Security and Growth for All in the Region) नीति इसी चुनौती का उत्तर मानी जाती है। इस नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और सहयोग आधारित बनाना है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ विश्वास, साझेदारी और विकास आधारित संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
Debark Sesel.
Profondeman apresye lakey salere ofer par Dokter Patrick Herminie lo erport.
Sesel i en partener maritim enportan e en zanmi pros dan Losean Endyen.
Mon pe espekte sa vizit enn ki prodiktiv, ki ava ranforsi bann lyen ki dat depi lontan e ranforsi korperasyon pour… pic.twitter.com/8ipE3vwpsm— Narendra Modi (@narendramodi) June 27, 2026
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ब्लू इकोनॉमी बनेगी सहयोग का नया आधार
सेशेल्स की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से समुद्री संसाधनों, मत्स्य पालन, पर्यटन और समुद्री जैव विविधता पर आधारित है।
भारत लंबे समय से इस देश को निम्न क्षेत्रों में सहयोग देता रहा है—
समुद्री सुरक्षा
तटरक्षक बल का प्रशिक्षण
रक्षा उपकरण
डिजिटल कनेक्टिविटी
स्वास्थ्य एवं शिक्षा
जलवायु परिवर्तन से निपटने की तकनीक
ब्लू इकोनॉमी परियोजनाएं
आने वाले वर्षों में यह सहयोग दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति को मिलेगी मजबूती
भारत के लिए हिंद महासागर केवल व्यापार का मार्ग नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, हथियारों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा समुद्री आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत कर रहा है।
सेशेल्स इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार है क्योंकि उसकी समुद्री सीमा अत्यंत विस्तृत है।
लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी का सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करना कई दृष्टियों से ऐतिहासिक है। वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे।
यह केवल संसदीय संबोधन नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधित्व की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
256 वर्षों से जुड़े हैं दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध
भारत और सेशेल्स के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं।
1770 में जब सेशेल्स में पहली स्थायी बस्ती बसाई गई थी, तब वहां पहुंचने वाले लोगों में भारतीय भी शामिल थे। बाद के वर्षों में बिहार, गुजरात और तमिलनाडु से बड़ी संख्या में भारतीय वहां जाकर बसे।
आज लगभग 1.20 लाख की आबादी वाले इस देश में प्रत्येक आठवां नागरिक भारतीय मूल का माना जाता है।
यही कारण है कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक भी हैं।
Visited the Giant Tortoise Enclosure at the Seychelles National Botanical Garden with President Dr. Patrick Herminie.
The Aldabra Giant Tortoise, which is native to Seychelles, is among the largest and longest-living species on Earth, with some of them witnessing over two… pic.twitter.com/995s3bfawf
— Narendra Modi (@narendramodi) June 27, 2026
पूर्वजों से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता
सेशेल्स के राष्ट्रपति के पूर्वजों का संबंध बिहार से रहा है। यह ऐतिहासिक जुड़ाव दोनों देशों के संबंधों को एक विशेष भावनात्मक आयाम प्रदान करता है।
ऐसे सांस्कृतिक संबंध द्विपक्षीय कूटनीति को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखते बल्कि लोगों के बीच विश्वास और निकटता को भी मजबूत करते हैं।
भारत की विदेश नीति का व्यापक संदेश
यह यात्रा भारत की विदेश नीति के कई प्रमुख स्तंभों को एक साथ प्रदर्शित करती है—
पड़ोसी देशों के साथ विश्वास आधारित साझेदारी
हिंद महासागर में सुरक्षित और मुक्त समुद्री क्षेत्र का समर्थन
ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा
जलवायु परिवर्तन से प्रभावित द्वीपीय देशों के साथ सहयोग
लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत साझेदारी को मजबूत करना
वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को सशक्त बनाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल एक राजकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की व्यापक समुद्री और भू-राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण अध्याय है। ऐसे समय में जब हिंद महासागर वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है, भारत अपने विश्वसनीय साझेदारों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास कर रहा है।
यदि इस यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, ब्लू इकोनॉमी, डिजिटल साझेदारी, जलवायु परिवर्तन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में ठोस समझौते आगे बढ़ते हैं, तो यह न केवल भारत-सेशेल्स संबंधों को नई मजबूती देगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।














