नोएडा में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं के बीच गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए महज 24 घंटे के भीतर दो हाई-प्रोफाइल चोरी की वारदातों का खुलासा कर दिया है। इस कार्रवाई ने न केवल एक शातिर अंतरराज्यीय चोर गिरोह को बेनकाब किया है, बल्कि चोरी के माल को खपाने वाले नेटवर्क की भी परतें खोल दी हैं।
पुलिस ने गिरोह के सरगना शुभम उर्फ काकू, उसके जीजा राहुल शर्मा और चोरी के गहनों को खरीदने वाले सुनार सचिन वर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 3 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, चार लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, महत्वपूर्ण दस्तावेज, चोरी में प्रयुक्त कार, ताला तोड़ने का सरिया और एक अवैध चाकू बरामद किया गया है।
कैसे काम करता था गिरोह?
पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी शुभम उर्फ काकू दिन के समय बंद पड़े मकानों की रेकी करता था। वह ऐसे घरों को निशाना बनाता था जहां परिवार बाहर गया हो या लंबे समय तक घर बंद रहता हो। मौका मिलते ही वह लोहे के सरिये से ताला तोड़कर लाखों रुपये के गहने और नकदी चोरी कर लेता था।
चोरी के बाद माल को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी उसके जीजा राहुल शर्मा की होती थी। राहुल चोरी का सामान अपने परिचित सुनार सचिन वर्मा को बेचता था, जो गहनों को गलाकर उनकी पहचान मिटा देता था। पुलिस का कहना है कि यह केवल चोरी नहीं बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क था, जिसमें चोरी से लेकर माल खपाने तक की पूरी चेन सक्रिय थी।
CCTV और तकनीकी जांच बनी सफलता की कुंजी
9 जून को सेक्टर-126 क्षेत्र में एक घर से तीन लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के गहने, मोबाइल फोन और लैपटॉप चोरी होने की शिकायत दर्ज हुई थी। इससे पहले 8 मई को भी इसी क्षेत्र में एक अन्य घर से लैपटॉप, अमेजन किंडल और नकदी चोरी हुई थी।
घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी नोएडा के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे 50 से 60 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों के साथ मैनुअल इंटेलिजेंस का उपयोग किया। इसी आधार पर 10 जून को पुश्ता रोड स्थित गढ़ी शाहपुर गांव के सामने से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
अपराध का लंबा इतिहास
मुख्य आरोपी शुभम उर्फ काकू कोई सामान्य चोर नहीं बल्कि एक पेशेवर और अंतरराज्यीय अपराधी है। उसके खिलाफ मेरठ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चोरी, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह कई बार जेल भी जा चुका है, लेकिन नशे की लत और आपराधिक प्रवृत्ति के कारण लगातार अपराध करता रहा।
यह तथ्य कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है कि कई बार जेल जाने के बावजूद ऐसे अपराधी समाज में लौटकर फिर से संगठित अपराध में सक्रिय हो जाते हैं।
थाना सेक्टर-126:- चोरी की घटना का 24 घंटे के अंदर सफल अनावरण, 03 अभियुक्त गिरफ्तार।
कब्जे से चोरी के आभूषण, ₹03 लाख नकद, 04 मोबाइल फोन, 04 लैपटॉप, चोरी की घटना में प्रयुक्त कार, अवैध शस्त्र तथा अन्य सामान बरामद। pic.twitter.com/7klEiHTdh7
— POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR (@noidapolice) June 10, 2026
पुलिस के सामने बड़ा सवाल: चोरी रोकना या नेटवर्क खत्म करना?
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चोरी की घटनाओं के पीछे केवल चोर ही नहीं बल्कि चोरी का माल खरीदने वाले लोग भी उतने ही जिम्मेदार हैं। यदि सुनार और कबाड़ी जैसे खरीददार चोरी का सामान खरीदना बंद कर दें तो चोरी की घटनाओं में स्वतः कमी आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त पर सख्त निगरानी और नियमित सत्यापन अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त किए जा सकें।
पुलिस की अपील और नागरिकों के लिए सबक
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने बताया कि पुलिस ने दोनों घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए चोरी का शत-प्रतिशत माल बरामद कर लिया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि घर छोड़कर बाहर जाने से पहले पड़ोसियों को सूचित करें, सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रखें और कीमती सामान बैंक लॉकर में सुरक्षित रखें।
महत्वपूर्ण संदेश
यह मामला केवल चोरी की वारदात का खुलासा नहीं बल्कि एक संगठित अपराध तंत्र के उजागर होने का उदाहरण है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह घटना आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है कि सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही अपराधियों के लिए बड़ा अवसर बन सकती है। संगठित चोरी गिरोह अब तकनीकी निगरानी के बावजूद सक्रिय हैं, इसलिए व्यक्तिगत सतर्कता और सामुदायिक सहयोग ही अपराध रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।














