“क्या हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले लोग सुरक्षित हैं?”
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक प्रतिष्ठित आवासीय सोसाइटी में हुआ दर्दनाक हादसा इस सवाल को फिर से केंद्र में ले आया है। एक परिवार का सहारा, 40 वर्षीय विकास चावला, केवल इसलिए अपनी जान गंवा बैठे क्योंकि जिस इमारत में लोग सुरक्षा और सुविधाओं के भरोसे रहते हैं, उसकी संरचनात्मक खामियों और रखरखाव की अनदेखी समय रहते दूर नहीं की गई।
कैसे हुआ हादसा?
बिसरख थाना क्षेत्र स्थित अरिहंत अम्बर सोसाइटी में शनिवार शाम विकास चावला अपने दोपहिया वाहन से परिसर के भीतर जा रहे थे। तभी बहुमंजिला इमारत से प्लास्टर का भारी हिस्सा टूटकर सीधे उनके सिर पर गिर गया। अचानक हुए इस प्रहार से उनका संतुलन बिगड़ गया और वह वाहन सहित पास की दीवार से जा टकराए।
घटना इतनी गंभीर थी कि मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सिर में लगी गहरी चोटों के कारण चिकित्सक उनकी जान नहीं बचा सके।
एक मौत नहीं, व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हाईराइज आवासीय परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था, बिल्डिंग मेंटेनेंस और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या इमारत की नियमित स्ट्रक्चरल जांच की जा रही थी?
क्या प्लास्टर झड़ने की शिकायतें पहले से मौजूद थीं?
क्या निवासियों द्वारा दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया?
क्या बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी ने सुरक्षा मानकों का पालन किया?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर “हाँ” होता, तो संभवतः आज एक परिवार अपने सदस्य को न खोता।
पुलिस की कार्रवाई तेज, मेंटेनेंस प्रभारी गिरफ्तार
मृतक के भाई की शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर और रखरखाव एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान रखरखाव व्यवस्था के लिए जिम्मेदार मेंटेनेंस इंचार्ज दीपक कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी। यदि बिल्डर, तकनीकी टीम या अन्य अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी मिल रही थीं चेतावनियां?
सोसाइटी के अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के पदाधिकारियों और निवासियों का दावा है कि इमारत के कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ने, दीवारों में क्षति और रखरखाव संबंधी समस्याओं की शिकायतें पहले भी उठाई गई थीं।
निवासियों के अनुसार—
कई बार लिखित शिकायतें की गईं।
क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की मांग उठी।
सुरक्षा संबंधी चिंताओं से प्रबंधन को अवगत कराया गया।
यदि ये दावे जांच में सही साबित होते हैं, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन सकता है।
पूरे एनसीआर की हाईराइज सोसाइटियों के लिए चेतावनी
यह हादसा सिर्फ अरिहंत अम्बर सोसाइटी तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम की सैकड़ों हाईराइज सोसाइटियों में हजारों परिवार रहते हैं। इनमें से कई इमारतें 10 से 15 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं और नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
पुराने भवनों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए।
बाहरी प्लास्टर, फसाड और बालकनी क्षेत्रों की तकनीकी जांच होनी चाहिए।
सुरक्षा जोखिम वाले क्षेत्रों को तुरंत सील किया जाना चाहिए।
बिल्डरों और मेंटेनेंस एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए।
आखिर जिम्मेदार कौन?
एक व्यक्ति की मौत के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या यह हादसा रोका जा सकता था?
यदि भवन के जर्जर हिस्सों की समय पर मरम्मत की जाती, सुरक्षा निरीक्षण नियमित रूप से होता और निवासियों की शिकायतों पर कार्रवाई की जाती, तो शायद विकास चावला आज अपने परिवार के बीच होते।
न्याय की प्रतीक्षा
विकास चावला के परिजन दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस तकनीकी रिपोर्ट, रखरखाव रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
यह मामला केवल एक परिवार के दुख का नहीं, बल्कि लाखों फ्लैट खरीदारों और हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह जांच तय करेगी कि यह एक दुर्घटना थी या लापरवाही से हुई एक ऐसी मौत, जिसकी जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है।














