दिल्ली के मालवीय नगर स्थित “फ्लरिश स्टे” होटल में लगी भीषण आग ने राजधानी की पर्यटन और आवास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में 11 विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। इस घटना के बाद दिल्ली सरकार ने तत्काल प्रभाव से अपनी बहुचर्चित “बेड एंड ब्रेकफास्ट (BnB)” योजना को वापस लेने का निर्णय लिया है और इसके अंतर्गत पंजीकृत सभी प्रतिष्ठानों की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया है।
एक अच्छी सोच, लेकिन कमजोर निगरानी
साल 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार ने “बेड एंड ब्रेकफास्ट” योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य दिल्ली आने वाले पर्यटकों को होटलों के बजाय भारतीय परिवारों के साथ रहने का अवसर देना था, जिससे उन्हें घर जैसा वातावरण, भारतीय संस्कृति का अनुभव, बेहतर सुरक्षा और अपेक्षाकृत कम खर्च में आवास उपलब्ध हो सके।
योजना की मूल अवधारणा बेहद सकारात्मक थी। इसके माध्यम से स्थानीय नागरिकों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता था और पर्यटकों को एक पारिवारिक एवं सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होता था। लेकिन हालिया हादसे ने यह दिखा दिया कि अच्छी योजनाएं भी प्रभावी निगरानी के अभाव में खतरनाक साबित हो सकती हैं।
हादसे ने उजागर की गंभीर लापरवाही
पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा के अनुसार, “फ्लरिश स्टे” को वर्ष 2024 में BnB योजना के तहत सिल्वर श्रेणी में केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी। लेकिन प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वहां कथित रूप से लगभग 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे, जिनमें बेसमेंट भी शामिल था। इतना ही नहीं, प्रतिष्ठान के पास आवश्यक अग्नि सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी मौजूद नहीं था।
यह मामला केवल एक होटल की लापरवाही नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता का भी संकेत देता है। यदि लाइसेंस 6 कमरों का था तो चार गुना अधिक कमरे संचालित होने की जानकारी समय रहते संबंधित विभागों को क्यों नहीं मिली? यह प्रश्न अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
सरकार की सख्त चेतावनी
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो भी संचालक लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। छह से अधिक कमरे संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों का लाइसेंस तत्काल रद्द किया जा सकता है।
सरकार अब BnB योजना के अंतर्गत पंजीकृत सभी इकाइयों का पुनः सत्यापन करने जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी नियमों की अनदेखी तो नहीं हो रही।
432 संपत्तियां और 2200 से अधिक कमरे
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना शुरू होने से लेकर वर्ष 2023 तक दिल्ली में 432 संपत्तियों के 2200 से अधिक कमरे इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत किए जा चुके थे। यह दर्शाता है कि योजना का विस्तार काफी बड़ा था और हजारों पर्यटक प्रतिवर्ष इसका लाभ उठाते रहे हैं।
इसी कारण अब इस योजना की समीक्षा केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
BnB योजना की प्रमुख शर्तें
योजना के तहत किसी भी मकान मालिक को कई कठोर नियमों का पालन करना होता था—
मकान मालिक का उसी घर में निवास करना अनिवार्य।
अधिकतम 6 कमरे ही किराये पर दिए जा सकते हैं।
मकान के दो-तिहाई से अधिक कमरे किराये पर नहीं दिए जा सकते।
प्रत्येक कमरे में अलग शौचालय होना आवश्यक।
24 घंटे गर्म और ठंडे पानी की सुविधा।
इंटरनेट और टेलीफोन एक्सटेंशन की व्यवस्था।
फ्रिज, हैंगर, कुर्सी, टेबल जैसी बुनियादी सुविधाएं।
सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन।
कुल मिलाकर लगभग 36 अनिवार्य शर्तें।
इन नियमों का उद्देश्य पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना था, लेकिन सवाल यह है कि इन शर्तों के अनुपालन की निगरानी कितनी प्रभावी रही।
गोल्ड और सिल्वर श्रेणी की व्यवस्था
योजना के तहत संपत्तियों को “गोल्ड” और “सिल्वर” श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता था।
गोल्ड श्रेणी के लिए आवश्यक सुविधाएं:
पर्याप्त पार्किंग
सुरक्षा गार्ड
वॉशिंग मशीन एवं ड्रायर
रेफ्रिजरेटर
बेहतर कमरे और अतिरिक्त सुविधाएं
पंजीकरण शुल्क:
गोल्ड श्रेणी: ₹5,000
सिल्वर श्रेणी: ₹3,000
पंजीकरण प्रमाणपत्र की वैधता तीन वर्ष होती थी, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती थी।
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
मालवीय नगर अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं है; यह उन प्रशासनिक कमजोरियों की ओर भी संकेत करता है जिनके कारण नियमों का उल्लंघन लंबे समय तक चलता रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजना बंद करना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि:
अग्नि सुरक्षा मानकों का नियमित ऑडिट हो।
सभी पंजीकृत प्रतिष्ठानों का डिजिटल निरीक्षण रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग और पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय हो।
नियमों के उल्लंघन पर त्वरित और कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए।
दिल्ली की Bed & Breakfast योजना का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यटकों को सुरक्षित, सस्ता तथा पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना था। लेकिन मालवीय नगर की त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी योजना की सफलता केवल उसके उद्देश्य पर नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन और निगरानी की मजबूती पर निर्भर करती है।
21 लोगों की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं है; यह प्रशासन, नियामक संस्थाओं और संचालकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि सरकार इस हादसे से सबक लेकर ऐसी व्यवस्था विकसित करे, जिसमें पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।














