“सहारनपुर में प्रकृति का रौद्र रूप, मंदिर क्षेत्र में मची अफरा-तफरी”
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध मां शाकंभरी देवी धाम गुरुवार देर रात अचानक आई प्राकृतिक आपदा का गवाह बन गया। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के बीच पहाड़ों से आए भारी पानी ने मंदिर क्षेत्र के पास बहने वाली बरसाती नदी को कुछ ही मिनटों में उफान पर पहुंचा दिया। देखते ही देखते नदी का पानी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में घुस गया, जिससे पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
रात के अंधेरे में हजारों श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। कई परिवार अपने बच्चों, बुजुर्गों और सामान को बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी का बहाव इतना तेज था कि पार्किंग में खड़े वाहन, ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहन भी खिलौनों की तरह बह गए।
आज दिनांक 29.05.2026 को #DIG_SRR श्री अभिषेक सिंह द्वारा #SPRA_SRR श्री मयंक पाठक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ जनपद सहारनपुर के थाना मिर्जापुर क्षेत्र स्थित माँ शाकंभरी देवी मंदिर के निकट अचानक आए तेज जलप्रवाह से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया गया तथा… pic.twitter.com/FgDxGAzhPX
— DIG RANGE SAHARANPUR (@digsaharanpur) May 29, 2026
कुछ मिनटों में बदले हालात, किसी को संभलने का मौका नहीं मिला
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का पानी अचानक नदी और नालों में पहुंचा, जिससे जलस्तर तेजी से बढ़ गया। मंदिर परिसर के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु विश्राम कर रहे थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ जैसी स्थिति ने सब कुछ बदल दिया।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि हादसे में दो महिलाओं की जान चली गई। मृतकों में सावित्री पत्नी चंद्रभान समेत दो महिलाएं शामिल हैं, जो तेज बहाव की चपेट में आ गई थीं। उनके शव बाद में घटनास्थल से लगभग 300 मीटर दूर बरामद किए गए।
चेतावनी दी गई, लेकिन खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जारी चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मौसम खराब होने के बाद पुलिस और प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए चेतावनी दे रहे थे। लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार अनाउंसमेंट भी किए गए, लेकिन कई लोगों ने खतरे को नजरअंदाज कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को पुलिस ने जबरन सुरक्षित स्थानों की ओर भेजा, लेकिन कई लोग वहीं रुके रहे। बाद में यही लोग अचानक आए तेज बहाव में फंस गए।
दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान
प्राकृतिक आपदा का असर केवल श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। मंदिर क्षेत्र में प्रसाद, पूजा सामग्री और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानें चलाने वाले सैकड़ों छोटे व्यापारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।
तेज बहाव के साथ दुकानों में रखा सामान बह गया। कई अस्थायी दुकानें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। शुक्रवार सुबह जब हालात सामान्य होने लगे तो दुकानदार अपनी उजड़ी दुकानों और बिखरे सामान के बीच नुकसान का आकलन करते दिखाई दिए।
डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताई पूरी घटना की वजह
घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे सहारनपुर डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि देर रात हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण पीछे के पहाड़ी क्षेत्रों से अचानक पानी का अत्यधिक दबाव आया, जिसने नदी का स्वरूप बदल दिया।
उन्होंने बताया कि प्रशासन को पहले से मौसम संबंधी अलर्ट प्राप्त था और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कोशिश भी की गई थी। इसके बावजूद दो महिलाएं तेज बहाव में बह गईं और उनकी मौत हो गई।
डीआईजी के अनुसार कुछ ट्रैक्टर, निर्माण कार्य में लगी मशीनें और अन्य वाहन भी पानी में बह गए थे, जिन्हें निकालने का कार्य लगातार जारी है।
आज दिनांक 29.05.2026 को #DIG_SRR श्री अभिषेक सिंह द्वारा #SPRA_SRR श्री मयंक पाठक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ जनपद सहारनपुर के थाना मिर्जापुर क्षेत्र स्थित माँ शाकंभरी देवी मंदिर के निकट अचानक आए तेज जलप्रवाह से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण करने के उपरान्त दी गई #बाईट… pic.twitter.com/UZQEQ6GgRP
— DIG RANGE SAHARANPUR (@digsaharanpur) May 29, 2026
पूरी रात चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, SDRF और अन्य राहत-बचाव एजेंसियां सक्रिय हो गईं। पूरी रात रेस्क्यू अभियान चलाया गया और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
प्रशासन अब प्रभावित लोगों की सहायता, नुकसान के आकलन और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर काम कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या तीर्थस्थलों पर आपदा प्रबंधन पर्याप्त है?
यह घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि तीर्थस्थलों पर आपदा प्रबंधन व्यवस्था की भी परीक्षा है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु मां शाकंभरी देवी धाम पहुंचते हैं, लेकिन अचानक आने वाली बाढ़, पहाड़ी जलप्रवाह और मौसमीय आपदाओं से निपटने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि—
नदी और नालों के किनारे स्थायी चेतावनी प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए।
रियल टाइम जलस्तर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए।
तीर्थ क्षेत्र में आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किया जाए।
खराब मौसम के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित की जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस और बचाव दल तैनात किए जाएं।
आने वाले दिनों के लिए अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नालों, पहाड़ी क्षेत्रों और जलभराव वाले स्थानों के आसपास विशेष सावधानी बरतें तथा किसी भी चेतावनी को हल्के में न लें।
प्राकृतिक आपदा ने छोड़े कई सवाल
शाकंभरी में आई यह त्रासदी केवल दो जिंदगियों के नुकसान तक सीमित नहीं है। इसने यह भी दिखा दिया कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला अचानक जलप्रवाह किस तरह कुछ ही मिनटों में सामान्य परिस्थितियों को आपदा में बदल सकता है। यह घटना प्रशासन, स्थानीय निकायों और श्रद्धालुओं सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि मौसम संबंधी अलर्ट और सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।














