Sunday, May 3, 2026
Your Dream Technologies
HomeUttar Pradeshपीलीभीत का ‘करोड़पति चपरासी’ कांड: 53 खातों में 8.15 करोड़ की सरकारी...

पीलीभीत का ‘करोड़पति चपरासी’ कांड: 53 खातों में 8.15 करोड़ की सरकारी लूट, तीन पत्नियों-रिश्तेदारों के जरिए खजाना साफ!

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सामने आया बहुचर्चित सरकारी गबन अब सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग, कोषागार प्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर करारा तमाचा बन चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में वर्षों से तैनात एक साधारण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इलहाम-उर-रहमान शम्सी पर आरोप है कि उसने सरकारी वेतन भुगतान प्रणाली में ऐसी सेंध लगाई कि देखते ही देखते सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निजी खातों में पहुंचने लगे। ताजा जांच में यह रकम बढ़कर 8.15 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है, जबकि 53 संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर उनमें से 5.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज की जा चुकी है।


साधारण चपरासी से सिस्टम का ‘साइलेंट ऑपरेटर’ बनने तक

इलहाम-उर-रहमान शम्सी मूल रूप से बिसलपुर के एक इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर नियुक्त था, लेकिन करीब आठ वर्ष पहले उसने जुगाड़ और विभागीय संपर्कों के जरिए खुद को पीलीभीत के DIOS कार्यालय से अटैच करा लिया। यहां उसकी भूमिका सिर्फ दफ्तरी काम तक सीमित नहीं रही। धीरे-धीरे उसने वेतन बिल तैयार कराने, टोकन जनरेशन, भुगतान प्रविष्टि और लाभार्थी सत्यापन जैसे बेहद संवेदनशील वित्तीय कार्यों तक पहुंच बना ली।

यही पहुंच बाद में सरकारी खजाने की चाबी साबित हुई।

जांच एजेंसियों के अनुसार शम्सी ने शिक्षा विभाग के वेतन पोर्टल और कोषागार भुगतान प्रक्रिया में फर्जी लाभार्थी आईडी तैयार कीं। इन फर्जी आईडी के जरिए शिक्षकों, बाबुओं, संविदाकर्मियों और ठेकेदारों के नाम पर भुगतान आदेश बनाए गए, लेकिन रकम सीधे उसके निजी नेटवर्क के खातों में ट्रांसफर होती रही। बताया जा रहा है कि सितंबर 2024 से लेकर 2026 तक कम से कम 98 संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़े गए हैं, जबकि अब जांच का दायरा आठ साल पीछे तक खंगाला जा रहा है।


तीन पत्नियां, साली, सास और करीबी महिलाएं बनीं ‘फर्जी लाभार्थी’

इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि सरकारी धन को छिपाने के लिए इलहाम ने अपने पारिवारिक रिश्तों को ही वित्तीय सुरंग बना दिया। पुलिस और प्रशासनिक जांच में अब तक सात महिलाओं की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें उसकी पत्नियां, साली, सास और करीबी परिचित शामिल हैं।

जांच में सामने आए खातों में भेजी गई रकम इस प्रकार बताई जा रही है—

पहली पत्नी अर्शी खातून के खाते में लगभग ₹1.15 करोड़

दूसरी पत्नी लुबना नबी के खाते में लगभग ₹2.37 करोड़

तीसरी पत्नी अजारा खान के खाते में लगभग ₹2.12 करोड़

साली फातिमा नबी के खाते में लगभग ₹1.03 करोड़

सास नाहिद के खाते में करीब ₹95 लाख

अन्य रिश्तेदारों व परिचित महिलाओं के खातों में भी करोड़ों की रकम

इन सभी खातों को कथित रूप से शिक्षा विभाग के फर्जी कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं या लाभार्थियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। पुलिस का दावा है कि यह काम बिना तकनीकी जानकारी और अंदरूनी दस्तावेजी नियंत्रण के संभव नहीं था।


बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला राज

हैरानी की बात यह है कि विभागीय ऑडिट, लेखा परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी जहां वर्षों तक सोती रही, वहीं पूरे घोटाले का भंडाफोड़ एक बैंक अधिकारी की सतर्कता से हुआ। बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में लगातार सरकारी खाते से निजी खातों में बड़ी रकम आने पर शाखा प्रबंधक को संदेह हुआ। जब एक निजी खाते में 1 करोड़ से अधिक की संदिग्ध क्रेडिट एंट्रियां दर्ज हुईं, तब इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई।

इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच समिति बनाई, DIOS कार्यालय से रिकॉर्ड मांगे गए और पुलिस में मुकदमा दर्ज हुआ। जैसे-जैसे बैंक स्टेटमेंट खुलते गए, वैसे-वैसे सरकारी खजाने से निकलती रकम का सुराग 53 खातों तक जा पहुंचा। फिलहाल 5.5 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज की जा चुकी है और कई संपत्तियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।


सिर्फ शम्सी नहीं, पूरा नेटवर्क शक के घेरे में

पुलिस और प्रशासन की प्रारंभिक जांच अब इस निष्कर्ष की ओर बढ़ रही है कि यह खेल किसी एक चपरासी का अकेले का नहीं हो सकता। क्योंकि—

फर्जी लाभार्थी आईडी बनना,

वेतन बिलों का सत्यापन,

कोषागार टोकन जनरेशन,

भुगतान पासिंग,

बैंक स्तर पर नियमित क्रेडिट,

इन सभी चरणों में कई स्तरों की मानवीय और तकनीकी निगरानी होती है।

ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या DIOS कार्यालय के बाबू, लेखाकार, तकनीकी ऑपरेटर या कोषागार से जुड़े अन्य अधिकारी भी इस घोटाले की जानकारी में थे? क्या वर्षों तक किसी ने भुगतान सूची का मिलान नहीं किया? क्या सरकारी सिस्टम में मौजूद पासवर्ड, लॉगिन और डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग अकेला चपरासी कर सकता था?

यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां विभागीय मिलीभगत, दस्तावेजी फर्जीवाड़े और संपत्ति निवेश के बड़े नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।


सरकारी वेतन से कहीं ज्यादा आलीशान जिंदगी

एक चपरासी का औसत वेतन जहां सीमित आय का संकेत देता है, वहीं इलहाम शम्सी की जीवनशैली ने जांच अधिकारियों को पहले ही चौंका दिया था। पूछताछ में सामने आया कि उसने कई जिलों में फ्लैट, जमीन और निजी निवेश किए। रिश्तेदारों के खातों में अचानक करोड़ों का आना, महिलाओं के नाम से नकदी निकासी, बिल्डरों को भुगतान और लग्जरी खर्च इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सरकारी धन का बड़ा हिस्सा निजी संपत्ति खड़ी करने में लगाया गया। पुलिस ने कुछ बिल्डरों को नोटिस देकर संदिग्ध निवेश रोकने को कहा है।


प्रशासन पर सबसे बड़ा सवाल—क्या सरकारी खजाना इतना असुरक्षित है?

पीलीभीत का यह मामला सिर्फ एक सनसनीखेज चोरी नहीं है; यह सरकारी भुगतान प्रणाली की भयावह कमजोरी का दस्तावेज है। यदि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वर्षों तक फर्जी लाभार्थी बनाकर करोड़ों रुपये निकाल सकता है, तो इसका अर्थ है—

विभागीय ऑडिट निष्क्रिय था,

भुगतान सत्यापन कागजी था,

डिजिटल सुरक्षा कमजोर थी,

और जिम्मेदार अधिकारी या तो लापरवाह थे या मौन सहभागी।

यह घोटाला उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश की सरकारी लेखा प्रणाली के लिए चेतावनी है कि नीचे का कर्मचारी तब तक इतना ताकतवर नहीं हो सकता, जब तक ऊपर की निगरानी सो न जाए।


पीलीभीत का ‘करोड़पति चपरासी’ कांड अब शिक्षा विभाग के इतिहास के सबसे शर्मनाक वित्तीय घोटालों में गिना जा रहा है। 53 बैंक खाते, तीन पत्नियां, रिश्तेदारों का जाल, 98 संदिग्ध ट्रांजेक्शन और 8 करोड़ से ज्यादा की सरकारी रकम—यह कहानी बताती है कि जब सिस्टम की आंखें बंद हों, तो खजाने की चाबी पद से नहीं, पहुंच से तय होती है।

यह सिर्फ इलहाम शम्सी की चालाकी नहीं…
यह सरकारी तंत्र की सामूहिक विफलता की चार्जशीट है।

 

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button