पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के काउंटिंग एजेंट्स और संगठनात्मक पदाधिकारियों को ऐसा सियासी ‘विक्ट्री टॉनिक’ दिया है, जिसने बंगाल की चुनावी जंग को और विस्फोटक बना दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस मैराथन वर्चुअल बैठक में ममता बनर्जी ने एग्जिट पोल्स को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “स्टॉक मार्केट में हेरफेर का खेल” बताया और दावा किया कि TMC सिर्फ जीत नहीं रही, बल्कि 200 से ज्यादा सीटों के साथ प्रचंड बहुमत से वापसी कर रही है।
“एग्जिट पोल बकवास है, असली खेल 4 मई को दिखेगा”
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि BJP समर्थित नैरेटिव बनाने के लिए एग्जिट पोल्स को जानबूझकर हवा दी जा रही है। उनका आरोप था कि यह सिर्फ चुनावी माहौल प्रभावित करने का प्रयास नहीं, बल्कि शेयर बाजार को स्थिर रखने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है। उन्होंने साफ कहा—“एग्जिट पोल कुछ भी नहीं हैं… ये स्टॉक मार्केट को मैनिपुलेट करने का तरीका है। बंगाल में इस बार BJP झूठ बोल रही है।” इससे पहले भी ममता लगातार कहती रही हैं कि कई एग्जिट पोल “पेड और प्रेशराइज्ड” हैं तथा BJP दफ्तरों से स्क्रिप्टेड आंकड़े बाहर भेजे जा रहे हैं।
काउंटिंग एजेंट्स को ममता का युद्ध संदेश—“2 बजे क्या, सर्टिफिकेट मिलने तक डटे रहना”
ममता बनर्जी ने एजेंट्स को बेहद सख्त निर्देश दिए कि कोई भी काउंटिंग सेंटर बीच में नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि सुबह 5 बजे तक पहुंचना है, स्ट्रॉन्ग रूम से EVM निकलने से लेकर अंतिम प्रमाणपत्र मिलने तक हर चरण पर नजर रखनी है। अगर 200-300 वोटों का मामूली अंतर दिखे तो तत्काल री-काउंटिंग की मांग करनी है। उन्होंने यहां तक कहा कि खाना घर से लेकर जाओ, बाहर का कुछ मत खाना, क्योंकि “कुछ भी मिलाया जा सकता है।” यह बयान बताता है कि TMC नेतृत्व को काउंटिंग प्रक्रिया में किसी भी संभावित गड़बड़ी का कितना गहरा संदेह है।
“काउंटिंग में होगा खेला” — ममता का खुला एलान
बैठक के दौरान ममता ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा—“काउंटिंग में खेला होगा… मैं देखना चाहती हूं कि वे कितने बड़े खिलाड़ी हैं, हमारे खिलाड़ियों की कमी नहीं है।” बंगाल की राजनीति में ‘खेला होबे’ पहले भी TMC का चुनावी युद्धनाद रहा है, लेकिन इस बार इसे सीधे मतगणना दिवस से जोड़ दिया गया है। संदेश साफ था—TMC केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं रहेगी, बल्कि हर टेबल, हर राउंड और हर EVM नंबर पर आक्रामक निगरानी रखेगी। सोशल मीडिया पर भी ममता समर्थक समूह लगातार यही लाइन चला रहे हैं कि “एग्जिट पोल्स को भूलो, असली फैसला काउंटिंग हॉल में होगा।”
अभिषेक बनर्जी ने सिखाया ‘EVM चेकिंग का माइक्रो फॉर्मूला’
Abhishek Banerjee ने भी एजेंट्स को बेहद तकनीकी ट्रेनिंग दी। उन्होंने कहा कि मशीन आने के बाद उसका सीरियल नंबर Form 17C से मैच किया जाए, सील-डेट-टाइम चेक किया जाए, बैटरी प्रतिशत देखा जाए और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत VVPAT काउंटिंग की मांग की जाए। उनका दावा था कि महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस तरह की अनियमितताओं की शिकायतें पहले सामने आई हैं, इसलिए बंगाल में एक-एक एंट्री डायरी में नोट करनी होगी। यानी TMC इस बार केवल राजनीतिक नारे नहीं, बल्कि डेटा-आधारित काउंटिंग सर्विलांस की रणनीति पर काम कर रही है।
CAPF पर क्रूरता का आरोप, कार्यकर्ताओं को ‘सम्मान’ देने का वादा
ममता ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर भी TMC कार्यकर्ताओं, खासकर महिलाओं के साथ कथित सख्ती और क्रूर व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने CAPF की “ज्यादती” झेली है, पार्टी उन्हें आने वाले दिनों में सम्मानित करेगी। दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बल गांव-गांव जाकर महिलाओं और बच्चों तक को डराने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयानबाजी TMC की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें वह चुनाव को सिर्फ BJP बनाम TMC नहीं बल्कि “बंगाल बनाम बाहरी तंत्र” की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।
84 काउंटिंग सेंटर के बाहर हजारों कार्यकर्ता—TMC की सड़क से सिस्टम तक घेराबंदी
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पूरे बंगाल में बने 84 काउंटिंग सेंटर्स के बाहर हजारों की संख्या में छात्र, युवा, ट्रेड यूनियन और महिला कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। निर्देश दिया गया कि जब तक उम्मीदवार को जीत का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता, कोई भी ढीला नहीं पड़ेगा। यहां तक कहा गया कि अगर एजेंट को बाथरूम भी जाना पड़े तो दो साथी साथ रहें। यह असामान्य स्तर की सतर्कता दिखाती है कि TMC एग्जिट पोल्स के खिलाफ अपना पूरा नैरेटिव “हम जीत रहे हैं लेकिन काउंटिंग बचानी है” पर बना चुकी है।
बंगाल में नतीजे से पहले नैरेटिव की जंग—भरोसा बनाम भय
दिलचस्प बात यह है कि जहां ज्यादातर एग्जिट पोल BJP को बढ़त या कांटे की टक्कर दिखा रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी 200+ सीटों का दावा कर अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखने में जुटी हैं। ऑनलाइन चर्चाओं में भी बंगाल को लेकर यही माहौल है—एक तरफ BJP समर्थक एग्जिट पोल्स के आंकड़ों को निर्णायक बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ TMC कैंप कह रहा है कि “2021 की तरह सीट अनुमान फिर गलत साबित होंगे।”
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब लड़ाई सिर्फ मतगणना की नहीं, बल्कि भरोसे और भय की बन गई है। ममता बनर्जी ने अपने एजेंट्स को साफ संदेश दे दिया है—“जीत हमारी है, लेकिन जीत को सुरक्षित भी हमें ही करना है।” अब 4 मई को सिर्फ वोट नहीं गिने जाएंगे, बल्कि यह भी तय होगा कि एग्जिट पोल का नैरेटिव भारी पड़ता है या ममता का ‘खेला’।














