पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले दक्षिण 24 परगना के फलता इलाके से ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने राज्य की चुनावी निष्पक्षता, कानून-व्यवस्था और ग्रामीण हिंदू मतदाताओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। फलता सब-डिवीजन के हसीमपुर और आसपास के गांवों में शनिवार को सैकड़ों हिंदू ग्रामीण सड़क पर उतर आए और तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय पंचायत प्रधान इसराफिल चोंकदार तथा उसके समर्थकों पर खुलेआम जान से मारने, घर जलाने और खून-खराबे की धमकी देने का आरोप लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय महिलाओं ने दावा किया कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे हिंदू हैं और TMC समर्थकों को शक है कि उन्होंने वोट Bharatiya Janata Party को दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि TMC से जुड़े दबंगों ने मतदान के बाद गांव-गांव जाकर चेतावनी दी कि “अगर बीजेपी जीत गई तो तुम लोगों को जिंदा नहीं छोड़ेंगे, घर फूंक देंगे और गंगा में फेंक देंगे।” इस धमकी के बाद गांव में भय, असुरक्षा और पलायन जैसी स्थिति बन गई। सबसे ज्यादा आक्रोश महिलाओं में देखा गया, जिन्होंने खुलकर कहा कि वे किसी राजनीतिक दल की कार्यकर्ता नहीं हैं, फिर भी केवल हिंदू पहचान के आधार पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। एक महिला ने रोते हुए कहा कि “हमने किसी का क्या बिगाड़ा? हमें कहा गया है कि अगर ‘वे लोग’ जीत गए तो यहां खून बहेगा।” यह बयान इलाके में पसरे डर की गहराई को साफ दिखाता है।
स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सड़कों को जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, पूरे क्षेत्र में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए और फलता सहित संवेदनशील बूथों पर पुनर्मतदान कराया जाए। बढ़ते तनाव को देखते हुए इलाके में Central Reserve Police Force, Rapid Action Force और स्थानीय पुलिस को तैनात करना पड़ा। बख्तरबंद वाहन भी मौके पर पहुंचाए गए ताकि किसी भी संभावित हिंसा को रोका जा सके।
फलता का यह उबाल ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान को लेकर पहले ही गंभीर सवाल उठ चुके हैं। कई क्षेत्रों से EVM में गड़बड़ी, मतदाताओं को बूथ तक न पहुंचने देने, दबाव बनाकर वोट डलवाने और राजनीतिक हिंसा की शिकायतें चुनाव आयोग तक पहुंचीं। इन्हीं शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना की मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर सीट के कुल 15 मतदान केंद्रों पर शनिवार को पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि आयोग को कुल 77 बूथों पर री-पोल की मांग मिली थी, जिनमें से कई शिकायतें मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप से जुड़ी थीं।
#WATCH | A local woman says, "TMC's Israfil Chowkidar has threatened us that if these people win, they will burn our houses here and carry out bloodshed." https://t.co/W2sjgnjd8Q pic.twitter.com/cb7Lqlh6TK
— ANI (@ANI) May 2, 2026
फलता में ग्रामीणों का यह विरोध केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि बंगाल की चुनावी संस्कृति पर बड़ा आरोप बनकर उभरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मतदान खत्म होने के बाद अब असली दहशत शुरू हुई है—“किसने किसे वोट दिया” इस शक में राजनीतिक प्रतिशोध का दौर चल रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय नागरिक मंचों पर भी फलता और डायमंड हार्बर बेल्ट से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि मतदाताओं को मतदान से पहले और बाद में TMC कार्यकर्ताओं द्वारा धमकाया गया। कई नागरिकों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की स्थायी मौजूदगी की मांग की है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि मतगणना के बाद हिंसा और बढ़ सकती है।
इसी बीच चुनावी माहौल को और संवेदनशील बनाते हुए Supreme Court of India ने TMC को एक बड़ा झटका दिया है। मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय कर्मचारियों और PSU कर्मियों की तैनाती के खिलाफ दायर TMC की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया और साफ कहा कि निष्पक्ष काउंटिंग के लिए केंद्रीय कार्मिकों की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध नहीं है। अदालत के इस रुख को विपक्ष TMC पर अविश्वास की मुहर मान रहा है, जबकि TMC पहले से EVM स्ट्रॉन्गरूम और काउंटिंग व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रही है।
फलता की सड़कों पर उतरा यह आक्रोश अब सिर्फ चुनावी हिंसा का मामला नहीं रह गया, बल्कि यह सवाल बन चुका है कि क्या पश्चिम बंगाल में मतदाता वास्तव में स्वतंत्र होकर वोट दे पा रहा है? क्या वोट डालने के बाद उसकी जान-माल सुरक्षित है? और क्या हिंदू ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक पहचान के शक भर से सामाजिक दंड दिया जा रहा है? 4 मई की मतगणना से पहले फलता का यह विस्फोटक घटनाक्रम बता रहा है कि बंगाल में लोकतंत्र की लड़ाई अब केवल बैलेट बॉक्स तक सीमित नहीं रही—यह गांवों की गलियों, घरों की चौखटों और डरे हुए मतदाताओं के मन तक पहुंच चुकी है।














