मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित देर रात मुलाकात ने सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। दावा किया गया कि उद्धव ठाकरे रात करीब 2 बजे मुंबई स्थित मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ बंगले पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इस दावे के बाद महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर नया मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। फडणवीस ने साफ कहा कि उद्धव ठाकरे से किसी भी ‘गुप्त मुलाकात’ की बात पूरी तरह झूठी है और अगर कभी मुलाकात होगी तो खुले तौर पर होगी। साथ ही उन्होंने अफवाह फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
विधान परिषद चुनाव से पहले क्यों बढ़ी चर्चा?
महाराष्ट्र विधान परिषद की सीटों को लेकर महाविकास अघाड़ी (MVA) में मंथन जारी है। कांग्रेस और एनसीपी (शरद गुट) की ओर से उद्धव ठाकरे को विधान परिषद भेजने का समर्थन सामने आया है, जिससे उद्धव की सक्रिय विधायी वापसी की संभावनाएं तेज हुई हैं। ऐसे समय में फडणवीस से मुलाकात की खबर ने राजनीतिक संदेशों को और रहस्यमय बना दिया।
क्या हो सकती थी बातचीत?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर इस तरह की कोई बातचीत हुई भी होगी तो उसके केंद्र में तीन बड़े मुद्दे हो सकते हैं—
विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग या समर्थन की रणनीति
महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी के भविष्य के समीकरण
उद्धव ठाकरे की सदन में एंट्री को लेकर सत्ता पक्ष का रुख
2019 के बाद से उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों पर रहे हैं, इसलिए ऐसी किसी भी मुलाकात की चर्चा स्वाभाविक रूप से बड़े संकेत मानी जा रही है।
2019 की तल्खी के बाद संवाद की गुंजाइश?
याद रहे कि 2019 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना का गठबंधन टूटा था और उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस-एनसीपी के साथ महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक तल्खी बनी रही, लेकिन हाल के महीनों में कई मंचों पर दोनों ने एक-दूसरे के प्रति नरम रुख भी दिखाया है। इसी वजह से यह चर्चा और ज्यादा राजनीतिक महत्व रखती है।
सच क्या है?
फिलहाल आधिकारिक तौर पर गुप्त मुलाकात की पुष्टि नहीं हुई है, और मुख्यमंत्री ने इसे अफवाह बताया है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में जिस तरह विधान परिषद चुनाव, उद्धव ठाकरे की संभावित उम्मीदवारी और सत्ता संतुलन के सवाल एक साथ खड़े हैं, उसने इस खबर को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
चाहे यह मुलाकात हुई हो या नहीं, लेकिन इसने इतना जरूर साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं बल्कि भविष्य की बड़ी राजनीतिक पुनर्संरचना का संकेत बन चुके हैं।














