बारामती की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार मुकाबला अभी से 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर आकार लेने लगा है। महाराष्ट्र की राजनीति में अहम स्थान रखने वाला पवार परिवार अब आंतरिक बयानबाज़ी और संभावित दावेदारी के कारण चर्चा के केंद्र में आ गया है।
बारामती: सत्ता का गढ़ और परिवार की राजनीति
Baramati लंबे समय से Sharad Pawar और उनके परिवार का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है। यहां से चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रतिष्ठा का सवाल भी बन जाता है। 2024 के उपचुनाव में पहले ही “पवार बनाम पवार” की स्थिति देखने को मिल चुकी है, और अब 2029 को लेकर भी वैसी ही संभावनाएं बनती दिख रही हैं।
नई पीढ़ी की एंट्री: जय पवार का दावा
Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने पहली बार खुलकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर की। उन्होंने कहा कि 2029 के विधानसभा चुनाव में बारामती से उम्मीदवार बनने की “लोगों की इच्छा” है, हालांकि उन्होंने खुद को पार्टी का “छोटा कार्यकर्ता” बताते हुए विनम्र रुख भी रखा।
यह बयान संकेत देता है कि पवार परिवार की नई पीढ़ी अब सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
रोहित पवार का जवाब: मुकाबले की आहट
दूसरी ओर Rohit Pawar ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 2029 में “जय बनाम युगेंद्र” जैसा मुकाबला हो सकता है, चाहे जनता की इच्छा कुछ भी हो।
उनका यह बयान सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि परिवार के भीतर अलग-अलग गुट अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में “पवार बनाम पवार” की लड़ाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
परिवार बनाम राजनीति: अंदरूनी खींचतान
रोहित पवार ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार को एक करना आसान नहीं है, क्योंकि राजनीतिक विचार और समीकरण अलग होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल पवार परिवार की विरासत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह बयान बताता है कि बाहरी राजनीतिक दबाव और अंदरूनी महत्वाकांक्षाएं मिलकर स्थिति को और जटिल बना रही हैं।
वरिष्ठ की सलाह: अभी समय नहीं
इस पूरे विवाद पर वरिष्ठ सदस्य Shrinivas Pawar ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जय और रोहित—दोनों को सलाह दी कि इस तरह के बयान देने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
उनका कहना था कि 2029 के चुनाव को लेकर अभी से चर्चा करना सही नहीं है और अंतिम निर्णय का अधिकार Sharad Pawar के पास ही रहेगा।
उपचुनाव और वर्तमान स्थिति
फिलहाल बारामती में उपचुनाव हो चुके हैं, जहां Sunetra Pawar चुनावी मैदान में हैं। यह उपचुनाव भी पवार परिवार के भीतर के समीकरणों को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
2029 का चुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि पवार परिवार की अगली पीढ़ी के नेतृत्व की परीक्षा होगा
परिवार के भीतर अलग-अलग धड़े बनते दिख रहे हैं
बाहरी राजनीतिक दल भी इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं
अंतिम रणनीति और उम्मीदवार का फैसला संभवतः आखिरी समय में ही होगा
बारामती की राजनीति में 2029 का मुकाबला अभी दूर है, लेकिन जिस तरह से बयानबाज़ी शुरू हो चुकी है, उससे साफ है कि यह चुनाव बेहद दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल होने वाला है। यह केवल एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि पवार परिवार के राजनीतिक भविष्य और नेतृत्व की दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।














