मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इज़राइल और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों से बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति और उससे जुड़े वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की।
जयशंकर ने इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार से टेलीफोन पर बात की, जिसमें ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी, होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की स्वतंत्रता और पश्चिम एशिया के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
बातचीत के बाद गिदोन सार ने कहा कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने वाले कदमों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सभी देशों के लिए निर्बाध नेविगेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इसी क्रम में जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से भी बातचीत की। दोनों नेताओं ने ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष के असर पर चर्चा की।
Had a telecon this afternoon with Israel FM @gidonsaar. Our discussion covered different aspects of the West Asia situation.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 14, 2026
यह कूटनीतिक संवाद ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के नए दौर की कोशिशें चल रही हैं, हालांकि पहले चरण की बातचीत विफल रही थी। इस पृष्ठभूमि में भारत की सक्रियता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (LNG) ट्रांजिट का मुख्य रास्ता है। ईरान द्वारा यहां जहाजों की आवाजाही सीमित करने और अमेरिका द्वारा बाहर से नाकाबंदी लगाए जाने के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
भारत के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है, क्योंकि ईरान ने भारतीय जहाजों के लिए आंशिक रूप से रास्ता खोला है, लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी के चलते यह सुविधा भी जोखिम में पड़ सकती है।
मौजूदा हालात में भारत संतुलित कूटनीति अपनाते हुए सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे और वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति पर नकारात्मक असर को कम किया जा सके।














