दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कोई भी आरोपी यह तय नहीं कर सकता कि उसके मामले की सुनवाई कौन सा जज करेगा।
प्रवेश वर्मा ने कहा, “देश में लाखों मामले लंबित हैं—चाहे निचली अदालतों में हों, हाई कोर्ट में हों या सुप्रीम कोर्ट में। अगर हर याचिकाकर्ता यह तय करने लगे कि उसका केस कौन सा जज सुनेगा, तो न्याय व्यवस्था का क्या होगा?”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब अदालतें खुद याचिकाकर्ताओं से पूछेंगी कि वे किस जज के सामने अपना मामला रखना चाहते हैं।
“न्यायपालिका पर सवाल उठाने की कोशिश” – प्रवेश वर्मा
हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि केजरीवाल का रवैया न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया, “जिस व्यक्ति ने पहले सेना पर सवाल उठाए, झूठी कसमें खाईं, वही अब न्यायपालिका पर सवाल उठाकर पूरे सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।”
प्रवेश वर्मा ने यह भी कहा कि केजरीवाल ने पहले निचली अदालत के फैसले को सही माना था, लेकिन अब वही व्यक्ति हाई कोर्ट के जज पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं।
जज पर पक्षपात के आरोप का विवाद
मंत्री ने दावा किया कि केजरीवाल ने जिस हाई कोर्ट जज के सामने याचिका दाखिल की, उनके खिलाफ यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उन्होंने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसके आधार पर उन्होंने जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि यह रवैया इस बात को दर्शाता है कि अगर फैसला पक्ष में आए तो वह सही, और खिलाफ आए तो जज पर सवाल खड़े किए जाते हैं।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) से जुड़ा है। 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा कर रही हैं। सुनवाई के दौरान केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल की थी और उनसे खुद को केस से अलग करने की मांग की थी।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वही जज इस मामले की आगे भी सुनवाई करेंगी।














