पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट एक बार फिर सबसे अहम मुकाबले के केंद्र में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस सीट से मैदान में हैं, जबकि भाजपा की ओर से सुवेंदु अधिकारी उन्हें सीधी चुनौती दे रहे हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में इस सीट पर टकराव और तेज हुआ है, और तृणमूल कांग्रेस ने यहां बड़े स्तर पर स्थानीय प्रचार अभियान शुरू किया है।
टीएमसी ने भवानीपुर में बड़े रैलियों के बजाय अब वार्ड-स्तर पर प्रचार को प्राथमिकता दी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, डोर-टू-डोर कैंपेन, मोहल्ला बैठकों और छोटे-छोटे जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए वोटरों तक सीधे पहुंचने की रणनीति बनाई गई है। ममता बनर्जी की पहली रोडशो की तैयारी भी इसी हाइपर-लोकल प्लान का हिस्सा बताई जा रही है।
इसी बीच, ममता बनर्जी ने भवानीपुर में अपनी मौजूदगी और भी मजबूत करते हुए नामांकन के दौरान शक्ति-प्रदर्शन किया। उन्होंने कलकत्ता में अपने आवास से करीब 800 मीटर की पदयात्रा कर नामांकन दाखिल किया, जिसे टीएमसी ने आत्मविश्वास का संदेश बताया। पार्टी के नेता यह भी कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री अपने इलाके के हर वार्ड को टारगेट कर रही हैं, खासकर उन जगहों पर जहां वोटर लिस्ट से नाम कटने की शिकायतें सामने आई हैं।
भाजपा ने इस सक्रियता पर तंज कसा है। विपक्ष का आरोप है कि ममता बनर्जी भवानीपुर तक सिमटकर रह गई हैं, क्योंकि वे अपने सामने सुवेंदु अधिकारी की चुनौती को लेकर दबाव में हैं। दूसरी तरफ टीएमसी इसे “डर नहीं, भरोसे” की राजनीति बता रही है और दावा कर रही है कि यह अभियान इलाके में पार्टी की पकड़ और मजबूत करेगा।
भवानीपुर को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। पार्टी बैठकों में आठ वार्डों पर अलग-अलग रणनीति बनाई जा रही है, और विशेष रूप से कुछ वार्डों में मतदाता सूची से नाम कटने के मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। टीएमसी का कहना है कि वह हर स्तर पर मतदाताओं से सीधा संवाद कर रही है, जबकि भाजपा क्षेत्र में आक्रामक प्रचार के जरिए मुकाबले को कड़ा बना रही है।
कुल मिलाकर, भवानीपुर अब केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन गई है। आने वाले दिनों में यहां का प्रचार और तेज होने की संभावना है, और यह सीट पूरे बंगाल के राजनीतिक संदेश का केंद्र बनी रहेगी।














