भारत आज संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। 14 अप्रैल 1891 को मऊ में जन्मे बाबा साहेब ने न केवल भारतीय समाज को नई दिशा दी, बल्कि एक ऐसे आधुनिक, समतामूलक और लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी, जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो।
बाबा साहेब को दुनिया के महानतम विद्वानों, विचारकों और सच्चे राष्ट्रभक्तों में गिना जाता है। उन्होंने सदियों से चली आ रही सामाजिक कुरीतियों—जैसे अस्पृश्यता, जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की भावना—को समाप्त करने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहाँ समता, बंधुता, न्याय और स्वतंत्रता केवल शब्द न होकर जीवन का आधार बनें।
भारत की आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—एक ऐसा संविधान तैयार करना जो विविधताओं से भरे इस देश को एक सूत्र में बांध सके। इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए बाबा साहेब को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने विश्व के कई देशों के संविधानों का गहन अध्ययन कर 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान तैयार किया, जिसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सौंपा गया। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को यह संविधान पूरे देश में लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
बाबा साहेब द्वारा निर्मित संविधान ने देश के हर नागरिक को मौलिक अधिकारों की गारंटी दी—जिसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, शिक्षा और रोजगार के अवसरों की समानता शामिल हैं। यह संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानव गरिमा का जीवंत दस्तावेज है।
विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों के क्षेत्र में बाबा साहेब का योगदान ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति और समान अधिकार दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान किए। बाल विवाह, सती प्रथा और बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ उनके प्रयासों ने भारतीय समाज को नई दिशा दी और महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया।
यह कहना कि बाबा साहेब केवल दलितों या पिछड़े वर्गों के नेता थे, उनके योगदान को सीमित करना होगा। वास्तव में, वे देश के हर वर्ग—गरीब, किसान, मजदूर, वंचित और महिलाओं—के सशक्तिकरण के सूत्रधार थे। उनके द्वारा निर्मित संविधान आज 148 करोड़ भारतीयों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की गारंटी देता है।
आज जब देश उनकी जयंती मना रहा है, यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों और सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प भी है। बाबा साहेब का जीवन और कार्य हमें यह सिखाता है कि एक मजबूत, समावेशी और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण ही सच्चे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
ऐसे युगपुरुष डॉ. भीमराव अंबेडकर को देश का शत-शत नमन।














