तीन दिन का शांत धरना एक झटके में हिंसा में बदला?
नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 में कर्मचारियों का वेतन वृद्धि को लेकर चल रहा विरोध सोमवार को अचानक हिंसक हो गया। पिछले तीन-चार दिनों से शांतिपूर्वक जारी धरना उस समय उग्र रूप ले बैठा, जब हजारों श्रमिकों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। देखते ही देखते माहौल इतना बिगड़ गया कि पुलिस वाहन को पलट दिया गया, कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और एक वाहन को आग के हवाले कर दिया गया।
किसके खिलाफ था प्रदर्शन?
जानकारी के मुताबिक, फेज-2 थाना क्षेत्र में एक निजी कंपनी, जो मदरसन यूनिट के पास स्थित बताई जा रही है, के बाहर कर्मचारी कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। सोमवार सुबह कुलेसरा से फेज-2 तक श्रमिकों ने मार्च निकाला। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से प्रदर्शन का असर और बढ़ गया, लेकिन कुछ ही देर में यह शांत आंदोलन उग्र झड़प में बदल गया।
पुलिस-श्रमिक झड़प, आंसू गैस का इस्तेमाल
स्थिति संभालने के लिए पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आक्रोशित भीड़ और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों को निशाना बनाया और एक गाड़ी पलट दी। कई अन्य वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई, जबकि एक वाहन में आग लगने से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
क्या किसी संगठन की भूमिका थी?
अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर किसी बड़े संगठन की आधिकारिक भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह साफ है कि बड़ी संख्या में फैक्टरी श्रमिकों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि क्या कुछ असामाजिक तत्वों या संगठित समूहों ने माहौल बिगाड़ने में भूमिका निभाई।
श्रमिकों द्वारा अन्य राज्य से दुष्प्रेरित होकर नोएडा में कई जगह प्रदर्शन किया गया है, मात्र एक जगह हिंसक प्रदर्शन होने पर पुलिस द्वारा न्यूनतम बल प्रयोग कर स्थितियां नियंत्रित की गई हैं। पुलिस द्वारा कहीं भी फायरिंग नही की गयी है। असत्य एवं भ्रामक सूचना फैलाए जाने… pic.twitter.com/btP6dezAHG
— UP POLICE (@Uppolice) April 13, 2026
क्यों भड़की नाराजगी?
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की प्रमुख मांगें न्यूनतम वेतन ₹13,000 से बढ़ाकर ₹20,000 करना, ओवरटाइम का उचित भुगतान सुनिश्चित करना और छुट्टियों के लिए स्पष्ट नियम बनाना है। माना जा रहा है कि कई दिनों से समाधान न निकलने और संवाद की कमी के कारण नाराजगी धीरे-धीरे बढ़ती गई और फिर सड़क पर फूट पड़ी।
यातायात ठप, लोग घंटों फंसे रहे
हिंसा का असर पूरे औद्योगिक इलाके पर पड़ा। सेक्टर-60, फेज-2 और कुलेसरा के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। कई प्रदर्शनकारी सड़कों पर बैठ गए और वाहनों के आगे लेट गए, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। दफ्तर जाने वाले लोगों और आम नागरिकों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रशासन सतर्क, जांच जारी
प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और घटना की गंभीरता से जांच की जा रही है। उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही श्रमिकों और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास भी जारी है।
यह घटना केवल वेतन विवाद नहीं, बल्कि यह भी दिखाती है कि समय पर संवाद और भरोसेमंद समाधान न मिलने पर श्रमिक असंतोष किस तरह बड़े संकट में बदल सकता है। नोएडा के औद्योगिक माहौल के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है।














