पटना:बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम के साथ ही राज्य की सियासत में सत्ता हस्तांतरण की चर्चा तेज हो गई है।
अगले महीने राज्यसभा की शपथ
नीतीश कुमार अगले महीने 10 अप्रैल को Rajya Sabha की सदस्यता की शपथ लेने वाले हैं। नियमों के अनुसार कोई भी नेता एक समय में केवल एक ही सदन का सदस्य रह सकता है, इसलिए उन्हें बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, फिलहाल वे बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।
नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि राज्यसभा की शपथ लेने के बाद बिहार में नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि नीतीश कुमार के बाद राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी।
लंबे समय से विधान परिषद के सदस्य
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। वह 2006 से लगातार Bihar Legislative Council के सदस्य रहे हैं। 7 मई 2024 को वह चौथी बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे और उनका कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। लेकिन राज्यसभा जाने के फैसले के चलते उन्होंने अपना कार्यकाल बीच में ही छोड़ दिया।
चारों सदनों के सदस्य बनने वाले चुनिंदा नेता
नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जो भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों—लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—के सदस्य रह चुके हैं। वह पहली बार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बने थे और 1989 में लोकसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे।
बेटे निशांत कुमार की एंट्री की चर्चा
इधर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि नीतीश कुमार के विधान परिषद की सीट छोड़ने के बाद उनके बेटे Nishant Kumar को विधान परिषद भेजा जा सकता है। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार ने भी हाल के दिनों में राजनीति में सक्रियता बढ़ाई है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और सत्ता का नया समीकरण क्या रूप लेगा।














