गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी माहौल गरमा गया है। हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबारी सीट से एक बार फिर बड़ी जीत का दावा करते हुए कहा कि इस बार उन्हें पिछले चुनाव से भी अधिक वोट मिल सकते हैं। उन्होंने अपने तीन दशक लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र की जनता से गहरे जुड़ाव को अपनी ताकत बताया।
‘लोग परिवार का हिस्सा बन चुके हैं’
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उनका करीब 30 साल का राजनीतिक सफर रहा है और जालुकबारी के लोग अब उनके परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी उनकी जीत का अंतर प्रभावशाली रहेगा।
‘मुझे इतना बड़ा मत बनाओ’
कांग्रेस द्वारा चुनाव को “हिमंता बनाम कांग्रेस” बताए जाने पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इतना बड़ा बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि अगर यह मुकाबला व्यक्ति आधारित हो गया तो वे एक “संस्था” बन जाएंगे, इसलिए उन्हें “छोटा आदमी” ही बने रहने दिया जाए।
चुनावी मुद्दे: असमिया पहचान और विकास
हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव में असमिया पहचान और विकास को मुख्य मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी नहीं है और संगठन पूरी तरह एकजुट है।
कांग्रेस पर निशाना
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भाजपा कांग्रेस के नेताओं को अपने साथ लाती है, तो विपक्ष को आपत्ति होती है, जबकि पहले वही नेता कांग्रेस के लिए “अच्छे” थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में मजबूत नेतृत्व की कमी के चलते यह सिलसिला जारी रहेगा।
सियासी सफर: हार से जीत तक
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 26 साल की उम्र में पहला चुनाव लड़ा, जिसमें वे करीब 12,000 वोटों से हार गए थे। इसके बाद 2001 में उन्होंने उतने ही अंतर से जीत दर्ज की।
2006 में जीत का अंतर बढ़कर 24,000 और 2011 में 45,000 हो गया। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगभग 1 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की और करीब 80% वोट प्राप्त किए।
जालुकबारी सीट पर एक बार फिर हिमंत बिस्वा सरमा की मजबूत पकड़ नजर आ रही है। चुनावी मैदान में उतरते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अनुभव, विकास कार्य और जनता से जुड़ाव के दम पर वे इस बार भी बड़ी जीत की उम्मीद कर रहे हैं।














