उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस मामले में बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं के नाम सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुली सफाई दी है।
दुष्यंत गौतम का नाम हाल के दिनों में इस हत्याकांड से जोड़ा जा रहा था, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया।
“47 साल के सार्वजनिक जीवन में कभी ऐसा आरोप नहीं लगा”
दुष्यंत गौतम ने कहा,
“मैंने उत्तराखंड की जनता को अपने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन के 47 वर्ष दिए हैं। इतने लंबे सार्वजनिक जीवन में कभी भी इस तरह का आरोप मुझ पर नहीं लगा। मैं भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा, नैतिक मूल्यों और समाज की बहन-बेटियों की इज्जत को सर्वोपरि मानता हूं।”
उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक और गलत प्रवृत्ति के लोग उनकी छवि को धूमिल करने की साजिश कर रहे हैं, जिससे वह बेहद आहत हैं।
भ्रामक खबर फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
दुष्यंत गौतम ने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रहे कथित ऑडियो-वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा,
“जिस तरह से कुछ वीडियो और सामग्री फैलाई जा रही है, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि इसकी शुरुआत कहां से हुई और इसके पीछे कौन लोग हैं। मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं।”
उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जो लोग इस मामले में झूठी और भ्रामक खबरें फैलाकर उनकी छवि खराब कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
“सबूत मिले तो सार्वजनिक जीवन से ले लूंगा सन्यास”
दुष्यंत गौतम ने बड़ा बयान देते हुए कहा,
“अगर मेरे खिलाफ कोई भी ठोस सबूत सामने आता है और उसे प्रमाणित किया जाता है, तो मैं अपने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन से सन्यास ले लूंगा।”
उन्होंने कहा कि अंकिता का नाम लेकर राजनीति करना न सिर्फ एक महिला का अपमान है, बल्कि समाज की बेटियों के सम्मान के खिलाफ भी है।
गृह सचिव को पत्र, फर्जी कंटेंट हटाने की मांग
दुष्यंत गौतम ने उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली को पत्र लिखकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आपराधिक तत्वों ने एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत फर्जी और मनगढ़ंत ऑडियो-वीडियो तैयार किए हैं।
उन्होंने उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और न्यूज चैनलों की सूची भी सौंपी है, जिन पर उनके खिलाफ कथित रूप से झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप प्रसारित किए जा रहे हैं। साथ ही प्रशासन से मांग की है कि ऐसी सामग्री को तुरंत हटाया जाए और इसके प्रसार पर रोक लगाई जाए।














