बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुभवी नेता संजय सरावगी को बिहार प्रदेश की कमान सौंपी है। लंबे संगठनात्मक अनुभव और लगातार चुनावी जीत के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
दरभंगा से आने वाले संजय सरावगी राजनीति के मैदान में कोई नया नाम नहीं हैं। वे छात्र जीवन से ही सक्रिय रहे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के जरिए राजनीति में कदम रखा। 1995 में बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने संगठन और जनप्रतिनिधि—दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।
संगठन से विधानसभा तक का सफर
संजय सरावगी ने 2003 में दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद का चुनाव जीतकर स्थानीय राजनीति में मजबूत आधार बनाया। इसके बाद 2005 में पहली बार दरभंगा सदर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। खास बात यह है कि उन्होंने 2005 (फरवरी), 2005 (नवंबर), 2010, 2015, 2020 और 2025—लगातार छह विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की।
2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी उमेश सहनी को बड़े अंतर से हराकर अपनी सियासी ताकत फिर साबित की।
पार्टी का आधिकारिक ऐलान
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि बीजेपी विधायक संजय सरावगी को तत्काल प्रभाव से बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है। इस घोषणा के साथ ही पार्टी में चल रही अटकलों पर विराम लग गया।
दिलीप जायसवाल के बाद क्यों जरूरी था नया अध्यक्ष?
पार्टी के “एक व्यक्ति–एक पद” के सिद्धांत के तहत दिलीप जायसवाल को बिहार सरकार में मंत्री बनाए जाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद खाली हो गया था। तभी से नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा तेज थी, जिस पर अब अंतिम मुहर लग चुकी है।
संजय सरावगी: एक नजर में
जन्म: 28 अगस्त 1969, दरभंगा (बिहार)
शिक्षा: M.Com, MBA (मिथिला विश्वविद्यालय)
राजनीतिक शुरुआत: छात्र जीवन में 10 साल तक ABVP में विभिन्न पद
संगठनात्मक भूमिकाएं:
1999: भाजयुमो जिला मंत्री
2001: दरभंगा नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष
2003: दरभंगा जिला भाजपा महामंत्री
जनप्रतिनिधि सफर:
2002: वार्ड संख्या 6 से पार्षद
2005–2025: लगातार छह बार विधायक
अन्य जिम्मेदारियां:
2017: बिहार विधानसभा प्राक्कलन समिति के सभापति
फरवरी 2025 से: राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री
प्रदेश भाजपा गोवंश प्रकोष्ठ के संयोजक समेत कई संगठनात्मक दायित्व
आगे की राह
संजय सरावगी के नेतृत्व में बिहार बीजेपी से संगठन को और मजबूत करने, चुनावी रणनीति को धार देने और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। अनुभवी नेतृत्व और लगातार जीत का ट्रैक रिकॉर्ड—यह संकेत देता है कि पार्टी ने एक भरोसेमंद हाथों में कमान सौंपी है।














