नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों के प्रस्तावित धरना प्रदर्शन से पहले नोएडा में किसान नेताओं को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। किसान संगठनों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने नोएडा के किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया, ताकि वे ग्रेटर नोएडा पहुंचकर किसानों के आंदोलन में शामिल न हो सकें। इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।
रात 1 बजे से घर में नजरबंद रखने का दावा
ग्राम विकास संगठन नोएडा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें रात करीब 1 बजे से उनके घर में नजरबंद कर रखा है। उनका कहना है कि किसानों के आंदोलन में नोएडा के किसानों की भागीदारी रोकने के उद्देश्य से पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
अशोक चौहान के मुताबिक, किसानों का मुद्दा केवल किसी एक गांव या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके हक और अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और सरकार को किसानों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
‘पुलिस के दम पर आंदोलन नहीं दबा सकती सरकार’
अशोक चौहान ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलन को पुलिस के बल पर कुचलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को रोकने के लिए प्रशासन चाहे जितने प्रयास कर ले, लेकिन किसान अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि किसान वह वर्ग है, जो बंजर जमीन को भी मेहनत और संघर्ष से उपजाऊ बनाकर उसमें फसल पैदा करने योग्य बना देता है। ऐसे में किसानों को उनके अधिकारों से वंचित करना आसान नहीं होगा।
प्राधिकरणों से हक लेकर रहेंगे किसान
किसान नेता ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसानों के सामने जमीन, मुआवजा और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से उठते रहे हैं। किसानों का कहना है कि विकास प्राधिकरणों के गठन और क्षेत्र के तेजी से शहरीकरण के बीच किसानों के हितों और अधिकारों की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
अशोक चौहान ने कहा कि किसान प्राधिकरणों से अपने हक और अधिकार लेकर रहेंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
‘संवाद के बजाय पुलिस का सहारा क्यों?’
किसान नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान चाहती है तो उनके साथ बातचीत क्यों नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि किसानों से संवाद करने के बजाय पुलिस प्रशासन के जरिए उन्हें आंदोलन में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
अशोक चौहान ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना किसानों का अधिकार है। उन्होंने सरकार से किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने और आंदोलन से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की अपील की।
आंदोलन में नोएडा की भागीदारी रोकने का आरोप
किसान संगठनों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर प्रस्तावित धरने में बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की तैयारी थी। इसी बीच नोएडा के किसान नेताओं को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किए जाने से कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
किसान पक्ष का कहना है कि यदि किसी आंदोलन को लेकर प्रशासन को आपत्ति है तो किसानों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जानी चाहिए। नेताओं को घर में नजरबंद करना समस्या का समाधान नहीं है। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ सकती है।
‘किसानों की आवाज दबाना संभव नहीं’
अशोक चौहान ने कहा कि किसान अपने अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि किसानों की आवाज को पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाने की कोशिश की गई तो इससे सरकार और किसानों के बीच दूरी और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ हैं। खेतों में मेहनत करने वाले किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए, न कि पुलिस कार्रवाई के जरिए।
सरकार से बातचीत की मांग
किसान संगठनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि किसान नेताओं को हाउस अरेस्ट करने जैसी कार्रवाई से बचा जाए और किसानों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया जाए। उनका कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि संवाद से निकलेगा।
फिलहाल किसान नेताओं की ओर से लगाए गए हाउस अरेस्ट के आरोपों को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाहर होने वाले किसानों के प्रदर्शन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है और किसान संगठन आगे की रणनीति क्या तय करते हैं।
किसान नेता अशोक चौहान का स्पष्ट संदेश है कि आंदोलन को रोकने की कोशिश के बावजूद किसानों की आवाज और उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।














