“नैनीताल-अल्मोड़ा में अत्यंत भारी बारिश का खतरा, 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट | नदियां उफान पर, भूस्खलन का खतरा बढ़ा | प्रशासन और SDRF अलर्ट मोड पर”
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ से मैदान तक लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले करीब 18 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में बारिश के अत्यंत तीव्र दौर की आशंका को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के बीच भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि SDRF की टीमों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, गरज-चमक के साथ तेज बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और चमोली समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
बारिश के दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। मौसम में अचानक बदलाव और कुछ स्थानों पर अत्यंत तेज बारिश के दौर लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही भूस्खलन की संवेदनशीलता को देखते हुए हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
मौसम संबंधी यह चेतावनी 1 सितंबर 2026 की शाम 3:58 बजे से 2 सितंबर 2026 की सुबह 10 बजे तक प्रभावी रहने की बात कही गई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों को गंभीरता से लेने की अपील की है।
नैनीताल-अल्मोड़ा के लिए रेड अलर्ट, कई इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का खतरा
राज्य के नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों के कुछ हिस्सों में मौसम की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इन क्षेत्रों में बहुत भारी से अत्यंत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।
चौखुटिया, भिकियासैंण, रानीखेत, भनोली, कटारमल, जैती, रामनगर, भीमताल, हल्द्वानी, मुक्तेश्वर, कोटाबाग, भवाली और द्वाराहाट समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का खतरा है।
इन इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में खुले स्थानों, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
तीन जिलों में स्कूल बंद, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
भारी बारिश के अलर्ट का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए नैनीताल, बागेश्वर और अल्मोड़ा जिलों में स्कूलों की छुट्टी के आदेश जारी किए गए हैं।
प्रशासन का यह कदम बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान सड़कें बंद होने, मलबा आने और अचानक जलभराव की स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है। ऐसे में विद्यार्थियों की आवाजाही जोखिम भरी हो सकती है।
जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पिथौरागढ़ में बारिश बनी मुसीबत, 17 सड़कें बंद
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सोमवार रात से जिले के कई हिस्सों में तेज बारिश जारी है। बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और सड़कों पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ है।
पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग समेत जिले की करीब 17 सड़कें बंद हो गई हैं। मुन्ना बैंड के पास भारी मात्रा में मलबा आने से सड़क पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ।
सड़क बंद होने के कारण टैक्सी, बस और ट्रकों समेत 400 से अधिक वाहन अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं। यात्रियों और वाहन चालकों को रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने की कोशिश में जुटे हैं।
बारिश अगर इसी तरह जारी रही तो अन्य मार्गों पर भी भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति पैदा हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंता का विषय बनी हुई है।
काली, रामगंगा, सरयू और गोरी नदियों का बढ़ा जलस्तर
लगातार बारिश का असर उत्तराखंड की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। काली, रामगंगा, सरयू और गोरी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। कई नदी और नाले उफान पर हैं।
नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को इनके किनारे जाने से बचने की सलाह दी है। विशेष रूप से उन इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है, जहां नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है।
ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही न करें और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तत्काल स्थानीय अधिकारियों को दें।
भूस्खलन वाले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ रहा है। पहाड़ों में पहले से संवेदनशील कई सड़क मार्ग बारिश के कारण प्रभावित हो सकते हैं। सड़क पर अचानक मलबा आने से यातायात बाधित होने के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि मौसम खराब होने की स्थिति में बिना जरूरी काम के यात्रा न करें। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ें।
SDRF और बचाव टीमें तैयार, हर गतिविधि पर नजर
मौसम विभाग के अलर्ट के बाद प्रशासन ने आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में SDRF की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जा सके।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क बंद होने या भूस्खलन की स्थिति में तत्काल सूचना उपलब्ध कराने और प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द खोलने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बदलता मौसम है। तेज बारिश के दौरान जहां सड़कें बंद होने का खतरा है, वहीं नदियों और नालों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है।
अगले कुछ घंटे बेहद अहम, लोगों से सावधानी बरतने की अपील
उत्तराखंड में अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खासकर नैनीताल और अल्मोड़ा के रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रशासन ने साफ तौर पर लोगों से अपील की है कि वे मौसम की गंभीरता को देखते हुए नदी-नालों, पहाड़ी ढलानों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें। खराब मौसम में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं—सड़कें बंद हैं, सैकड़ों वाहन फंसे हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में आने वाले घंटे प्रशासन की तैयारियों और लोगों की सतर्कता, दोनों के लिए अहम साबित होंगे।
फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत यही है कि मौसम की चेतावनी को महज सूचना न समझकर गंभीरता से लिया जाए। पहाड़ों में बारिश के दौरान एक छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।














