गाजीपुर के करंडा क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में बुधवार को उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब समाजवादी पार्टी (सपा) का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। पहले से संवेदनशील बने माहौल में यह दौरा टकराव का कारण बन गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई।
क्या हुआ घटनास्थल पर?
जानकारी के अनुसार, सपा प्रतिनिधिमंडल को सुबह 11 बजे गांव पहुंचना था, लेकिन वे करीब 12 बजे पहुंचे। इस बीच गांव में पहले से मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया। ग्रामीणों ने प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने से रोका सपा नेताओं ने विरोध में वहीं धरना शुरू कर दिया पुलिस से पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति मांगी गई तनावपूर्ण माहौल में प्रशासन ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की और पीड़ित परिवार की एक महिला सदस्य को वार्ता के लिए बुलाया गया।
कैसे भड़की हिंसा?
वार्ता के दौरान अचानक माहौल बिगड़ गया और ग्रामीणों की ओर से पथराव शुरू हो गया जवाबी प्रतिक्रिया में दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी तेज हो गई मौके पर अफरा-तफरी मच गई इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: रामआसरे विश्वकर्मा,डॉ. वीरेंद्र यादव,सत्येंद्र यादव ‘सत्या’ महिला कार्यकर्ता रीना यादव और बिंदु सभी घायलों को इलाज के लिए गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
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गाजीपुर के करंडा क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में बुधवार को हालात उस समय बेकाबू हो गया
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पुलिस भी हुई घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हैरानी की बात यह रही कि घटनास्थल पर भारी पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद स्थिति तुरंत काबू में नहीं आ सकी। करंडा थानाध्यक्ष और कोतवाली प्रभारी को सिर में चोट लगने की खबर पुलिस को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई है।
घटना की पृष्ठभूमि: पहले से था तनाव
गांव में तनाव की मुख्य वजह 14-15 अप्रैल की रात हुई एक दर्दनाक घटना है, जब 16 वर्षीय निशा विश्वकर्मा का शव गंगा नदी में मिला था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है मामला संवेदनशील होने के कारण गांव में पहले से ही तनाव बना हुआ था इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फैली जातीय टिप्पणियों ने भी माहौल को और अधिक भड़काने का काम किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और पहले का प्रदर्शन
इस घटना से पहले, 20 अप्रैल को समाजवादी पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें प्रमुख मांगें थीं:
1.दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
2.पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करना
3.पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजा देना
3️⃣ प्रशासन ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की।
तनाव कम करने के लिए पीड़ित परिवार की एक महिला सदस्य को वार्ता के लिए बुलाया गया।
लेकिन इसी दौरान अचानक माहौल बिगड़ गया।
ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया व दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। https://t.co/Vnrykqa4EJ pic.twitter.com/VBZ1aocIPb
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कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
ताजा पथराव की घटना ने जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
1.संवेदनशील क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधन क्यों नहीं था?
2.पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हिंसा कैसे भड़की?
3.क्या प्रशासन ने स्थिति का सही आकलन नहीं किया?
आगे की स्थिति
फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है अतिरिक्त बल तैनात संदिग्धों की पहचान की जा रही है वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई की संभावना कटरिया गांव की यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सामाजिक तनाव, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक चुनौतियों का मिश्रण बन चुकी है। गाजीपुर में शांति बहाली के लिए प्रशासन को न केवल सख्त कदम उठाने होंगे, बल्कि भरोसा बहाल करने की दिशा में भी काम करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।














