ग्रेटर नोएडा में विकास परियोजनाओं और सड़क चौड़ीकरण कार्यों के बीच सुरक्षा मानकों को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हुआ है। गौर चौक से एक मूर्ति चौक के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान ATS राउंडअबाउट के पास सड़क के बीचों-बीच लंबे समय तक खड़ा रहा बिजली का पोल हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बना हुआ था। यह पूरा मामला अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
यह मार्ग ग्रेटर नोएडा के व्यस्ततम ट्रैफिक कॉरिडोर में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों वाहन चालक, स्कूली वाहन, कैब, सार्वजनिक परिवहन और दोपहिया वाहन चालक आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क के बीचों-बीच स्थायी अवरोध बने रहना किसी बड़े सड़क हादसे की आशंका को लगातार बढ़ा रहा था।
राहत की बात यह रही कि स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार शिकायतें उठाए जाने और सामाजिक स्तर पर मुद्दे को प्रमुखता से सामने लाने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने संज्ञान लिया और संबंधित पोल को हटाने की कार्रवाई की गई। लेकिन इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सड़क चौड़ीकरण जैसी करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन किया जा रहा है?
विकास कार्यों के बीच सुरक्षा व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण?
सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं का उद्देश्य यातायात को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाना होता है। लेकिन यदि निर्माण कार्यों के दौरान सड़क के बीच बिजली का पोल, निर्माण सामग्री, अवरोधक ढांचे या अन्य जोखिम मौजूद रहें, तो वही परियोजना नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क परियोजना के दौरान निम्न व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए—
नियमित सुरक्षा ऑडिट
निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी
संभावित खतरों की समय रहते पहचान
सड़क सुरक्षा संकेतक और बैरिकेडिंग
जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करना
नागरिकों के दबाव के बाद हरकत में आया प्रशासन
स्थानीय नागरिकों और गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने इस मुद्दे को लगातार सोशल मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर उठाया। जनदबाव बढ़ने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए सड़क के बीच खड़े बिजली के पोल को हटाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो यह स्थिति कभी भी गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बन सकती थी।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही उठ रहा है कि सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान सुरक्षा निरीक्षण कौन कर रहा था? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी? यदि परियोजना स्थल पर सुरक्षा ऑडिट समय पर हुए होते, तो क्या ऐसी स्थिति बनती?
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में केवल निर्माण गति नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग
पोल हटने के बाद लोगों ने राहत जरूर व्यक्त की है, लेकिन साथ ही मांग भी उठ रही है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भविष्य में सभी विकास परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।
लोगों का कहना है कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसके केंद्र में आम नागरिकों की सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता बने।
यह मामला केवल सड़क के बीच खड़े एक पोल का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा भी है, जिसमें विकास और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।














