Thursday, September 3, 2026
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गगनचुंबी इमारतों के नीचे दबा किसानों का दर्द, विकास के असली शिल्पकार आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरसे

“सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने विधायक पंकज सिंह से लगाई गुहार, कहा—किसानों के हक और गांवों की बदहाली का हो स्थायी समाधान”

नोएडा, 3 सितंबर 2026। नोएडा को देश के सबसे आधुनिक और तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है। ऊंची-ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, आधुनिक सुविधाएं और चमकता हुआ शहरी ढांचा इसकी पहचान बन चुके हैं। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच नोएडा के उन गांवों की तस्वीर एक अलग कहानी बयां करती है, जिनकी जमीन पर इस आधुनिक शहर की नींव रखी गई। स्थानीय किसानों के त्याग और भूमि के बल पर खड़े हुए नोएडा के विकास के बावजूद ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान आज भी सीवर, जलभराव, पेयजल, बिजली और अपने भूमि संबंधी अधिकारों जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने ग्रामीण नोएडा की इस स्थिति पर चिंता जताते हुए नोएडा विधानसभा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह से किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने विधायक से शासन और नोएडा प्राधिकरण के उच्च स्तर पर किसानों की लंबित मांगों को मजबूती से उठाकर उनका स्थायी समाधान कराने की अपील की है।

एक तरफ चमकता शहर, दूसरी तरफ बदहाल गांव

दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा के विकास की तस्वीर बेहद आकर्षक है, लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू गांवों में दिखाई देता है। एक तरफ गगनचुंबी इमारतें रात के अंधेरे में रोशनी से जगमगाती हैं, वहीं दूसरी तरफ कई गांवों में सीवर और नालियों की समस्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

गांवों की गलियों में उफनता सीवर, ओवरफ्लो होती नालियां और गंदे पानी से जलमग्न रास्ते ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को कठिन बना रहे हैं। स्थानीय निवासियों को अपने घरों से निकलने से लेकर आवागमन तक में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जिस नोएडा को हाइटेक शहर के रूप में विकसित किया गया, उसी शहर के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार स्वच्छ पेयजल और निर्बाध बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कृष्णात्रेय ने सवाल उठाया कि जब नोएडा अत्याधुनिक शहर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, तब उसकी सीमा में आने वाले गांवों को बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए वर्षों तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।

किसानों के मुआवजे पर उठाए सवाल

किसानों की समस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का बताया गया है। दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा प्राधिकरण की मुआवजा नीति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दावा किया कि वर्तमान में भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को लगभग 5,325 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जा रहा है।

उनके अनुसार यह राशि किसानों के साथ न्याय नहीं करती और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के गांवों के किसानों को नियमसंगत रूप से सर्किल रेट का कम से कम दोगुना मुआवजा मिलना चाहिए।

उन्होंने प्राधिकरण की जमीनों की ई-ऑक्शन प्रक्रिया का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि एक ओर अधिग्रहित जमीनों को प्राधिकरण ई-ऑक्शन के माध्यम से ऊंची दरों पर बेचकर भारी राजस्व अर्जित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिन किसानों से यह जमीन ली गई, उन्हें उनके अनुसार न्यायसंगत आर्थिक अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।

“जमीन किसानों की, मुनाफा किसी और का?”

किसानों की स्थिति को लेकर कृष्णात्रेय ने व्यवस्था से सीधा सवाल खड़ा किया है। उनका तर्क है कि नोएडा के विस्तार और विकास में सबसे बड़ी कीमत स्थानीय किसानों ने चुकाई है। जमीन जाने के बाद शहर तो विकसित हो गया, लेकिन किसानों और ग्रामीण परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया।

उनका कहना है कि किसानों को केवल मुआवजे की राशि तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। विकास की प्रक्रिया में उनके पुनर्वास, आबादी संबंधी अधिकार, जमीन की बैकलीज और गांवों की नागरिक सुविधाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

सालों से फ्रीज सर्किल रेट ने बढ़ाई परेशानी

कृष्णात्रेय ने गांवों में लंबे समय से सर्किल रेट फ्रीज रहने का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार सर्किल रेट में वर्षों से अपेक्षित बदलाव नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, वहां किसानों की जमीन के मूल्यांकन के लिए पुराने सर्किल रेट को आधार बनाए रखना न्यायसंगत नहीं है। जमीन और संपत्ति की बाजार कीमतों में बदलाव के अनुरूप सर्किल रेट में भी समय-समय पर संशोधन होना चाहिए, ताकि किसानों को उनकी भूमि का उचित मूल्य मिल सके।

450 से 1,000 मीटर बैकलीज का मामला भी लंबित

किसानों की लंबित मांगों में जमीन की बैकलीज का दायरा 450 मीटर से बढ़ाकर 1,000 मीटर किए जाने का मामला भी शामिल है। दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार यह मांग लंबे समय से शासन और प्रशासन के समक्ष लंबित है।

उनका कहना है कि ग्रामीण आबादी के भूमि संबंधी मामलों को स्पष्ट और व्यावहारिक तरीके से हल करने के लिए बैकलीज की सीमा का विस्तार जरूरी है। वर्षों से लंबित रहने वाले ऐसे मामलों के कारण ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है और उन्हें अपनी ही जमीन से जुड़े अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

5 प्रतिशत आबादी प्लॉट का इंतजार कब होगा खत्म?

किसानों की एक अन्य प्रमुख मांग 5 प्रतिशत आबादी प्लॉटों के शीघ्र आवंटन की है। कृष्णात्रेय ने कहा कि किसानों को उनके हक के आबादी प्लॉट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

उनके अनुसार किसानों के लिए यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य और अधिकार से जुड़ा विषय है। इसलिए लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की जरूरत है।

विधायक पंकज सिंह से निर्णायक हस्तक्षेप की उम्मीद

दिव्य कृष्णात्रेय ने क्षेत्रीय विधायक पंकज सिंह के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वे किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को शासन तथा प्राधिकरण के शीर्ष स्तर पर मजबूती से उठाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायक के हस्तक्षेप से लंबे समय से लंबित मामलों में सकारात्मक पहल हो सकती है।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी ठोस नीति और समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए, जिससे ग्रामीणों को वास्तविक राहत मिल सके।

“नोएडा का विकास गांवों को साथ लेकर ही पूरा होगा”

कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा का विकास तभी वास्तविक और समावेशी माना जाएगा, जब शहर की चमक के साथ उसके गांवों की तस्वीर भी बदले। विकास का अर्थ केवल ऊंची इमारतें, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सेक्टर नहीं हैं। विकास तब पूर्ण माना जाएगा, जब शहर की आधारशिला रखने वाले किसान और ग्रामीण भी सम्मानजनक जीवन जी सकें।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनका वाजिब हक, उचित मुआवजा, आबादी प्लॉट, बेहतर नागरिक सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सीवर और जलनिकासी जैसी सुविधाएं मिलना जरूरी है। जिन किसानों की जमीन पर नोएडा का आधुनिक शहर खड़ा हुआ है, उनके गांवों को विकास की मुख्यधारा से बाहर रखना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

विकास की चमक और गांवों की हकीकत के बीच बढ़ता अंतर

नोएडा की पहचान आज देश-दुनिया में आधुनिक शहर के रूप में है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं इस विकास मॉडल के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने शहर के विस्तार के लिए अपनी जमीन दी, लेकिन बदले में उन्हें अपने ही क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ऐसे में अब निगाहें शासन, नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर हैं कि किसानों की वर्षों पुरानी मांगों को सिर्फ फाइलों में लंबित रखने के बजाय उन पर ठोस निर्णय कब लिया जाता है।

नोएडा की विकास यात्रा में किसानों के योगदान को देखते हुए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या आधुनिक शहर की सफलता का लाभ उसकी नींव रखने वाले किसानों तक भी पहुंचेगा? ग्रामीण नोएडा की बदहाली और किसानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान इस बात की परीक्षा भी है कि नोएडा का विकास वास्तव में कितना समावेशी और सर्वांगीण है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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