Sunday, September 6, 2026
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108 उपकेंद्र, महज 2अधिशासी अभियंता और उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानी: नोएडा की ‘वर्टिकल व्यवस्था’ में उलझा बिजली तंत्र

“हाइटेक शहर में जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर केंद्रीकृत शिकायत व्यवस्था तक बढ़ी मुश्किलें, बिल-मीटर और नए कनेक्शन के लिए भटक रहे उपभोक्ता”

नोएडा। उत्तर प्रदेश को बड़े पैमाने पर राजस्व देने वाले और देश-विदेश की कंपनियों के निवेश का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले हाइटेक शहर नोएडा में बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिजली कटौती, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, ट्रिपिंग, जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर और खराब केबल को बदलने में होने वाली देरी से उपभोक्ता परेशान हैं। दूसरी ओर, बिजली विभाग की नई ‘वर्टिकल व्यवस्था’ ने शिकायतों के समाधान को स्थानीय स्तर से हटाकर अलग-अलग केंद्रीकृत कार्यालयों तक सीमित कर दिया है। नतीजा यह है कि बिजली से जुड़ी छोटी से छोटी समस्या के समाधान के लिए भी शहरवासियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 नोएडा के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने बिजली व्यवस्था की इस स्थिति पर कड़ा आक्रोश जताते हुए शासन और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जब नोएडा को हाइटेक सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, तब बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर और शिकायत निस्तारण व्यवस्था भी उसी स्तर की होनी चाहिए।

बीस साल पुरानी व्यवस्था पर टिका हाइटेक नोएडा का बिजली ढांचा

नोएडा में बिजली आपूर्ति को लेकर सबसे बड़ी चिंता मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है। आरोप है कि शहर में बिजली व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आज भी पुरानी कार्यप्रणाली और पुराने ढांचे पर निर्भर है। तेज वोल्टेज उतार-चढ़ाव, बार-बार ट्रिपिंग और अनिश्चित बिजली आपूर्ति ने घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ दुकानदारों, कारोबारियों और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

शहर के कई हिस्सों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने के बाद उपभोक्ताओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। यदि कहीं केबल क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे बदलने में भी अपेक्षाकृत अधिक समय लगने की शिकायत सामने आई है। इसका एक प्रमुख कारण आवश्यक संसाधनों और पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की कमी को बताया जा रहा है।

बिजली की अनिश्चितता का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। लगातार फ्लक्चुएशन और ट्रिपिंग से विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है, जबकि व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों के कामकाज पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।

नई ‘वर्टिकल व्यवस्था’ ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की भागदौड़

बिजली विभाग की नई ‘वर्टिकल व्यवस्था’ को लेकर सबसे अधिक नाराजगी शिकायतों के निस्तारण के तरीके को लेकर है। पहले उपभोक्ता अपने नजदीकी विद्युत उपकेंद्र पर जाकर स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर अपनी समस्या का समाधान करा सकते थे। स्थानीय व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और उपभोक्ता के लिए सुविधाजनक माना जाता था।

नई व्यवस्था में अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ने का दावा किया जा रहा है। बिजली बिल से संबंधित शिकायत के लिए शहरवासियों को सेक्टर-18 स्थित डीएलएफ मॉल के पास बने बिजलीघर जाना पड़ता है।

मीटर से संबंधित शिकायतों के लिए सेक्टर-18 में पीएनबी बैंक के ऊपर कार्यालय बनाया गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में कार्यालय होने के कारण वाहन खड़ा करने से लेकर कार्यालय तक पहुंचने में परेशानी होती है। वृद्ध और बुजुर्ग उपभोक्ताओं के लिए कार्यालय तक पहुंचना और ऊपर जाना और भी मुश्किल बताया गया है।

वहीं नए विद्युत कनेक्शन से संबंधित समस्याओं के लिए उपभोक्ताओं को सेक्टर-16 स्थित कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यानी एक ही शहर में बिजली से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं के लिए उपभोक्ता को अलग-अलग कार्यालयों तक जाना पड़ रहा है।

108 विद्युत उपकेंद्रों की जिम्मेदारी महज दो एक्सएन पर

व्यवस्था में मैनपावर के असंतुलन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूरे नोएडा शहर में लगभग 108 विद्युत उपकेंद्र हैं, लेकिन इनकी जिम्मेदारी महज दो अधिशासी अभियंताओं (एक्सएन) पर डाल दी गई है।

इतने बड़े शहरी क्षेत्र में यदि एक साथ कई स्थानों पर तकनीकी फॉल्ट आ जाए, केबल क्षतिग्रस्त हो जाए या बिजली आपूर्ति में गंभीर समस्या पैदा हो जाए तो सीमित अधिकारियों, कर्मचारियों और संसाधनों के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि एक साथ चार अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी खराबी उत्पन्न हो जाए तो उपलब्ध संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसका सीधा असर शिकायतों के निस्तारण की गति और बिजली आपूर्ति बहाल करने में लगने वाले समय पर पड़ता है।

स्थानीय व्यवस्था हटने से बढ़ी दूरी

पुरानी स्थानीय व्यवस्था में उपभोक्ता अपने क्षेत्र के नजदीकी विद्युत स्टेशन पर जाकर समस्या दर्ज करा सकते थे। स्थानीय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था से परिचित होने के कारण शिकायतों पर अपेक्षाकृत तेजी से कार्रवाई कर सकते थे। लेकिन नई व्यवस्था में शिकायतों के केंद्रीकरण से उपभोक्ता और समस्या के समाधान के बीच दूरी बढ़ गई है।

यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी व्यवस्था किसके हित में बनाई गई है—विभाग की सुविधा के लिए या आम जनता की सुविधा के लिए?

नए कनेक्शन पर ‘अफोर्डेबल चार्ज’ को लेकर भी नाराजगी

बिजली व्यवस्था से जुड़ी परेशानी के बीच नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं पर लगाए जा रहे कथित ‘अफोर्डेबल चार्ज’ को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस प्रकार के भारी और अनपेक्षित शुल्क को अनुचित बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है।

उनका तर्क है कि जब उपभोक्ता को पहले से ही अस्थिर बिजली आपूर्ति, वोल्टेज फ्लक्चुएशन और ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तब नए कनेक्शन के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।

राजस्व देने वाले शहर में सुविधाओं का संकट, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल

नोएडा की बिजली व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चर्चा में है। प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि लाखों नागरिकों और व्यापारियों को प्रभावित करने वाली बिजली संबंधी समस्याओं के बावजूद जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा है।

नोएडा को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में आवासीय क्षेत्र, बाजार, उद्योग, आईटी कंपनियां और बहुराष्ट्रीय संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति में अस्थिरता और शिकायतों के समाधान में देरी केवल घरेलू उपभोक्ता की परेशानी नहीं, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी चुनौती बन सकती है।

‘हर घर बिजली’ का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब व्यवस्था उपभोक्ता के करीब हो

आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि ‘हर घर बिजली’ का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब बिजली व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, पर्याप्त संसाधनों और उपभोक्ता केंद्रित मॉडल के साथ संचालित किया जाए। उनके अनुसार, मौजूदा दौर में दशकों पुरानी कार्यप्रणाली पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि बिजली बिल, मीटर सुधार और नए कनेक्शन से संबंधित शिकायतों का समाधान उपभोक्ताओं के नजदीकी विद्युत स्टेशनों पर ही उपलब्ध कराया जाए। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिल सकेगी।

उन्होंने यह भी मांग की कि शहर के विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाए, पर्याप्त मैनपावर और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तथा केबल फॉल्ट जैसी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

नोएडा जैसे हाइटेक शहर में बिजली केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि पूरी आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में सवाल अब सिर्फ बिजली आने-जाने का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो उपभोक्ता को राहत देने के बजाय उसे शिकायत लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकने को मजबूर कर रही है।

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VIKAS TRIPATHI
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