Sunday, September 6, 2026
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पहला ग्रीन एक्सप्रेसवे, जो स्मार्ट लाइटिंग से होगा रोशन

“18 किमी के एक्सप्रेसवे पर 1,200 नई लाइटें, 76,366 एलईडी और 1,000 अतिरिक्त स्मार्ट पैनल लगेंगे; 2.4 मेगावाट का BESS और तीन घंटे का बैकअप भी”

नोएडा: नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे अब सिर्फ तेज रफ्तार सफर का मार्ग नहीं रहेगा, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा से लैस ग्रीन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में टाटा प्रोजेक्ट्स को परियोजना के लिए 30 महीने का अतिरिक्त समय देने को मंजूरी दी गई है। परियोजना पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे की स्मार्ट लाइटिंग व्यवस्था और मजबूत होगी तथा बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटों को रिमोट सिस्टम से नियंत्रित किया जा सकेगा।

18 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे स्मार्ट रोशनी से होगा जगमग

परियोजना के तहत करीब 18 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर 1,200 नई लाइटें लगाई जाएंगी। इन लाइटों के माध्यम से रात के समय पूरे मार्ग पर बेहतर और मानक के अनुरूप रोशनी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

लाइटिंग व्यवस्था में न्यूनतम 40 लक्स और औसतन 55 लक्स रोशनी का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए एनएचएआई और अंतरराष्ट्रीय मानकों को आधार बनाया जाएगा। इससे एक्सप्रेसवे पर रात के समय प्रकाश की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अधिक लाइटें लगाना नहीं, बल्कि पूरी स्ट्रीट लाइटिंग को स्मार्ट और तकनीक आधारित बनाना है।

76,366 एलईडी और 1,000 अतिरिक्त स्मार्ट पैनल

ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत 76,366 एलईडी लाइटों की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ करीब 1,000 अतिरिक्त स्मार्ट पैनल लगाए जाएंगे।

इन स्मार्ट पैनलों के माध्यम से एक्सप्रेसवे की लाइटिंग व्यवस्था को आधुनिक नियंत्रण प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि शेष स्ट्रीट लाइटों को भी रिमोट के माध्यम से स्विच ऑन और ऑफ किया जा सकेगा।

इससे लाइटिंग व्यवस्था को एक केंद्रीकृत सिस्टम के जरिए नियंत्रित करने में आसानी होगी। जरूरत के अनुसार लाइटों का संचालन किया जा सकेगा और पूरे एक्सप्रेसवे की रोशनी को अधिक व्यवस्थित तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा।

अब बिजली गई तो भी तीन घंटे तक रोशन रहेगा एक्सप्रेसवे

ग्रीन एक्सप्रेसवे की योजना में ऊर्जा बैकअप पर भी खास जोर दिया गया है। इसके तहत 2.4 मेगावाट क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाया जाएगा।

इस सिस्टम में करीब तीन घंटे का बैकअप उपलब्ध कराने की क्षमता होगी। यानी बिजली आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आने की स्थिति में भी एक्सप्रेसवे की लाइटिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभावित होने से बचाने में मदद मिलेगी।

यह व्यवस्था एक्सप्रेसवे को लगातार रोशन रखने के साथ-साथ ऊर्जा प्रबंधन को भी अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ग्रीन एक्सप्रेसवे में ई-बस और चार्जिंग स्टेशन भी

परियोजना में केवल स्मार्ट लाइटिंग और ऊर्जा भंडारण ही शामिल नहीं है। इसके तहत 5 ई-बसें और 10 चार्जर भी प्रस्तावित हैं।

इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर एक्सप्रेसवे परियोजना को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से भी जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।

स्मार्ट लाइटिंग, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक बसों को एक ही परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित करने से एक्सप्रेसवे का स्वरूप पारंपरिक सड़क से अलग होगा।

रिमोट कंट्रोल से होगा लाइटिंग सिस्टम का संचालन

परियोजना की खासियत यह है कि एक्सप्रेसवे पर लगी स्ट्रीट लाइटों को केवल स्थानीय स्तर पर संचालित करने के बजाय दूर से नियंत्रित करने की सुविधा विकसित की जाएगी।

रिमोट सिस्टम के जरिए लाइटों को आवश्यकता के अनुसार ऑन या ऑफ किया जा सकेगा। इससे संचालन और निगरानी में आसानी होगी। साथ ही बड़ी संख्या में लगी लाइटों को एक साथ नियंत्रित करने की क्षमता भी विकसित होगी।

स्मार्ट पैनल और रिमोट कंट्रोल तकनीक के इस्तेमाल से एक्सप्रेसवे की स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

सड़क से आगे बढ़कर ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में कदम

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में इस मार्ग को स्मार्ट और ग्रीन तकनीक से जोड़ने का असर केवल प्रकाश व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा।

परियोजना में ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट लाइटिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को एक साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है जिसमें तकनीक के इस्तेमाल से संचालन अधिक प्रभावी हो और ऊर्जा के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सके।

30 महीने के विस्तार से परियोजना को मिलेगी रफ्तार

नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में टाटा प्रोजेक्ट्स को परियोजना के लिए 30 महीने का अतिरिक्त समय दिए जाने को मंजूरी दी गई है। अब इस अतिरिक्त समय में परियोजना से जुड़े बाकी कामों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस विस्तार के साथ स्मार्ट पैनल, नई एलईडी लाइटें, ऊर्जा भंडारण प्रणाली और ई-बस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी व्यवस्थाओं को परियोजना के व्यापक स्वरूप में शामिल किया जाएगा।

नोएडा के एक्सप्रेसवे को मिलेगा नई पीढ़ी का स्वरूप

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को ग्रीन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित करने की यह योजना सड़क, ऊर्जा और तकनीक को एक साथ जोड़ती है। 18 किलोमीटर के मार्ग पर 1,200 नई लाइटें, 76,366 एलईडी, 1,000 अतिरिक्त स्मार्ट पैनल, 2.4 मेगावाट BESS, तीन घंटे का बैकअप, 5 ई-बसें और 10 चार्जर इस परियोजना के प्रमुख हिस्से होंगे।

सबसे अहम बात यह है कि एक्सप्रेसवे की रोशनी अब सिर्फ बिजली से नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीक और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था से संचालित होने की दिशा में बढ़ेगी।

यदि योजना निर्धारित रूप में लागू होती है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को देश के आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल एक्सप्रेसवे मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है।

यानी अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे सिर्फ दौड़ेगा नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीक और हरित ऊर्जा के साथ रात में जगमगाएगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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