ग़ाज़ीपुर। बिरनो क्षेत्र के भड़सर में अतिप्राचीन रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के तेरहवें दिन रविवार को भरत मिलाप और प्रभु श्रीराम की ताजपोशी का भव्य मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने और भरत से मिलन का भावुक प्रसंग देखकर रामलीला देखने पहुंचे सैकड़ों दर्शक भावविभोर हो उठे।
मंचन के दौरान दिखाया गया कि वनवास की अवधि पूरी होने के बाद प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की सूचना मिलते ही भरत भावुक हो उठते हैं। उन्हें आशंका होती है कि यदि श्रीराम अयोध्या नहीं लौटे तो उनके जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। वहीं, हनुमान जी पूरे नगर में प्रभु श्रीराम के आगमन की सूचना देते हैं, जिसके बाद अयोध्या में उत्सव का माहौल बन जाता है।
इसके बाद प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, विभीषण और सुग्रीव के साथ अयोध्या पहुंचते हैं। अपने बड़े भाई श्रीराम को देखते ही भरत दौड़कर उनके चरणों में गिर पड़ते हैं। श्रीराम उन्हें उठाकर गले लगा लेते हैं। भरत राजगद्दी की ओर इशारा करते हुए बताते हैं कि उन्होंने 14 वर्षों तक श्रीराम की चरण पादुका को सिंहासन पर रखकर उनके लौटने की प्रतीक्षा की। भाइयों के इस मिलन का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
भरत मिलाप के बाद प्रभु श्रीराम का अयोध्या के राजा के रूप में राज्याभिषेक किया गया। ताजपोशी के दौरान पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन पर समिति अध्यक्ष प्रदीप सिंह एवं समिति के पदाधिकारियों ने स्थानीय कलाकारों को अंगवस्त्र, मिष्ठान और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर वीरेंद्र सिंह, ग्राम पंचायत प्रशासक विनोद गुप्ता, विपिन चौरसिया, कृष्णानंद यादव, श्याम सुंदर राजभर, अरविंद पटेल, विनोद खरवार, सुरेश सिंह, कमला पाल और अनिल पटेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।















