“बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य, कमजोर पिलर और स्ट्रक्चर पर उठे सवाल; कई घायल अस्पताल पहुंचाए गए, NDRF-फायर ब्रिगेड की टीमें रेस्क्यू में जुटीं”
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब छात्रों के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरी इमारत कुछ ही क्षणों में मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है।
मलबे में बड़ी संख्या में छात्रों और अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के मुताबिक 30 से 50 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अब तक मलबे में फंसे लोगों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कुछ लोगों के मलबे के अंदर से फोन करने की बात भी सामने आई है, जिससे रेस्क्यू टीमों की चिंता और बढ़ गई है।
दोपहर करीब 1:30 बजे मिली थी इमारत गिरने की सूचना
दिल्ली फायर सर्विस को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके कुछ ही मिनट बाद साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को करीब 1:34 बजे PCR कॉल प्राप्त हुई, जिसमें नानकपुरा गुरुद्वारे के पास इमारत गिरने की जानकारी दी गई।
फायर ब्रिगेड, दिल्ली पुलिस, CAT एंबुलेंस, NDRF और अन्य आपातकालीन एजेंसियों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। शुरुआत में आठ फायर टेंडर भेजे गए और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया।
‘हॉस्टल डेज’ नाम से चलता था छात्रों का PG
मलबे में तब्दील हुई इमारत को स्थानीय स्तर पर ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था और इसमें छात्रों के लिए PG की व्यवस्था थी। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण छात्रों के निजी हॉस्टल और PG का बड़ा केंद्र है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। कुछ रिपोर्टों में PG की क्षमता करीब 75 बेड तक बताई गई है, जबकि अन्य स्थानीय जानकारियों में कमरों और रहने वालों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। इसलिए अंतिम संख्या प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बेसमेंट में चल रहा था काम, क्या कमजोर हुआ बिल्डिंग का आधार?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बहुमंजिला इमारत अचानक कैसे ढह गई?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बेसमेंट में निर्माण/मरम्मत का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि नीचे के हिस्से में काम के दौरान पिलर और नींव के आसपास बदलाव किए जा रहे थे। कुछ लोगों का कहना है कि ऊपरी हिस्से को मजबूत किया गया था, लेकिन निचले हिस्से के पिलर कमजोर हो गए थे।
हालांकि, इमारत गिरने का अंतिम कारण अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। कुछ रिपोर्टों में बेसमेंट का काम, पानी जमा होना और कमजोर नींव जैसे संभावित कारणों पर सवाल उठाए गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया—‘ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो’
हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि बिल्डिंग गिरने से पहले जोरदार आवाज सुनाई दी। इसके बाद कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया।
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें लगा जैसे अचानक भूकंप आ गया हो। स्थानीय लोग भी पुलिस और राहत टीमों के पहुंचने से पहले मलबा हटाने की कोशिश में जुट गए थे।
मलबे के भीतर से लोगों के मदद के लिए पुकारने और फोन करने की खबरों ने बचाव अभियान को और संवेदनशील बना दिया है।
एक साल पहले खाली कराई गई थी बिल्डिंग? जांच के घेरे में पुराना रिकॉर्ड
हादसे के बाद बिल्डिंग की पुरानी स्थिति और प्रशासनिक रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार करीब एक साल पहले इमारत को खाली करवाया गया था। इसके अलावा हादसे से कुछ समय पहले नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई है।
यदि ये दावे रिकॉर्ड से पुष्ट होते हैं, तो जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि कथित तौर पर असुरक्षित या खाली कराई गई इमारत में दोबारा PG कैसे संचालित हुआ और उसमें निर्माण कार्य की अनुमति किस आधार पर दी गई।
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मालिक के खिलाफ FIR, PG संचालन पर भी उठे सवाल
पुलिस ने बिल्डिंग/PG के मालिक से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्टों में आनंद बंसल का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह गुरुग्राम में रहता है और उसके अन्य PG भी संचालित होते हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत का वास्तविक स्वामित्व, PG संचालन, निर्माण कार्य और बिल्डिंग की सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं।
मालिक की भूमिका और कथित लापरवाही को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच जारी है; दोष तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।
सिर्फ एक रास्ता, पतली गलियां और सुरक्षा पर गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक PG में कमरे संकरी गलियों और सीमित निकास वाले हिस्सों में बने थे। ऐसे में आग लगने या इमारत गिरने जैसी आपदा की स्थिति में बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से अब केवल इस एक इमारत की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सत्य निकेतन और दिल्ली के दूसरे छात्र-बहुल इलाकों में चल रहे PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, आसपास की इमारतों पर भी नजर
बचाव अभियान के दौरान मलबे को सावधानी से हटाया जा रहा है ताकि उसके नीचे दबे लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके। NDRF समेत कई एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं। आसपास की इमारतों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरती जा रही हैं और लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की गई है।
LIVE STATUS | 6 सितंबर 2026, शाम तक
- स्थान: सत्य निकेतन, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली
- हादसा: बहुमंजिला PG/हॉस्टल की इमारत ढही
- मौत: कम से कम 2 लोगों की मौत की रिपोर्ट
- घायल: कई लोग घायल, कुछ की हालत गंभीर
- रेस्क्यू: अलग-अलग चरणों में कई लोगों को मलबे से निकाला गया; आंकड़ों में स्रोतों के बीच अंतर
- लापता/फंसे: सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं
- आशंका: स्थानीय/मीडिया रिपोर्टों में 30-50 लोगों तक के फंसे होने की आशंका
- बचाव एजेंसियां: दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, NDRF, CAT एंबुलेंस समेत अन्य टीमें
- संभावित कारण: बेसमेंट में निर्माण/मरम्मत कार्य और स्ट्रक्चरल कमजोरी की जांच
- कानूनी कार्रवाई: संबंधित मालिक/जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और जांच
- रेस्क्यू ऑपरेशन: अभी जारी
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर इमारत पहले से कमजोर थी, तो उसमें छात्रों के रहने के लिए PG कैसे चलता रहा और बेसमेंट में निर्माण कार्य की अनुमति किसने दी?
इस हादसे ने दिल्ली के उन सैकड़ों PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां हर दिन हजारों छात्र रहते हैं। अब जरूरत केवल दोषी तलाशने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि अगली बार किसी ‘हॉस्टल डेज’ की इमारत मलबे में बदलने से पहले खतरे की पहचान हो और उसमें रहने वाले लोगों की जान बचाई जा सके।














