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उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश: करियर की ऊंचाइयों से कानूनी संकट तक

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा से जुड़े चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश इन दिनों गंभीर कानूनी संकट में घिरे हुए हैं। कभी तेज़-तर्रार, प्रतिभाशाली और प्रभावशाली अफसर के रूप में पहचाने जाने वाले अभिषेक प्रकाश अब भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में विशेष जांच टीम (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के केंद्र में हैं। हाल ही में दाखिल की गई 1600 पन्नों की चार्जशीट ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

SIT की चार्जशीट: आरोपों की विस्तृत परतें

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने अदालत में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों में आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला निवेश से जुड़े एक बड़े प्रोजेक्ट से संबंधित है, जिसमें कथित तौर पर सरकारी मंजूरी और सब्सिडी दिलाने के बदले कमीशन की मांग की गई।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि इस पूरे कथित लेन-देन में एक बिचौलिए (निकांत जैन) की भूमिका सामने आई है, जिसके जरिए कथित रूप से 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। SIT का दावा है कि उसके पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज़ी साक्ष्य, बयान और लेन-देन से संबंधित जानकारियां मौजूद हैं।

ED की जांच ने बढ़ाई मुश्किलें

SIT के समानांतर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रहा है। ED की पड़ताल में कथित रूप से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो मामला केवल सेवा नियमों तक सीमित न रहकर आपराधिक सजा तक भी जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के विवेक पर ही निर्भर करेगा।

कौन हैं IAS अभिषेक प्रकाश?

अभिषेक प्रकाश का प्रशासनिक सफर किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं रहा है।

जन्म: 21 दिसंबर 1982, सिवान जिला, बिहार

शिक्षा: IIT रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक

UPSC रैंक: ऑल इंडिया 8वीं रैंक (2005)

सेवा में प्रवेश: 2006 बैच IAS, नागालैंड कैडर

शुरुआती वर्षों में उनकी छवि एक काबिल, ईमानदार और आधुनिक सोच वाले अफसर की रही। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और नीति-निर्माण से लेकर निवेश प्रोत्साहन तक में सक्रिय भूमिका निभाई।

निजी जीवन का विवाद और प्रशासनिक असर

अभिषेक प्रकाश की निजी ज़िंदगी भी लंबे समय तक चर्चा में रही। उनकी शादी 2009 बैच की IAS अधिकारी अदिति सिंह से हुई। दोनों की मुलाकात सेवा के दौरान हुई थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही रिश्तों में दरार आ गई। यह विवाद इतना बढ़ा कि मामला शासन और अदालत तक पहुंचा।

पत्नी द्वारा शिकायत

मूल कैडर (नागालैंड) वापसी की मांग

यूपी कैडर में स्थायी विलय को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई

आखिरकार दोनों का तलाक हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अभिषेक प्रकाश की प्रशासनिक साख पर असर डाला।

‘इन्वेस्ट यूपी’ कार्यकाल बना टर्निंग पॉइंट

अभिषेक प्रकाश के करियर में सबसे विवादास्पद दौर ‘इन्वेस्ट यूपी’ में उनके कार्यकाल को माना जा रहा है। आरोप है कि एक बड़ी सोलर कंपनी SAEL Solar के प्रोजेक्ट को मंजूरी और सरकारी लाभ दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की गई। यही मामला उनके खिलाफ मौजूदा जांच और चार्जशीट की बुनियाद बना।

आगे क्या?

फिलहाल अभिषेक प्रकाश निलंबित हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है। कानूनी प्रक्रिया के तहत:

अभियोजन पक्ष सबूत पेश करेगा

बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा

अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा

यह मामला न केवल एक अधिकारी के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि प्रशासनिक पारदर्शिता, निवेश नीति और अफसरशाही की जवाबदेही को कैसे और मजबूत किया जाए।

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VIKAS TRIPATHI
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