अखिलेश यादव ने लखनऊ में सीएम योगी की ‘जनाक्रोश पदयात्रा’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख ने इस पदयात्रा को “प्रैक्टिस” बताते हुए कहा कि आने वाले समय में बीजेपी को विपक्ष में बैठकर इसी तरह सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
‘भीषण गर्मी में बिना काला चश्मा—ये अभ्यास था’
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि इतनी भीषण गर्मी में पदयात्रा निकाली गई, लेकिन किसी ने काला चश्मा तक नहीं लगाया। उन्होंने कहा, “ये पदयात्रा असल में प्रैक्टिस थी—बीजेपी को विपक्ष में जाकर ऐसे ही पदयात्राएं करनी पड़ेंगी।”
महिला आरक्षण पर BJP पर आरोप
सपा प्रमुख ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए कहा:
“हम सभी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं”
“अगर कोई इसे रोकना चाहता है, तो वो बीजेपी है”
“बीजेपी अपने ही बनाए कानून पर संघर्ष कर रही है”
उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की “बदनीयत की हार” है और सामाजिक न्याय के लिए पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की सरकार जरूरी है।
‘पीडीए करेगा सत्ता परिवर्तन’
अखिलेश यादव ने दावा किया कि इतिहास में पहली बार पीडीए एकजुट होकर सरकार को हराने जा रहा है। उन्होंने हालिया चुनावी नतीजों को “लोकतंत्र की जीत” बताते हुए जनता और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों का धन्यवाद किया।
‘चाय पिलाने वाले की दुकान बंद’—लोकतंत्र पर सवाल
सपा प्रमुख ने एक और मुद्दा उठाते हुए कहा कि:
एक युवक ने उन्हें चाय पिलाई, जिसके बाद उसकी दुकान बंद करवा दी गई
उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि “उसकी क्या गलती थी?”
इस बयान के जरिए उन्होंने सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
‘संवैधानिक पदों का दुरुपयोग’
अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी पार्टी के प्रचार में लगे हैं और प्रोपेगेंडा चला रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है।
संसद में नया प्रस्ताव लाएगी सपा
वहीं धर्मेंद्र यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी संसद में एक निजी विधेयक लाएगी, जिसमें:
महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा
की मांग की जाएगी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि:
2023 में कानून पारित होने के बाद भी लागू करने में देरी क्यों हुई?
अगर 2011 जनगणना के आधार पर आरक्षण देना था, तो नया मसौदा क्यों लाया गया?
लखनऊ की ‘जनाक्रोश पदयात्रा’ अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक तरफ बीजेपी इसे महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बता रही है, तो दूसरी ओर सपा इसे राजनीतिक दिखावा और रणनीतिक अभ्यास करार दे रही है।
आने वाले समय में महिला आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा राजनीति में और तेज़ होने की संभावना है।














