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पाकिस्तान में दर्दनाक हादसा: स्कूल की छत गिरने से 21 बच्चों की मौत, एक शिक्षिका ने भी गंवाई जान

पेशावर में मलबे के नीचे दबे बच्चे, 25 से अधिक घायल होने की खबर; राहत-बचाव अभियान में जुटी सेना और प्रशासन

पेशावर, 15 अक्टूबर 2026। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां दिर कॉलोनी स्थित एक स्कूल की छत गिरने से 21 बच्चों की मौत हो गई। मृतक बच्चों की उम्र 13 वर्ष से कम बताई जा रही है। इस हादसे में एक शिक्षिका की भी जान चली गई, जबकि कम से कम 25 बच्चों के घायल होने की सूचना है।

हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छत गिरने से कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। बचावकर्मियों ने मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

मलबे में दबे बच्चों को निकालने में जुटे बचावकर्मी

प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल की छत अचानक गिर गई, जिससे वहां मौजूद बच्चों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद राहतकर्मियों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। मलबे में फंसे बच्चों को निकालने के लिए लगातार प्रयास किए गए। बचाव अभियान के दौरान कई बच्चों की मौत होने की सूचना सामने आई।

घायल बच्चों को पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है। हादसे में घायल बच्चों की स्थिति और मृतकों की पहचान से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

राहत अभियान में सेना की मदद

हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए सेना को भी बुलाया। सेना के जवानों और अन्य बचावकर्मियों ने मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम जारी है। आशंका को देखते हुए बचाव दल यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि मलबे के नीचे कोई और बच्चा न फंसा हो। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना है।

पुरानी इमारत को लेकर उठे सवाल

घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों के अनुसार, स्कूल की इमारत काफी पुरानी दिखाई दे रही थी। शुरुआती रिपोर्टों में स्कूल के मिट्टी और लकड़ी से बने होने की बात कही गई है। हालांकि, छत गिरने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

इस घटना ने स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और नियमित निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी इमारत की संरचना कमजोर हो, तो वह बच्चों और शिक्षकों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में स्कूल भवनों की समय-समय पर जांच और आवश्यक मरम्मत बेहद जरूरी है।

मासूमों की मौत से इलाके में शोक

इस हादसे में कम उम्र के बच्चों की मौत से स्थानीय समुदाय में शोक का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा था, उनके लिए यह घटना बेहद दुखद है। घायल बच्चों के परिजन अस्पतालों में उनकी सलामती की उम्मीद कर रहे हैं।

फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हादसे के कारणों, स्कूल भवन की स्थिति और संभावित लापरवाही की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

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