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INDIA ब्लॉक के लंच से पहले दिल्ली में बवाल: राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाने पर कश्मीरी युवक से मारपीट का आरोप

“फहीम नजीर ने लगाया कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पिटाई का आरोप, बोला—‘मैंने राहुल गांधी को गाली नहीं दी, फिर मुझे क्यों मारा?”

नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रस्तावित लंच से पहले उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे एक कश्मीरी युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई। युवक की पहचान श्रीनगर निवासी फहीम नजीर के रूप में बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए युवक को वहां से अलग किया।

घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सियासत में विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस जांच का विवरण सामने आना अभी बाकी है।

राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के सांसदों को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित मोएट्स रेस्टोरेंट में लंच के लिए आमंत्रित किया था। लंच से पहले बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ताओं के वहां पहुंचने के बीच श्रीनगर निवासी फहीम नजीर भी मौके पर पहुंच गया।

फहीम ने कथित तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए। उसने विपक्ष की राजनीति और राहुल गांधी के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए कि देश को भ्रमित किया जा रहा है। इसी दौरान उसने बीजेपी के समर्थन में भी नारे लगाए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नारेबाजी को लेकर वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उसकी बहस हुई और देखते ही देखते मामला गर्म हो गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फहीम के साथ मारपीट शुरू कर दी।

हालांकि, इस घटना में किस व्यक्ति ने मारपीट की और घटना की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

‘मैंने राहुल गांधी को गाली नहीं दी, फिर मुझे क्यों मारा?’

घटना के बाद फहीम नजीर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह अपने साथ कथित मारपीट को लेकर नाराजगी जताता दिखाई देता है। उसने अपनी पहचान श्रीनगर निवासी के तौर पर बताते हुए कहा कि उसने राहुल गांधी को गाली नहीं दी थी।

फहीम के मुताबिक, वह देश के राजनीतिक हालात पर अपनी बात रखने की कोशिश कर रहा था। उसका सवाल था कि यदि किसी व्यक्ति को किसी राजनीतिक नेता का विरोध करने का अधिकार है तो केवल असहमति जताने पर उसके साथ मारपीट क्यों की गई।

वीडियो में वह लोकतंत्र का सवाल उठाते हुए कहता है कि यदि वह किसी नेता की आलोचना करता है तो इसका जवाब बहस और राजनीतिक तर्क से दिया जाना चाहिए, न कि कथित मारपीट से।

उसने अपने बयान में देश को लेकर कई राजनीतिक आरोप भी लगाए और कहा कि वह भारत को नेपाल या बांग्लादेश बनाने की कथित साजिश का विरोध कर रहा है। उसके ये दावे उसके निजी राजनीतिक आरोप हैं और इनके समर्थन में इस घटना के संदर्भ में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।

विरोध की राजनीति में ‘असहमति’ कितनी सुरक्षित?

दिल्ली की इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि राजनीतिक विरोध के बीच असहमति की आवाज के साथ व्यवहार कैसा होना चाहिए?

लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों के बाहर विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। लेकिन यदि किसी राजनीतिक नेता या दल के खिलाफ नारेबाजी के जवाब में कथित तौर पर शारीरिक हिंसा होती है, तो मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रहता।

दूसरी ओर, किसी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों को भी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका और जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

एक दिन पहले भी दिल्ली में हुआ था हाई-वोल्टेज ड्रामा

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब दिल्ली में INDIA ब्लॉक और चुनाव आयोग के मुद्दे पर केंद्रित विपक्षी आंदोलन पहले से ही राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।

बीते दिन भी INDIA ब्लॉक के सांसदों ने दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में लंच किया था। इसके बाद विपक्षी सांसद तीन बसों में जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए। विपक्षी दलों का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना बताया गया।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने रास्ते में बसों को रोक दिया। इसके बाद राजनीतिक नेताओं और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कथित धक्का-मुक्की और टकराव की स्थिति भी बनी।

राहुल-प्रियंका समेत नेताओं पर FIR का मुद्दा भी गरम

पिछले दिन के घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की बात सामने आई। आरोपों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी धाराएं शामिल होने की जानकारी दी गई।

इस कार्रवाई ने विपक्ष और दिल्ली पुलिस के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है।

विपक्ष जहां चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहा है, वहीं पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और अनुमति से जुड़े नियमों का हवाला दिया जा रहा है।

ऐसे में दिल्ली की सड़कों पर राजनीतिक प्रदर्शन अब केवल चुनाव आयोग के मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ कानून-व्यवस्था, विरोध के अधिकार और राजनीतिक टकराव के सवाल भी जुड़ते जा रहे हैं।

आज फिर लंच, फिर राजघाट जाने की तैयारी

INDIA ब्लॉक के सांसदों का आज भी लंच कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद राजघाट जाने की योजना बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर भारी तैनाती की है।

यानी दिल्ली में आज फिर सियासी गतिविधियां तेज रहने के आसार हैं। एक तरफ विपक्षी दल चुनाव आयोग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क है।

लंच टेबल से सड़क तक पहुंची सियासत

दिल्ली में INDIA ब्लॉक का यह अभियान अब सिर्फ संसद या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। लंच मीटिंग, सड़क पर प्रदर्शन, पुलिस की रोक-टोक, नेताओं की हिरासत और अब राजनीतिक नारेबाजी को लेकर कथित मारपीट—इन घटनाओं ने राजधानी के राजनीतिक माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

फहीम नजीर के साथ कथित मारपीट की घटना इस पूरे विवाद में एक नया अध्याय जोड़ती है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि फहीम ने क्या नारे लगाए या किस राजनीतिक दल का समर्थन किया। बड़ा सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति का जवाब हिंसा से दिया जा सकता है?

यदि मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि घटनाक्रम में कोई दूसरा पक्ष भी है, तो उसकी बात और उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।

सियासत गरम, अब नजर पुलिस जांच पर

फिलहाल दिल्ली में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष का आंदोलन जारी है और उसके समानांतर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं।

कश्मीरी युवक फहीम नजीर के साथ हुई कथित मारपीट ने इस राजनीतिक संघर्ष को एक संवेदनशील सामाजिक और लोकतांत्रिक सवाल से जोड़ दिया है। फहीम का दावा है कि उसने केवल अपनी राजनीतिक बात रखी और राहुल गांधी की आलोचना की, जिसके बाद उसके साथ मारपीट हुई।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या वास्तव में मारपीट हुई, किसने की, घटना की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं?

राजनीतिक नारों और आरोपों से अलग, इन सवालों का जवाब जांच और कानून की प्रक्रिया से ही सामने आना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में असहमति जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि असहमति के बीच कानून और मर्यादा की सीमा भी कायम रहे।

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VIKAS TRIPATHI
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