Friday, September 25, 2026
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थेरेपी रूम बना आस्था का केंद्र, 11 दिनों तक बच्चों ने मनाया गणेश उत्सव

“भक्ति, संस्कृति और आत्मविश्वास के रंग में रंगा फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन; ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच बप्पा को दी भावभीनी विदाई”

नोएडा: सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में इस वर्ष गणेश उत्सव सिर्फ पूजा और धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए खुशी, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक जुड़ाव का ऐसा अवसर बन गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू लिया। पूरे 11 दिनों तक चले गणपति उत्सव का शुक्रवार को विधिवत और भव्य समापन हुआ। जैसे ही भगवान गणेश की प्रतिमा को विदाई देने का समय आया, पूरा परिसर ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंज उठा।

इस पूरे आयोजन की सबसे खास और भावुक करने वाली बात यह रही कि बच्चों ने अपने स्पाइडर केज थेरेपी रूम में ही भगवान गणेश की स्थापना की थी। जिस स्थान पर सामान्य दिनों में बच्चे अपनी थेरेपी के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, वही स्थान 11 दिनों तक आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का केंद्र बना रहा।

थेरेपी रूम में हुई बप्पा की स्थापना, बच्चों ने पूरे उत्साह से निभाई जिम्मेदारी

गणेश उत्सव की शुरुआत से ही बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला। भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना के बाद प्रतिदिन पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों ने अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार इन गतिविधियों में हिस्सा लिया।

किसी ने पूजा की तैयारी में सहयोग किया तो किसी ने फूलों से सजावट की। कई बच्चों ने भगवान गणेश के समक्ष प्रार्थना की, जबकि कुछ बच्चों ने उत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा को निभाना नहीं था। इसके माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें सामूहिक गतिविधियों का हिस्सा बनने का अवसर दिया गया। 11 दिनों के दौरान बच्चों ने एक-दूसरे के साथ समय बिताया, उत्सव की खुशियां साझा कीं और अपनी प्रतिभा को सामने रखने का प्रयास किया।

कहानियों के जरिए बच्चों ने समझीं गणेश और श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपराएं

गणेश उत्सव के दौरान बच्चों को धार्मिक और पौराणिक कथाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समझाने की भी पहल की गई। भगवान गणेश से जुड़ी कथाओं के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित प्रसंगों और धार्मिक परंपराओं को भी सरल और रोचक तरीके से बच्चों के सामने रखा गया।

कहानियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि भारतीय त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक संदेश भी जुड़े होते हैं।

बच्चों ने इन कहानियों को बेहद उत्सुकता के साथ सुना। उनके सवालों और प्रतिक्रियाओं ने पूरे आयोजन को और जीवंत बना दिया। इस दौरान सीखने और मनोरंजन का ऐसा माहौल तैयार हुआ, जिसमें बच्चों ने बिना किसी दबाव के अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

अंतिम दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

गणेश उत्सव के अंतिम दिन फाउंडेशन परिसर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अभिनय और नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के दौरान बच्चों की ऊर्जा और आत्मविश्वास देखते ही बनता था।

ढोल-नगाड़ों की थाप शुरू होते ही बच्चों में उत्साह और बढ़ गया। कई बच्चे संगीत की धुन पर जमकर थिरके तो कुछ ने अभिनय के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इन प्रस्तुतियों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। जिन बच्चों के लिए रोजमर्रा की गतिविधियां भी कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, वही बच्चे उत्सव के मंच पर पूरे उत्साह और उमंग के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते नजर आए।

वहां मौजूद अभिभावकों, फाउंडेशन की टीम और स्वयंसेवकों के लिए यह क्षण बेहद भावुक रहा। बच्चों के चेहरे पर दिखाई दे रही खुशी और आत्मविश्वास ने पूरे वातावरण को आनंद और भावनाओं से भर दिया।

भक्ति के साथ आत्मविश्वास का उत्सव बना गणेश महोत्सव

फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में मनाए गए इस 11 दिवसीय गणेश उत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि इसने बच्चों को केवल दर्शक बनाकर नहीं रखा, बल्कि उन्हें आयोजन का सक्रिय हिस्सा बनाया गया।

पूजा से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक बच्चों को उनकी क्षमता और रुचि के अनुरूप भागीदारी का अवसर दिया गया। इससे उनमें सामूहिकता की भावना विकसित करने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को व्यक्त करने का मंच भी मिला।

ऐसे आयोजनों में बच्चों को एक-दूसरे के साथ संवाद करने, गतिविधियों में भाग लेने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलता है। यही वजह रही कि गणेश उत्सव के 11 दिन फाउंडेशन के लिए एक सामान्य धार्मिक आयोजन से कहीं आगे बढ़कर सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव बन गए।

‘मुख्यधारा से जोड़ना हमारा उद्देश्य’ : डॉ. महिपाल सिंह

फाउंडेशन के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजनों के पीछे मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए इस तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए उनमें सामाजिक सहभागिता, आत्मविश्वास और अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव को मजबूत किया जा सकता है।

डॉ. महिपाल सिंह के अनुसार, “सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन बच्चों को भारतीय परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे उनमें खुशी और आत्मविश्वास बढ़ता है।”

उनका कहना है कि बच्चों को समाज के प्रत्येक पहलू में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। जब बच्चे अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं और उन्हें प्रोत्साहन मिलता है, तो उनके आत्मविश्वास में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

पूरी टीम और स्वयंसेवकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

11 दिनों तक चले इस आयोजन को सफल बनाने में फाउंडेशन की पूरी टीम और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्चों के साथ लगातार सहयोग और समन्वय करते हुए उत्सव की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया।

इस अवसर पर प्रबंध निदेशक डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी, सेंटर मैनेजर सुरभि जैन और डिजिटल मीडिया मैनेजर सौम्या सोनी सहित फाउंडेशन की पूरी टीम और स्वयंसेवक मौजूद रहे।

टीम के सदस्यों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान उनका मनोबल बढ़ाया। आयोजन के अंतिम दिन बच्चों की प्रस्तुतियों के दौरान टीम के सदस्यों के चेहरे पर भी खुशी और गर्व साफ नजर आया।

विसर्जन के दौरान भावुक हुआ माहौल

11 दिनों तक बप्पा के साथ उत्सव मनाने के बाद शुक्रवार को विदाई का समय आया तो माहौल भावुक हो गया। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश को विदाई दी। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

बच्चों और फाउंडेशन की टीम ने गणपति विसर्जन की परंपरा को पूरे श्रद्धा भाव से निभाया। बप्पा की विदाई के समय बच्चों के चेहरों पर खुशी के साथ-साथ भावुकता भी दिखाई दी।

हालांकि विसर्जन के साथ 11 दिवसीय उत्सव का समापन हो गया, लेकिन इस आयोजन ने बच्चों और फाउंडेशन से जुड़े लोगों के मन में कई खूबसूरत यादें छोड़ दीं।

त्योहार से आगे बढ़कर सामाजिक जुड़ाव का संदेश

फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में आयोजित गणेश उत्सव ने यह संदेश भी दिया कि त्योहार समाज के हर वर्ग और हर बच्चे को साथ लेकर चलने का अवसर बन सकते हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को यदि अनुकूल वातावरण और प्रोत्साहन दिया जाए, तो वे भी अपनी प्रतिभा और भावनाओं को बेहद खूबसूरती से व्यक्त कर सकते हैं।

11 दिनों तक थेरेपी रूम में गूंजते मंत्र, बच्चों की हंसी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और ढोल-नगाड़ों की आवाज ने इस उत्सव को यादगार बना दिया। यहां गणपति उत्सव आस्था के साथ-साथ समावेश, सहभागिता, आत्मविश्वास और खुशी का उत्सव बनकर सामने आया।

बप्पा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ भले ही उत्सव समाप्त हो गया हो, लेकिन बच्चों के चेहरे पर दिखाई दिया आत्मविश्वास और उनके भीतर पैदा हुई खुशी इस आयोजन की सबसे बड़ी स्मृति बन गई। फाउंडेशन की यह पहल बताती है कि जब संस्कृति, संवेदना और बच्चों की प्रतिभा को एक मंच मिलता है, तो उत्सव का अर्थ केवल परंपरा निभाना नहीं रह जाता, बल्कि वह समाज को जोड़ने और नई उम्मीद जगाने का माध्यम भी बन जाता है।

 

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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