“मेरा कोई विरोध नहीं होगा, मैं आपको 30 दिन का समय देता हूं” — राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम किशोर गुप्ता का संदेश; दवाई, कपड़ा, परचून और बड़े शोरूम के आगे लगे फास्ट फूड काउंटरों पर भी कार्रवाई की मांग”
नोएडा में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच अब राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक ने कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके दायरे को लेकर कई अहम सवाल खड़े किए हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम किशोर गुप्ता की ओर से जारी संदेश में साफ कहा गया है कि शहर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध नहीं किया जाएगा, लेकिन यदि कार्रवाई हो तो वह सिर्फ रेहड़ी-पटरी वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
संगठन ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश के सामने अपनी बात रखते हुए कहा है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और अतिक्रमण की कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के की जानी चाहिए।
संदेश में सबसे प्रमुख बात सामने आती है—
“मेरा कोई विरोध नहीं होगा और मैं आपको 30 दिन का समय देता हूं।”
यानी संगठन ने सीधे टकराव की जगह प्रशासन को अपनी व्यवस्था और कार्रवाई को लेकर 30 दिन का समय देने की बात कही है।
अतिक्रमण हटाने का समर्थन, लेकिन कार्रवाई में भेदभाव क्यों?
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि शहर से अतिक्रमण हटना चाहिए और संगठन इसका समर्थन करता है। लेकिन संगठन का सवाल है कि यदि अतिक्रमण हटाना है तो उसकी जद में केवल रेहड़ी-पटरी वाले ही क्यों आएं?
संगठन ने सेक्टरों की मार्केट का उदाहरण देते हुए कहा है कि बाजारों में बड़ी-बड़ी दुकानें मौजूद हैं और कई जगह दुकानों के सामने फास्ट फूड के काउंटर या अन्य अस्थायी व्यवस्था दिखाई देती है। ऐसे मामलों में भी नियमों की जांच होनी चाहिए।
संदेश में विशेष रूप से दवाई की दुकान, परचून की दुकान, कपड़े की दुकान और बड़े शोरूम का उल्लेख किया गया है।
संगठन का कहना है कि यदि किसी रेहड़ी-पटरी संचालक द्वारा दुकान या सार्वजनिक स्थान के सामने अतिक्रमण किया जाता है और उस पर कार्रवाई होती है, तो उसी तरह किसी बड़ी दुकान या प्रतिष्ठान के सामने नियमों के विपरीत लगाया गया फास्ट फूड काउंटर भी जांच के दायरे में आना चाहिए।
“सिर्फ रेहड़ी पटरी वाले नहीं, सब पर कार्रवाई हो”
संगठन के पोस्टर में बड़े और स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है—
“सिर्फ रेहड़ी पटरी वाले नहीं, सब पर कार्रवाई हो!”
यही लाइन पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा है।
संगठन का कहना है कि वह कार्रवाई के खिलाफ नहीं है। उसकी मांग केवल इतनी है कि कार्रवाई का पैमाना एक जैसा हो।
पोस्टर में सवाल उठाया गया है कि यदि दवाई की दुकान के आगे फास्ट फूड काउंटर लगा है, कपड़े की दुकान के सामने फास्ट फूड लगाया गया है, परचून की दुकान के आगे काउंटर है या किसी बड़े शोरूम के सामने ऐसी व्यवस्था है तो क्या वह अतिक्रमण नहीं माना जाएगा?
इसी सवाल को संगठन ने तस्वीरों के जरिए भी सामने रखा है और ऊपर स्पष्ट शब्दों में लिखा है—
“ये भी अतिक्रमण है!”
दुकानों के आगे फास्ट फूड काउंटरों की जांच की मांग
संगठन द्वारा जारी सामग्री में चार अलग-अलग उदाहरणों के माध्यम से दवाई, कपड़े, परचून और बड़े शोरूम के आगे लगाए गए फास्ट फूड काउंटरों को दिखाया गया है।
संगठन का सवाल है कि यदि सड़क अथवा सार्वजनिक स्थान के इस्तेमाल को अतिक्रमण माना जा रहा है तो फिर दुकान के आकार या कारोबारी की हैसियत के आधार पर नियम अलग क्यों हों?
संदेश का मूल तर्क है कि कानून की नजर में सभी समान होने चाहिए। यदि कोई नियम रेहड़ी-पटरी संचालक के लिए लागू है तो वही नियम बड़े दुकानदार और बड़े प्रतिष्ठान पर भी लागू होना चाहिए।
“कानून सबके लिए समान हो”
पोस्टर में एक तरफ न्याय के तराजू और हथौड़े के प्रतीक के साथ स्पष्ट संदेश दिया गया है—
“कानून सबके लिए समान हो”
वहीं दूसरी तरफ लिखा है—
“साफ नोएडा, सुरक्षित नोएडा — सभी के लिए समान नियम”
संगठन ने साफ शहर की जरूरत से इनकार नहीं किया है। बल्कि उसका कहना है कि शहर साफ और व्यवस्थित होना चाहिए, लेकिन व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी में छोटे व्यापारियों और बड़े व्यापारियों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए।
30 दिन की समय सीमा क्यों?
पोस्टर में “सिर्फ 30 दिन की समय सीमा” को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
श्याम किशोर गुप्ता की ओर से जारी संदेश में कहा गया है—
“मेरा कोई विरोध नहीं होगा और मैं आपको 30 दिन का समय देता हूं।”
इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन फिलहाल कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन अथवा विरोध का रास्ता अपनाने के बजाय प्रशासन से अपेक्षा कर रहा है कि वह इस अवधि में कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाए और सभी वर्गों पर समान नियम लागू करे।
लाइसेंस की भी जांच हो!
संगठन ने केवल अतिक्रमण तक ही सवाल सीमित नहीं रखे हैं। पोस्टर में अलग से लिखा गया है—
“लाइसेंस की भी जांच हो!”
इसके नीचे कई सवाल उठाए गए हैं। पोस्टर में पूछा गया है कि कहीं संबंधित व्यक्ति का GF यानी ग्राउंड फ्लोर तो नहीं काटा गया है? क्या वह किसी कंपनी में काम करता है या नहीं? क्या उसके नाम टैक्सी है? क्या उसके नाम ऑटो रिक्शा है? क्या उसके नाम ई-रिक्शा है?
इन सवालों के जरिए संगठन ने यह मांग उठाई है कि रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों की स्थिति तथा लाइसेंस आदि की भी व्यवस्थित जांच की जाए।
“अवैध वसूली बंद हो!”—संगठन ने उठाई जांच की मांग
पोस्टर का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा कथित वसूली से जुड़ा है।
इसमें बड़े अक्षरों में लिखा गया है—
“अवैध वसूली बंद हो!”
इसके साथ संगठन ने दावा किया है कि सेक्टर की मार्केट में दुकान के आगे फास्ट फूड लगाने की एवज में ₹1000 रोज की वसूली की शिकायतें हैं।
संगठन ने इसकी भी जांच कराने की मांग की है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹1000 रोज वसूली का दावा संगठन की ओर से लगाए गए आरोप/शिकायत के रूप में सामने आया है। पोस्टर में इसके समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या प्रशासनिक पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है। ऐसे में इस आरोप की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी।
छोटा व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत
पोस्टर के निचले हिस्से में संगठन ने छोटे व्यापारियों को लेकर अपना दृष्टिकोण भी स्पष्ट किया है।
इसमें लिखा है—
“छोटा व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत”
यानी संगठन रेहड़ी-पटरी कारोबार को केवल अतिक्रमण के नजरिए से देखने के बजाय इसे छोटे व्यापार और रोजगार से जोड़कर देख रहा है।
साथ ही पोस्टर में एक और संदेश दिया गया है—
“व्यवस्था बने, व्यापार चले, रोजगार बचे, शहर सजे।”
यह संदेश बताता है कि संगठन एक तरफ शहर में व्यवस्था और स्वच्छता की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ छोटे व्यापारियों के रोजगार की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मानता है।
श्याम किशोर गुप्ता ने रखा संगठन का पक्ष
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम किशोर गुप्ता ने पोस्टर के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ नहीं है।
संगठन की आपत्ति कार्रवाई के एकतरफा स्वरूप को लेकर है।
मांग यह है कि यदि नोएडा को अतिक्रमण मुक्त और व्यवस्थित बनाना है तो कार्रवाई का दायरा व्यापक होना चाहिए। रेहड़ी-पटरी वालों के साथ-साथ दुकानों, शोरूम और अन्य प्रतिष्ठानों के सामने होने वाले संभावित अतिक्रमण की भी जांच की जानी चाहिए।
“पर्दाफाश न्यूज़” की नजर में बड़ा सवाल
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि नोएडा में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का पैमाना क्या होगा?
क्या नियम सभी के लिए एक जैसे लागू होंगे? क्या बड़े प्रतिष्ठानों और दुकानों के सामने होने वाले कथित अतिक्रमण की भी जांच होगी? क्या लाइसेंस व्यवस्था की जांच समान रूप से की जाएगी? और क्या कथित ₹1000 प्रतिदिन की वसूली की शिकायतों पर प्रशासन स्वतंत्र जांच करेगा?
इन सवालों का जवाब अब नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक ने फिलहाल साफ संदेश दिया है—शहर से अतिक्रमण हटाइए, लेकिन कार्रवाई किसी एक वर्ग तक सीमित मत रखिए। कानून सबके लिए समान हो और नियमों का पालन भी सभी से समान रूप से कराया जाए।
यही वह मुद्दा है जिसे लेकर संगठन ने प्रशासन के सामने 30 दिन की समय-सीमा रखते हुए अपनी बात रखी है।
“पर्दाफाश न्यूज़” इस पूरे मामले में संबंधित प्रशासनिक पक्ष, कार्रवाई और आधिकारिक जांच की जानकारी सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।















