“LG टीएस संधू ने पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, महिलाओं के लिए बनेगी ‘पिंक फोर्स’; शिकायतों की डिजिटल ट्रैकिंग और संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी पेट्रोलिंग”
नई दिल्ली। दिल्ली में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपराज्यपाल सरदार टीएस संधू ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय के ऑडिटोरियम में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। पुलिस कमिश्नर की मौजूदगी में हुई इस बैठक में केवल पुलिस की ओर से शुरू की गई योजनाओं और अभियानों की जानकारी लेने तक सीमित नहीं रहा गया, बल्कि इन योजनाओं का जमीन पर कितना असर हुआ, लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही और अभी किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है, इसकी भी समीक्षा की गई।
24 जून 2026 के बाद पुलिस मुख्यालय का यह उपराज्यपाल का दूसरा दौरा था। बैठक में एलजी ने साफ कहा कि पुलिसिंग का अंतिम लक्ष्य केवल अपराध पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दिल्ली को ज्यादा सुरक्षित बनाना और आम नागरिकों का पुलिस पर भरोसा मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्यालय से लेकर थाने और बीट स्तर तक हर अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि पुलिस की कार्यप्रणाली लोगों के लिए सहज, जवाबदेह और भरोसेमंद हो।
थाने ऐसे हों, जहां शिकायतकर्ता को मिले भरोसा
उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली का हर पुलिस थाना ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां पहुंचने वाले व्यक्ति को यह महसूस हो कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसे उचित मदद मिलेगी। इसके लिए उन्होंने थानों, बीट अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया।
संवेदनशील, अपराध प्रभावित और अधिक भीड़ वाले इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पैदल और बाइक पेट्रोलिंग को मजबूत करने के साथ-साथ स्कूल, कॉलेज, बाजार और प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब के आसपास विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। उद्देश्य यह है कि जरूरत के समय पुलिस लोगों को आसानी से दिखाई दे और किसी घटना की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।
जन सुनवाई की शिकायतों पर अब डिजिटल नजर
बैठक में जन सुनवाई के दौरान मिलने वाली शिकायतों की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। एलजी ने कहा कि शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि डिजिटल सिस्टम के माध्यम से उनकी पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जाए।
शिकायत दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को उसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि किसी शिकायत का संबंध दूसरे सरकारी विभाग से है तो उसे बिना अनावश्यक देरी के संबंधित विभाग को भेजा जाए। इससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली में बनेगी ‘पिंक फोर्स’
महिलाओं की सुरक्षा को बैठक में विशेष प्राथमिकता दी गई। उपराज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और महिलाओं के साथ होने वाली बदसलूकी के खिलाफ ऑपरेशन शिष्टाचार के तहत कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए।
एलजी ने गोवा पुलिस की ‘पिंक फोर्स’ का उदाहरण देते हुए दिल्ली पुलिस को भी महिला-केंद्रित पेट्रोलिंग यूनिट गठित करने का निर्देश दिया। प्रस्तावित पिंक फोर्स में प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा। इनकी तैनाती स्कूल, कॉलेज, मेट्रो स्टेशन और अन्य संवेदनशील स्थानों पर की जाएगी।
विशेष रूप से संवेदनशील समय और ऐसे स्थानों पर इनकी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया गया, जहां महिलाओं और छात्राओं की आवाजाही अधिक होती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर मौके पर तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।
बच्चों की सुरक्षा पर हर तीन महीने का एक्शन प्लान
बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर भी बैठक में कई निर्देश दिए गए। स्कूलों में POCSO, बाल सुरक्षा, साइबर अपराध, नशे और सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है।
हर पुलिस जिले में इन कार्यक्रमों के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक तीन महीने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि गतिविधियां केवल किसी घटना के बाद चलाए जाने वाले अभियान तक सीमित न रहें।
एलजी ने 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए स्थानीय स्कूलों और आरडब्ल्यूए के सहयोग से नियमित खेल गतिविधियां आयोजित करने को भी कहा। इसके पीछे उद्देश्य बच्चों और स्थानीय समुदाय के साथ पुलिस का सीधा संपर्क बढ़ाना और शुरुआती स्तर पर भरोसे का माहौल तैयार करना है।
ड्रग्स के खिलाफ खुफिया सूचना आधारित कार्रवाई
नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए उपराज्यपाल ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत लगातार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि खुफिया जानकारी के आधार पर नेटवर्क और सप्लाई चैन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस थानों की क्षमता बढ़ाने और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। जरूरत पड़ने पर मामलों में विशेष साइबर यूनिट की सहायता लेने के निर्देश दिए गए।
जाम वाले इलाकों की रियल टाइम मॉनिटरिंग
दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था भी समीक्षा बैठक के एजेंडे में रही। एलजी ने लगातार जाम वाले प्रमुख स्थानों की पहचान कर उनकी निगरानी करने को कहा। पीक आवर्स में ऐसे स्थानों पर पुलिस की अतिरिक्त मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा CCTV कैमरों और ट्रैफिक कंट्रोल रूम के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि यातायात संबंधी समस्याओं का जल्द पता लगाया जा सके और आवश्यकता के अनुसार मौके पर कार्रवाई की जा सके।
पुलिसकर्मियों की समस्याओं का भी समयबद्ध समाधान
बैठक में पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों और उनकी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। एलजी ने पुलिस मुख्यालय में निर्धारित समय पर पुलिसकर्मियों की शिकायतों की सुनवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निचले रैंक के पुलिसकर्मियों और महिला पुलिसकर्मियों की पदोन्नति समय पर सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही पुलिस कॉलोनियों को मॉडल जीरो-वेस्ट कॉलोनी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए।
भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिसकर्मियों के सार्वजनिक व्यवहार में ईमानदारी और जवाबदेही पर नजर रखने को भी कहा गया।
BRICS समिट की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने BRICS समिट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान बेहतर योजना, आपसी समन्वय और पेशेवर तरीके से जिम्मेदारियां निभाई गईं तथा दिल्ली के सामान्य जनजीवन पर भी कम से कम असर पड़ा।
एलजी ने कहा कि BRICS समिट के दौरान मिले अनुभव और ऑपरेशनल सबक का इस्तेमाल भविष्य में दिल्ली में होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में किया जाना चाहिए।
‘दिखे, सुने और तुरंत मदद करे पुलिस’
बैठक के अंत में उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस के लिए जन-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा स्पष्ट करते हुए कहा कि नागरिकों को ऐसी पुलिस व्यवस्था मिलनी चाहिए, जो दिखाई दे, लोगों की बात सुने और जरूरत के समय तुरंत मदद करे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बैठक में दिए गए निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें। पुलिस मुख्यालय से लेकर पुलिस थाने, बीट अधिकारी और स्थानीय स्तर तक प्रत्येक अधिकारी इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी निभाए।
उपराज्यपाल की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों से साफ है कि दिल्ली पुलिस की प्राथमिकताओं में अब केवल अपराध के बाद कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अपराध की रोकथाम, सार्वजनिक संपर्क, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल शिकायत निस्तारण, साइबर अपराध, ट्रैफिक प्रबंधन और पुलिस की जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी व्यापक रूप से शामिल किया जा रहा है। आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है, यही इस नई पुलिसिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी होगी।















