“डोडा की अदालत ने पुराने मामले में तय किए आरोप, पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर लिया कब्जे में; अप्रैल में हाईकोर्ट ने PSA के तहत हिरासत को कर दिया था रद्”
डोडा: जम्मू-कश्मीर के डोडा से आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक मेहराज मलिक एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। डोडा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CGM) कोर्ट ने पुराने मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसी वारंट के आधार पर पुलिस ने मेहराज मलिक को हिरासत में लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुराने प्रकरण में उनके खिलाफ आरोप भी तय कर दिए हैं। अब मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।
मेहराज मलिक की हिरासत किसी नए मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का नतीजा नहीं है, बल्कि अदालत के आदेश के तहत हुई है। पुलिस ने अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर मेहराज मलिक का मामला चर्चा में आ गया है।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
डोडा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पुराने मामले की सुनवाई के दौरान मेहराज मलिक के खिलाफ आरोप तय किए गए। इसी मामले में अदालत की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। पुलिस ने वारंट के आधार पर कार्रवाई करते हुए AAP विधायक को हिरासत में लिया।
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि मेहराज मलिक के खिलाफ कार्रवाई किसी नए आपराधिक मामले को लेकर नहीं बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई पहले से लंबित मामले में अदालत की प्रक्रिया के तहत हुई है।
अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। यानी फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है और अदालत में आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
अप्रैल में हाईकोर्ट से मिली थी बड़ी राहत
मेहराज मलिक इससे पहले भी हिरासत को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। अप्रैल 2026 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ लगाए गए पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) को रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत को अवैध मानते हुए उसे निरस्त कर दिया था। उस समय यह फैसला AAP नेता और डोडा विधायक के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा गया था। उनके खिलाफ PSA के तहत की गई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी काफी चर्चा हुई थी।
अब कुछ महीनों बाद एक पुराने मामले में डोडा की अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने और गैर-जमानती वारंट के आधार पर हिरासत में लिए जाने से मेहराज मलिक फिर कानूनी घेरे में हैं।
हालांकि, मौजूदा कार्रवाई और अप्रैल में हाईकोर्ट के फैसले को अलग-अलग कानूनी मामलों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने PSA के तहत हुई हिरासत को रद्द किया था, जबकि वर्तमान कार्रवाई डोडा की अदालत में चल रहे पुराने मामले से संबंधित है।
2024 में पहली बार डोडा से AAP का खुला खाता
मेहराज मलिक की राजनीतिक पहचान केवल डोडा तक सीमित नहीं है। 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में उन्होंने डोडा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर AAP के लिए जम्मू-कश्मीर में नया राजनीतिक अध्याय लिखा था।
डोडा सीट पर हुए चुनाव में मेहराज मलिक ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार गजय सिंह राणा को करीब 4,538 वोटों के अंतर से हराया था। मेहराज मलिक को कुल 23,228 वोट, जबकि बीजेपी उम्मीदवार गजय सिंह राणा को 18,690 वोट मिले थे।
इस चुनाव परिणाम की खास बात यह रही कि जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस तीसरे स्थान पर रही। इस तरह मेहराज मलिक की जीत ने न केवल डोडा में राजनीतिक समीकरण बदले, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आम आदमी पार्टी को भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिलाया।
AAP के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि पार्टी का जम्मू-कश्मीर विधानसभा में खाता खुला। मेहराज मलिक की जीत को पार्टी ने क्षेत्रीय स्तर पर अपने विस्तार के संकेत के रूप में भी देखा।
डोडा में मजबूत जनाधार का दावा
मेहराज मलिक का डोडा विधानसभा क्षेत्र में खासा प्रभाव माना जाता है। 2024 के चुनाव में उनकी जीत ने उनके स्थानीय जनाधार को मजबूत किया। उन्होंने बीजेपी के मजबूत उम्मीदवार को हजारों वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा में जगह बनाई।
डोडा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में AAP की जीत ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। चुनाव परिणाम में नेशनल कॉन्फ्रेंस का तीसरे स्थान पर रहना भी क्षेत्र की बदलती राजनीतिक पसंद की ओर संकेत करता है।
मेहराज मलिक की राजनीति में स्थानीय मुद्दों और क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता देने की छवि रही है। यही वजह है कि चुनाव के बाद वह डोडा की राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरे।
राजनीतिक सफर के बीच कानूनी विवाद
विधायक बनने के बाद मेहराज मलिक का राजनीतिक सफर कई बार कानूनी विवादों के कारण भी चर्चा में रहा। PSA के तहत उनकी हिरासत और बाद में हाईकोर्ट द्वारा उसे रद्द किए जाने का मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था।
अप्रैल 2026 का हाईकोर्ट का फैसला उनके लिए राहत लेकर आया था। अदालत ने PSA के तहत उनकी हिरासत को अवैध मानते हुए आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी।
अब डोडा की अदालत में पुराने मामले की सुनवाई के दौरान आरोप तय होने और गैर-जमानती वारंट के आधार पर हिरासत में लिए जाने से एक बार फिर उनके सामने कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है।
अब आगे क्या होगा?
अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब संबंधित मामले में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के अनुसार चलेगी।
गैर-जमानती वारंट के आधार पर हिरासत में लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मेहराज मलिक को दोषी ठहरा दिया है। किसी मामले में आरोप तय होना मुकदमे की प्रक्रिया का एक चरण है। दोष सिद्ध होना आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को अदालत की प्रक्रिया के रूप में देखना महत्वपूर्ण है। मामले में अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
AAP विधायक के लिए बढ़ी चुनौती
मेहराज मलिक की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए मौजूदा घटनाक्रम AAP के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2024 के चुनाव में डोडा से जीत हासिल कर पार्टी को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रवेश दिलाने वाले मेहराज मलिक फिलहाल पुराने मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
एक तरफ अप्रैल में हाईकोर्ट से PSA मामले में मिली राहत उनके लिए सकारात्मक रही थी, वहीं दूसरी ओर अब पुराने मामले में आरोप तय होना और गैर-जमानती वारंट के आधार पर हिरासत में लिया जाना उनके लिए नई चुनौती है।
डोडा में मजबूत जनाधार रखने वाले मेहराज मलिक के मामले पर अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी रहेगी। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही यह तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि डोडा के AAP विधायक मेहराज मलिक एक बार फिर कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। अदालत ने पुराने मामले में आरोप तय कर दिए हैं और गैर-जमानती वारंट के आधार पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है। वहीं, अप्रैल में हाईकोर्ट द्वारा PSA के तहत उनकी हिरासत रद्द किए जाने के बाद अब इस नए घटनाक्रम ने उनकी राजनीतिक सक्रियता और भविष्य को लेकर भी चर्चाओं को तेज कर दिया है।














