गाजीपुर। परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर गुरुवार को उनका पैतृक गांव धामूपुर देशभक्ति के रंग में रंग गया। शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक स्थल पर आयोजित भव्य श्रद्धांजलि समारोह में केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने पहुंचकर वीर सपूत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का साहस भारतीय सेना की वीरता, शौर्य और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त किया और देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका पराक्रम आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने भारतीय सेना के शौर्य को नमन करते हुए कहा कि सेना ने हर चुनौती का सामना पूरी वीरता और साहस के साथ किया है। 1965 और 1971 के युद्ध, कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय जवानों ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों और आधुनिक रक्षा तकनीक की क्षमता ने दुनिया के सामने भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का परिचय कराया है। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ बड़ी मात्रा में रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है।
समारोह में परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव ने भी वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित में समर्पण और अनुशासन की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया। विद्यालयी बच्चों ने देशभक्ति गीत, गायन और नृत्य की प्रस्तुतियां देकर वातावरण को राष्ट्रप्रेम से भर दिया।
10 सितंबर 1965 को दी थी सर्वोच्च शहादत
वीर अब्दुल हमीद 10 सितंबर 1965 को भारत-पाक युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे। उनके अद्वितीय पराक्रम के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। समारोह में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला, भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश राय, प्रवीण सिंह, निमेष पांडेय, निजामुद्दीन सिद्दीकी, संतोष यादव, सद्दाम हुसैन सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, सैनिक, उनके परिजन और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।














