नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर राजधानी दिल्ली में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। BRICS Summit 2026 के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात में BrahMos मिसाइल के अपग्रेड से लेकर नई रक्षा तकनीक और संयुक्त उत्पादन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
भारत और रूस पहले से ही BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त रूप से उत्पादन कर रहे हैं। अब इसे नई क्षमताओं और अतिरिक्त फीचर्स से लैस करने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं।
BrahMos में क्या नया करने की तैयारी?
रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, भारत और रूस के लिए अब BrahMos को और बेहतर बनाने का समय आ गया है। दोनों देश मिसाइल में नई क्षमताएं और अतिरिक्त खूबियां जोड़ने पर काम कर सकते हैं।
इसका मकसद सिर्फ इसकी सैन्य क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में BrahMos को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना भी है।
BrahMos की खासियत यह है कि इसके अलग-अलग वेरिएंट जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जा सकते हैं। इसकी सुपरसोनिक गति और सटीक मारक क्षमता इसे भारत की अहम मिसाइल प्रणालियों में शामिल करती है।
मोदी-पुतिन की मुलाकात क्यों अहम?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की करीब एक महीने के भीतर यह दूसरी द्विपक्षीय मुलाकात होगी।
ऐसे में इस बैठक में सिर्फ BrahMos ही नहीं, बल्कि नई रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और भविष्य के सैन्य सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत होने की उम्मीद है।
रूस के साथ रक्षा संबंधों की तस्वीर
भारत पिछले कुछ वर्षों में हथियारों के आयात के मामले में रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। फिर भी दोनों देशों के बीच BrahMos जैसे संयुक्त रक्षा प्रोजेक्ट रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को दिखाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोदी-पुतिन की बैठक के बाद BrahMos के नए अपग्रेड और भारत-रूस के रक्षा सहयोग को लेकर कोई बड़ा ऐलान सामने आएगा?
दिल्ली में BRICS सम्मेलन के बीच होने वाली इस मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की नजरें भी टिकी हुई हैं।














