श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अवकाश पर रहने के दौरान केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल के दायित्वों का निर्वहन अब लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना करेंगे। राष्ट्रपति ने मंगलवार को उन्हें लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में अपने मौजूदा दायित्वों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह व्यवस्था मनोज सिन्हा के अवकाश से वापस लौटने तक प्रभावी रहेगी।
मनोज सिन्हा फिलहाल विदेश में हैं और उनके 17 सितंबर को वापस लौटने की उम्मीद है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति के दौरान जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक और प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी विनय कुमार सक्सेना के पास रहेगी।
राष्ट्रपति भवन ने जारी किया आदेश
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ने लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करने के लिए अधिकृत किया है। यह अतिरिक्त जिम्मेदारी उन्हें मनोज सिन्हा की अनुपस्थिति के दौरान दी गई है।
आदेश के मुताबिक सक्सेना जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के सभी आवश्यक कार्यों का निर्वहन तब तक करेंगे, जब तक मनोज सिन्हा अवकाश से वापस नहीं लौटते। इस दौरान वह लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारियां भी संभालते रहेंगे।
राष्ट्रपति के इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। मनोज सिन्हा की अनुपस्थिति में किसी स्थायी नियुक्ति के बजाय मौजूदा उपराज्यपाल को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया है।
चीफ जस्टिस के शपथ ग्रहण से पहले अहम फैसला
विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर के LG का अतिरिक्त प्रभार ऐसे समय में दिया गया है, जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां चल रही हैं।
सक्सेना फिलहाल श्रीनगर में मौजूद हैं और उम्मीद है कि वह बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी को पद की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे SKUAST-कश्मीर के शालीमार कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाना है।
इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र में विशेष महत्व हासिल कर लिया है, क्योंकि एक ओर मौजूदा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा अवकाश पर हैं, वहीं दूसरी ओर हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का शपथ ग्रहण भी होना है।
श्रीनगर में मौजूद हैं विनय कुमार सक्सेना
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना इस समय श्रीनगर में हैं। राष्ट्रपति की ओर से अतिरिक्त जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनका जम्मू-कश्मीर प्रशासन में भी औपचारिक दायित्व शुरू हो गया है।
बुधवार को न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी मौजूदगी पहले से महत्वपूर्ण थी, लेकिन राष्ट्रपति के आदेश के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हुए नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाने वाले हैं।
जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल का पद केंद्र शासित प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में उपराज्यपाल की अनुपस्थिति के दौरान किसी अनुभवी प्रशासक को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपना प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
17 सितंबर तक रहेगी अतिरिक्त जिम्मेदारी
मनोज सिन्हा के 17 सितंबर को विदेश से लौटने की उम्मीद है। ऐसे में फिलहाल विनय कुमार सक्सेना की जम्मू-कश्मीर के LG के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी सीमित अवधि के लिए है।
राष्ट्रपति भवन के बयान में स्पष्ट किया गया है कि सक्सेना यह जिम्मेदारी मनोज सिन्हा के वापस लौटने तक निभाएंगे। यानी यह नियुक्ति स्थायी तौर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के पद पर नहीं है, बल्कि अवकाश की अवधि में प्रशासनिक कामकाज को निरंतर बनाए रखने के लिए की गई व्यवस्था है।
इस दौरान जम्मू-कश्मीर से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामलों, संवैधानिक दायित्वों और आवश्यक सरकारी कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी सक्सेना के पास रहेगी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—दोनों की जिम्मेदारी
राष्ट्रपति के आदेश की खास बात यह है कि विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर का अतिरिक्त प्रभार देने के साथ लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में उनकी मौजूदा जिम्मेदारियां समाप्त नहीं की गई हैं।
वह लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर अपने दायित्व निभाते हुए जम्मू-कश्मीर के LG के कार्यों का भी निर्वहन करेंगे। इस प्रकार एक ही समय में उन्हें दोनों केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े प्रशासनिक दायित्व संभालने होंगे।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे में दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी अलग व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने के लिए समन्वय और प्रशासनिक अनुभव की आवश्यकता होगी।
हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का शपथ ग्रहण
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी के शपथ ग्रहण समारोह पर भी सभी की नजरें रहेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार सुबह 11 बजे श्रीनगर स्थित SKUAST-कश्मीर के शालीमार कन्वेंशन सेंटर में समारोह आयोजित होगा।
विनय कुमार सक्सेना द्वारा शपथ दिलाए जाने की संभावना है। राष्ट्रपति द्वारा उन्हें जम्मू-कश्मीर के LG के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद इस समारोह की संवैधानिक औपचारिकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद न्यायपालिका के शीर्ष संवैधानिक पदों में से एक है और शपथ ग्रहण समारोह में उपराज्यपाल की भूमिका औपचारिक होने के साथ-साथ संवैधानिक महत्व भी रखती है।
प्रशासनिक निरंतरता पर जोर
मनोज सिन्हा की अनुपस्थिति के दौरान जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक कामकाज में किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए राष्ट्रपति के आदेश के बाद अब व्यवस्था स्पष्ट हो गई है। विनय कुमार सक्सेना को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपे जाने से उपराज्यपाल कार्यालय के नियमित कामकाज को जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है।
विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल की अनुपस्थिति के दौरान प्रशासनिक नेतृत्व का तत्काल वैकल्पिक प्रबंध महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति के आदेश को प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दृष्टि से देखा जा रहा है।
मनोज सिन्हा के लौटने तक संभालेंगे जिम्मेदारी
मनोज सिन्हा के विदेश दौरे से लौटने तक विनय कुमार सक्सेना जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करेंगे। उनके लौटने के बाद अतिरिक्त प्रभार की यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और जम्मू-कश्मीर का नियमित प्रशासनिक नेतृत्व फिर से मनोज सिन्हा के हाथों में आ जाएगा।
फिलहाल श्रीनगर में मौजूद विनय कुमार सक्सेना के सामने बुधवार से ही दोहरी जिम्मेदारी की शुरुआत हो जाएगी। एक तरफ उन्हें लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभानी हैं, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के LG के रूप में राष्ट्रपति द्वारा सौंपी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालनी है।
राष्ट्रपति भवन के आदेश ने फिलहाल जम्मू-कश्मीर में नेतृत्व को लेकर उठने वाली संभावित अटकलों पर विराम लगा दिया है। मनोज सिन्हा के अवकाश से लौटने तक विनय कुमार सक्सेना जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर आवश्यक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।














