तेहरान/मस्कट: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और ओमान ने जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर पर चर्चा की है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा चिंता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच बातचीत में समुद्र में मौजूद संभावित माइंस को हटाने और जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करने पर भी चर्चा हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। सामान्य परिस्थितियों में बड़ी संख्या में तेल टैंकर और दूसरे वाणिज्यिक जहाज इसी मार्ग से गुजरते हैं।
अस्थायी कॉरिडोर क्यों जरूरी हुआ?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जहाजों को संभावित हमले, समुद्री माइंस और दूसरे सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी स्थिति में ईरान और ओमान के बीच बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश एक ऐसे अस्थायी नेविगेशनल कॉरिडोर की संभावना पर काम कर रहे हैं, जिससे वाणिज्यिक जहाज नियंत्रित और अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट पार कर सकें।
सबसे अहम मुद्दों में से एक समुद्री माइंस की मौजूदगी है। यदि किसी इलाके में माइंस का खतरा है तो जहाजों की आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण हो जाती है। इसलिए सुरक्षित मार्ग बनाने से पहले संदिग्ध क्षेत्रों को साफ करना महत्वपूर्ण होगा।
क्या तुरंत शुरू हो जाएगी जहाजों की आवाजाही?
अस्थायी कॉरिडोर पर सहमति की चर्चा निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल हो गई है।
जहाजों की आवाजाही दोबारा बड़े स्तर पर शुरू होने के लिए सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री मार्ग की निगरानी और माइंस हटाने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। जहाज कंपनियां भी किसी नए रास्ते का इस्तेमाल करने से पहले सुरक्षा स्थिति का आकलन करेंगी।
यानी यह पहल तनाव कम करने की दिशा में पहला कदम हो सकती है, लेकिन सामान्य समुद्री यातायात बहाल होने में अभी समय लग सकता है।
टैंकर पर हमला बढ़ा रहा चिंता
इसी बीच ओमान के अश शिशाह इलाके के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, टैंकर हमले के बाद आगे नहीं बढ़ सका।
इस घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि अगर होर्मुज में अस्थायी कॉरिडोर बनाया जाता है, तो उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
किसी भी वाणिज्यिक जहाज के लिए सिर्फ एक सुरक्षित समुद्री रास्ता पर्याप्त नहीं है। उस रास्ते की लगातार निगरानी, आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा और संभावित हमलों से बचाव भी जरूरी होगा।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत केवल ईरान और ओमान तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देशों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक ऊर्जा पहुंचाने में इसकी बड़ी भूमिका है।
यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी से लेकर शिपिंग लागत बढ़ने तक कई तरह के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी यह मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एशिया दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
होर्मुज में लंबे समय तक अस्थिरता भारत के लिए भी चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव भारत पर भी आ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव महंगाई पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से भारत समेत दुनिया के कई देश होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी सकारात्मक कूटनीतिक पहल पर नजर रखेंगे।
अमेरिका का दबाव और ईरान की चुनौती
होर्मुज में समुद्री सुरक्षा के सवाल के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक और राजनीतिक तनाव भी जारी है।
अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दे रहा है। दूसरी तरफ ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
ऐसे में समुद्री यातायात को सुरक्षित करने के लिए ईरान और ओमान की बातचीत को क्षेत्रीय कूटनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
ओमान की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव के बीच संवाद और मध्यस्थता की भूमिका निभाता रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में भी ओमान की भूमिका कई मौकों पर सामने आई है।
इस बार भी ओमान और ईरान के बीच बातचीत सिर्फ समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही। यदि दोनों देश होर्मुज में सुरक्षित जहाजरानी के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाने में सफल होते हैं, तो यह क्षेत्र में तनाव कम करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा बन सकती है।
क्या इससे तेल बाजार को राहत मिलेगी?
अगर अस्थायी कॉरिडोर सुरक्षित तरीके से काम करना शुरू करता है और जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
लेकिन बाजार केवल घोषणा पर प्रतिक्रिया नहीं देगा। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं, सुरक्षा कितनी प्रभावी है और क्या हमले या माइंस का खतरा वास्तव में कम होता है।
यदि कुछ समय तक बिना बड़ी घटना के जहाजों की आवाजाही जारी रहती है, तो बाजार में भरोसा बढ़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन के लिए भी चुनौती
होर्मुज संकट का असर अमेरिकी राजनीति पर भी पड़ रहा है। युद्ध और सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिका में जनता के समर्थन में गिरावट की रिपोर्टें सामने आई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनौती यह है कि ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक होने से कैसे रोका जाए।
अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो ऊर्जा कीमतों, वैश्विक व्यापार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान और ओमान की बातचीत व्यावहारिक व्यवस्था में कितनी जल्दी बदलती है।
अस्थायी समुद्री कॉरिडोर के सफल होने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी होंगी—माइंस की सुरक्षित सफाई, जहाजों की प्रभावी निगरानी और सैन्य तनाव में कमी।
यदि ये तीनों स्थितियां बनती हैं तो होर्मुज में धीरे-धीरे सामान्य जहाजरानी बहाल हो सकती है। लेकिन अगर समुद्री हमले जारी रहते हैं या अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ता है, तो किसी भी कॉरिडोर की सुरक्षा पर सवाल बना रहेगा।
फिलहाल ईरान-ओमान की पहल को एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा सकता है। होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित जहाजरानी केवल दो देशों का मुद्दा नहीं है—इसका सीधा संबंध वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार, महंगाई और दुनिया की अर्थव्यवस्था से है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अस्थायी कॉरिडोर सिर्फ बातचीत की मेज तक सीमित रहता है या वास्तव में जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने में सफल होता है।














