Monday, August 10, 2026
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आरजी कर कांड में फिर खुलेंगी फाइलें: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कराई नई जांच, अंतिम संस्कार से लेकर साजिश के हर पहलू की होगी पड़ताल

“पीड़िता की मां के पत्र के बाद बड़ा फैसला, पुलिस की भूमिका और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में”

कोलकाता। देश को झकझोर देने वाले आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ट्रेनी महिला डॉक्टर के रेप और हत्या मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बहुचर्चित मामले में नए सिरे से जांच कराने की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह फैसला पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ के अनुरोध पर लिया गया है, जिन्होंने हाल ही में उन्हें पत्र लिखकर मामले की पुनः जांच की मांग की थी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्य सचिव और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विशेष आयोग अधिनियम, 1952 के तहत मामले की नई जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इस घोषणा के साथ ही दो वर्ष पुराने इस मामले की गूंज एक बार फिर पूरे देश में सुनाई देने लगी है।

‘पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही’

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले को लेकर राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच के दौरान पुलिस कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही। यही कारण है कि अब पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि नई जांच केवल अपराध की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नतागढ़ कदमतला श्मशान घाट पर पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, श्मशान घाट पर शव शुरुआत में अंतिम संस्कार की कतार में तीसरे स्थान पर था, लेकिन अचानक उसे पहले स्थान पर लाकर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार द्वारा निर्धारित शुल्क का भुगतान नहीं किया गया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में आवश्यक परिजनों के हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए।

इन आरोपों को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ने बैरकपुर पुलिस आयुक्त को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीब मुखर्जी नामक व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच करने को कहा गया है।

सीबीआई जांच से अलग होगी अंतिम संस्कार मामले की पड़ताल

पानीहाटी में आयोजित एक शोकसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम संस्कार से जुड़े आरोप वर्तमान में चल रही सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आते। इसलिए राज्य पुलिस स्वतंत्र रूप से इस पहलू की जांच करेगी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ने सबूत मिटाने, प्रक्रिया को प्रभावित करने या किसी तथ्य को छिपाने का प्रयास किया है तो उसे कानून के अनुसार जवाब देना होगा। सरकार का उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं, बल्कि हर सवाल का जवाब ढूंढ़ना है।

9 अगस्त 2024 की वह सुबह जिसने देश को झकझोर दिया

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 9 अगस्त 2024 की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। अस्पताल के सेमिनार हॉल में महिला पोस्ट-ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया था और उसके बाद बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई।

शव पर कई चोटों के निशान पाए गए थे, जिससे घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता था। जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। मेडिकल समुदाय, छात्र संगठन, महिला अधिकार समूह और आम नागरिक न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।

देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और डॉक्टरों की हड़ताल

घटना के बाद पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। जूनियर डॉक्टरों ने हफ्तों तक कार्य बहिष्कार और हड़ताल की। अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई।

मेडिकल संगठनों ने आरोप लगाया कि अस्पतालों में काम करने वाली महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। कई शहरों में कैंडल मार्च निकाले गए और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग तेज होती गई।

मुख्य आरोपी संजय रॉय की गिरफ्तारी

घटना के एक दिन बाद यानी 10 अगस्त 2024 को कोलकाता पुलिस ने अस्पताल में कार्यरत नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों ने उसके खिलाफ कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाने का दावा किया।

मामले की गंभीरता और बढ़ते जनदबाव को देखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले की व्यापक जांच शुरू की।

सीबीआई ने घटनास्थल, डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की। कई लोगों से पूछताछ की गई और पूरे घटनाक्रम को नए सिरे से खंगाला गया।

जनवरी 2025 में दोषी करार हुआ संजय रॉय

लंबी सुनवाई के बाद जनवरी 2025 में कोलकाता की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

हालांकि पीड़िता के परिवार ने फैसले पर असंतोष जताते हुए फांसी की सजा की मांग की थी। परिवार का कहना था कि अपराध की क्रूरता को देखते हुए आरोपी को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए था।

इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

तत्कालीन प्रिंसिपल पर भी लगे गंभीर आरोप

मामले के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष भी विवादों के केंद्र में रहे। उन पर सबूतों से छेड़छाड़ और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे।

सीबीआई ने सितंबर 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का मानना था कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है।

हालांकि इन आरोपों को लेकर कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है और संबंधित मामलों में जांच आगे बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट की दखल और डॉक्टरों की सुरक्षा पर बड़ा कदम

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। शीर्ष अदालत ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेशनल टास्क फोर्स (NTF) का गठन किया।

टास्क फोर्स को अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं।

दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस कलकत्ता हाई कोर्ट के पास भेज दिया, ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया वहां संचालित हो सके।

मई 2026 में बनी सीबीआई की विशेष एसआईटी

पीड़िता के माता-पिता लगातार यह आशंका जताते रहे कि अपराध में एक से अधिक लोगों की भूमिका हो सकती है। इसी आधार पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2026 में सीबीआई की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया।

यह एसआईटी वर्तमान में पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या अपराध में किसी और की भी संलिप्तता थी और क्या शुरुआती जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गए थे।

न्याय की तलाश अब भी जारी

आरजी कर कांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, महिला सुरक्षा और जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवालों का प्रतीक बन चुका है। दो वर्ष बाद भी इस मामले को लेकर नए सवाल सामने आ रहे हैं और पीड़िता का परिवार अब भी संपूर्ण न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा नई जांच की घोषणा ने इस बहुचर्चित मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई जांच और मौजूदा एसआईटी की पड़ताल से कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या पीड़िता के परिवार को उन सवालों के जवाब मिल पाते हैं, जिनकी तलाश वे पिछले दो वर्षों से कर रहे हैं।

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VIKAS TRIPATHI
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